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ब्राह्मण समझकर कहीं रावण के सैनिक तो नहीं बन गए आप? जानिए सच

यूपी में अपराधी विकास दुबे के एनकाउंटर को लेकर लोग बुरी तरह से बंटे हुए हैं। ज़्यादातर लोग उसकी मौत को सही मानते हैं। कुछ लोग एनकाउंटर को ग़लत मानते हैं क्योंकि वो क़ानूनी तौर पर सही रास्ता नहीं है। लेकिन ऐसे लोग भी विकास दुबे के ख़ात्मे से कहीं न कहीं खुश हैं। लेकिन एक तबका ऐसा भी है जो सिर्फ़ जाति के आधार पर विकास दुबे का समर्थन कर रहा है। चूँकि उन्हें मुस्लिम समर्थक समाजवादी पार्टी और ईसाई समर्थक कांग्रेस का साथ मिल रहा है इसलिए संख्या में कम होने के बावजूद उनकी आवाज़ अधिक सुनाई दे रही है। अगर आप भी इस तबके के झाँसे में आ गए हैं तो आपके मन में उठ रहे सवालों के जवाब के लिए यह रिपोर्ट पढ़ना ज़रूरी है।

सवाल: गलती विकास दुबे की थी तो उसकी बीबी-बच्चे को ऐसे क्यों बैठाया ?

जवाब: वह तस्वीर लखनऊ की है, जब वो अपने घर से भाग रहे ते। पुलिस ने रुकने को बोला। वो जब रुके और सरेंडर की पोजीशन में बैठे तबकी फोटो है जो वायरल हो रही है। यह घटना पास-पड़ोस में रहने वालों ने भी देखी। एक चैनल से बातचीत में पड़ोसियों ने बताया कि पुलिस ने सावधान की मुद्रा में उन्हें हाथ उठाने और जमीन पर बैठ जाने को बोला क्योंकि उन्हें डर था कि उनके पास कोई हथियार न हो। बाद में उन्हें थाने में आराम से बिठाया गया। जिसकी तस्वीरें भी सामने हैं।

सवाल: अमर दुबे को अकारण मार दिया, अभी 9 दिन पहले उसकी शादी हुई थी?

जवाब: अमर दुबे अपने चाचा विकास दुबे से भी एक कदम आगे था। जिस लड़की से उसने शादी की थी उसे जबरन कॉलेज से अगवा किया था। घर वालों को बंधक बनाकर शादी के लिए तैयार किया था। वह भी ब्राह्मण की ही लड़की थी। क्या एक पढ़ने-लिखने वाली ब्राह्मण लड़की को अगवा करके उससे जबरन शादी करने वाले को आप ब्राह्मण स्वाभिमान का प्रतीक बनाना चाहते हैं?

सवाल: कुछ भी हो था तो ब्राह्मण ही, हमें जरूर साथ देना चाहिए।

जवाब: ब्राह्मणों की बेटियों के साथ दुर्व्यवहार, ब्राह्मणों की जमीनों पर कब्जा, अपने ही ब्राह्मण अध्यापक की हत्या, अपने ही रिश्तेदारों की हत्या, अपनी ही माँ को इतना मारना की उन्हें हॉस्पिटल ले जाना पड़े। अपनी पत्नी की अक्सर पिटाई करना… यदि आपको अभी भी लगता है कि ये कर्म एक ब्राह्मण के हैं तो माफ कीजियेगा आप भी ब्राह्मण नही हैं।

सवाल: योगी सरकार सिर्फ ब्राह्मणों को मार रही है। अतीक अहमद, मुख़्तार अंसारी, ब्रजेश जैसे गुंडे बचे हुए हैं।

जवाब: उत्तरप्रदेश पुलिस अब तक 9178 मुठभेड़ कर चुकी है। जिसमें 197 मारे गए। ब्राह्मण की संख्या सिर्फ 7 थी। जो विकास एंड कंपनी के बाद 14 हो गई। इसी दौरान कुल 26 राजपूत बदमाश मारे गए। बाकी अन्य हैं। मुठभेड़ों में 2309 घायल हुए, 22000 से ज्यादा ने समर्पण कर दिया, जिनमें ब्राम्हण सिर्फ 76 हैं। अतीक, बृजेश या मुख्तार के समय भी अगर योगी सरकार रही होती तो आत्मसमर्पण की जगह हालात कुछ और होते। (क्राइम इंडेक्स रिपोर्ट पढ़िए इसके लिए)

विकास दुबे की पत्नी से हिरासत में पूछताछ।

जात-पात छोड़िए पहले धर्म बचाइए!

आंख और कान खुले रखिये तथ्यों के मिलान कीजिये। राजनीतिक महत्वाकांक्षा की बलि होने से खुद को बचाइए। भेड़ मत बनिए, हिन्दू एक सिंह है उसे सिंह ही रहने दीजिए। अभी भी दिमाग न खुले तो नीचे कांग्रेस नेता उदितराज का ट्वीट देखिए कि कौन आपको उकसा रहा और आप किसके राजनीतिक महत्वाकांक्षा के शिकार हैं।

विकास दुबे को ब्राह्मण समाज का नायक बनाकर सामने रखा गया है कि ताकि पूरे ब्राह्मण समाज की खिल्ली उड़ाई जा सके। ठीक वैसे ही जैसे आनंद पाल को पूरे क्षत्रिय समाज का नायक बना दिया गया था, रामवृक्ष यादव को यादव समाज का, वरदराजा मुदलियार को दलित समाज का, भिंडरावाले को सिख समुदाय का। हर समुदाय, हर वर्ग के आपराधिक व्यक्ति आपको मिल जाएंगे, लेकिन क्या ये सच में किसी वर्ग का नेतृत्व करते हैं?

परशुराम और रावण, दोनों ब्राह्मण कुल के हैं। लेकिन एक को हम मंदिर में स्थापित करते हैं, दूसरे को चौराहे पर हर साल जलाते हैं। कर्म प्रधान भारत मे जातीय कीचड़ से बाहर आइए। राजनीतिक महत्वाकांक्षा के यज्ञ में खुद की समिधा देना बंद कीजिए, जातीय वरिष्ठता दिखाने की महत्वाकांक्षा में हिंदुत्व की नाव डूब रही है।

(अजेष्ठ त्रिपाठी की फ़ेसबुक वॉल से प्रेरित)

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