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जम्मू कश्मीर में घर बनाना चाहते हैं? जानिए क्या हैं ज़रूरी शर्तें और तरीक़ा

क्या आप जम्मू कश्मीर में ज़मीन लेकर अपना घर बसाना चाहते हैं और वहाँ के निवासी (Domicile) बनना चाहते हैं? अगर हाँ तो हम आपको इसके लिए आवश्यक शर्तों और प्रक्रिया के बारे में बताते हैं। सबसे पहले आपको बता दें कि अब तक 33 हजार से अधिक लोगों ने जम्मू कश्मीर में स्थायी निवास के लिए आवेदन किया है। इनमें से 6600 लोगों को निवास प्रमाणपत्र जारी भी किए जा चुके हैं। जम्मू में 5900 और कश्मीर में 700 लोगों को सर्टिफिकेट दिए गए हैं। पिछले सप्ताह ही जम्मू कश्मीर प्रशासन ने यह प्रक्रिया शुरू की है। अभी जिन लोगों ने आवेदन किया है और जिन्हें प्रमाणपत्र मिले हैं उनमें ज्यादातर गोरखा समुदाय के रिटायर्ड सैनिक और अफसर हैं। इसके अलावा कई सरकारी अधिकारी और कर्मचारी भी हैं। बड़ी संख्या में वाल्मीकि समुदाय के लोगों ने भी आवेदन किया है। 26 साल तक जम्मू कश्मीर में सर्विस करने वाले बिहार के IAS अधिकारी नवीन कुमार चौधरी पहले बाहरी हैं, जिन्हें जम्मू कश्मीर का निवासी प्रमाणपत्र मिला। यह भी पढ़ें: पीओके का एक गांव जहां लोग सोकर उठे तो हिंदुस्तानी हो चुके थे

आवेदन के लिए ज़रूरी योग्यता क्या?

प्रशासन ने निवासी प्रमाणपत्र के लिए कुछ ज़रूरी योग्यताएँ तय की हैं। जिन्हें पूरा करने वाले लोग ही आवेदन भर सकते हैं। ये शर्तें हैं:
1. जम्मू कश्मीर से बाहर रह रहे लोग और उनकी संतानें, जिनके पास जम्मू कश्मीर का स्थायी निवास प्रमाणपत्र हो।
2. कश्मीर से विस्थापित किए गए लोग।
3. कोई भी व्यक्ति जो किसी सिलसिले में जम्मू कश्मीर में कम से कम 15 साल रहा हो। उनके बच्चे भी इसके योग्य माने जाएँगे।
4. जम्मू कश्मीर के किसी भी हिस्से में 10 साल से अधिक सेवा देने वाले केंद्र सरकार, ऑल इंडिया सर्विसेज़, सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों (PSUs), केंद्रीय स्वायत्तशासी संस्थाओं, सरकारी बैंकों, संवैधानिक संस्थाओं, केंद्रीय विश्वविद्यालयों और मान्यता प्राप्त केंद्रीय शोध संस्थाओं के कर्मचारी और अधिकारी।
5. कोई भी जिसने जम्मू कश्मीर में कम से कम 7 साल तक पढ़ाई की हो और 10वीं, 12वीं की परीक्षा वहीं से दी हो।

सबसे ज़्यादा गोरखा लोगों के आवेदन

दरअसल जम्मू कश्मीर के अलग-अलग इलाक़ों में गोरखा समुदाय के लोग करीब 150 सालों से रह रहे हैं। डोगरा राजाओं ने उन्हें नेपाल से लाकर यहाँ बसाया था। अभी पूरे राज्य में एक लाख से अधिक गोरखा रहते हैं। इसी तरह वाल्मीकि समुदाय के लोगों को 1957 में पंजाब से लाकर बसाया गया था। लेकिन निवासी प्रमाणपत्र न होने के कारण ये सभी न तो ज़मीन ले सकते थे और न ही राज्य की नौकरियों में अर्ज़ी दे सकते थे। इतने सालो में इन सभी ने निवासी प्रमाणपत्र की उम्मीद तक छोड़ दी थी। गोरखा समुदाय तो सेना में काम करने के कारण संपन्न था, लेकिन वाल्मीकि समुदाय के लोग सफ़ाई कर्मचारी के अलावा कोई दूसरी नौकरी नहीं कर सकते थे। यह भी पढ़ें: जारी है मोदी का मिशन मुज़फ़्फ़राबाद, पीओके की आज़ादी दूर नहीं

निवास के लिए कैसे करें आवेदन?

अगर आप योग्यता पूरी करते हैं तो तहसीलदार के दफ़्तर में जाकर अर्ज़ी दे सकते हैं। इसके अलावा वेबसाइट www.jk.gov.in पर भी फॉर्म भरा जा सकता है। डोमिसाइल सर्टिफिकेट के लिए राशन कार्ड, अचल संपत्ति रिकॉर्ड, शिक्षा प्रमाण पत्र, बिजली बिल, सत्यापित लेबर कार्ड, नौकरी के प्रमाणपत्र जैसे दस्तावेजों की जरूरत होगी।

लाखों लोगों के लिए अच्छा अवसर

पहले धारा 370 के कारण जम्मू कश्मीर की बेटियां अगर राज्य से बाहरी व्यक्तियों से शादी करती थीं तो उनकी नागरिकता छिन जाती थी। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा, अब वो और उनके बच्चे भी राज्य की स्थायी नागरिकता के योग्य माने जाएँगे। साथ ही कश्मीर में तैनात सेना के जवानों के लिए ये बढ़िया मौक़ा होगा। माना जा रहा है कि निवासी प्रमाणपत्र की ये प्रक्रिया समय के साथ तेज़ होगी और देश के दूसरे हिस्सों के अधिक लोग इसके लिए आवेदन करेंगे। उम्मीद की जा रही है कि आगे चलकर आवेदन की शर्तों में ढील दी जाएगी और सामान्य लोगों के लिए भी इसे खोला जाएगा।

(न्यूजलूज़ टीम)

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