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गुजरात में ‘देसी वेंटिलेटर’ बचा रहा है लोगों की जान, कांग्रेस ने बताया था नक़ली

कोरोना वायरस के बढ़ते आँकड़ों के बीच गुजरात से एक अच्छी ख़बर है। राज्य में कोरोना वायरस से मरने वालों की संख्या पर क़ाबू पाने में बड़ी कामयाबी मिली है। जून महीने के अंत तक जो आँकड़े आए हैं, उनके अनुसार राज्य में मृतकों की संख्या का ग्राफ़ लगातार स्थिर बना हुआ है। 2 जुलाई तक यह संख्या 1900 के आसपास है, जबकि इसके 5000 से भी ज़्यादा होने की आशंका जताई जा रही थी। पड़ोस के ही महाराष्ट्र में यह स्थिति लगातार बनी हुई है। गुजरात की इस सफलता के पीछे बड़ा योगदान देसी वेंटिलेटर ‘धमन’ का माना जा रहा है। ख़ास तौर पर संक्रमण की शुरुआती अवस्था वाले मरीज़ों को ठीक करने में इसका बढ़िया रोल रहा है। इस वेंटिलेटर को लेकर पिछले दिनों में काफ़ी विवाद पैदा हुआ था। अहमदाबाद के सरकारी अस्पताल के एक डॉक्टर ने हमें बताया कि “यह बात सही है कि गंभीर रोगियों के लिए यह वेंटिलेटर पूरी तरह कामयाब नहीं है, लेकिन इसके कारण बड़ी संख्या में मरीजों को गंभीर अवस्था तक पहुँचने से बचाया जा सका।” यह भी पढ़ें: किसके इशारे पर हो रहा है देसी वेंटिलेटर के खिलाफ दुष्प्रचार?

गुजरात में सबसे ख़तरनाक है कोविड-19

यह पाया गया है कि गुजरात और महाराष्ट्र में कोविड-19 का जो वायरस फैला है वो देश में सबसे अधिक जानलेवा है। जाँच में इनमें एल-स्ट्रेन पाया गया है, जो कि अधिक ख़तरनाक होता है। ऐसे मरीज़ों को शुरू से ही ऑक्सीजन दिया जाए तो उनकी स्थिति बिगड़ने से रोकी जा सकती है। ऐसे में गुजरात में ही बना सस्ता वेंटिलेटर बहुत काम का साबित हुआ है। इसी के चलते गुजरात में मृतकों का ग्राफ़ लगातार स्थिर बना हुआ है। जबकि महाराष्ट्र और दिल्ली जैसे राज्यों में इसमें तेज़ उछाल देखा गया। गुजरात में जून के पहले 15 दिनों में हर रोज़ औसतन 30 लोगों की मौत हो रही थी, जो कि अब घटकर 20 के आसपास रह गई है। ग्राफ़ लगातार नीचे की तरफ़ जा रहा है। यह स्थिति तब है जब नए मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। यह भी पढ़ें: धार्मिक संस्था का अस्पताल, मोदी ने की मदद… क्रेडिट लेने पहुंच गए केजरीवाल

मेडिकल वेंटिलेटरों की ज़रूरत कम हुई

मेक इन इंडिया वेंटिलेटर ‘धमन’ को अभी विकसित करने का काम चल रहा है। लेकिन अभी जो शुरुआती मॉडल है उसके कारण अस्पतालों में लगे मेडिकल वेंटिलेटरों की माँग कम हुई है। गुजरात में 3 जुलाई के दिन लगभग 7500 मरीज़ थे, जिनमें मात्र 68 ऐसे थे जिन्हें वेंटिलेटरों की ज़रूरत थी। इनके अलावा 1000 से ज़्यादा लोगों को धमन के साथ सपोर्ट पर रखा गया है। ये वो लोग हैं जिनकी तबीयत बहुत ख़राब नहीं है, लेकिन धमन के कारण आगे उनकी तबीयत बिगड़ने की आशंका भी बहुत कम हो जाएगी। इन देसी वेंटिलेटरों को गुजरात भर में बने सरकारी कोविड सेंटरों में लगाया गया है। यही कारण है कि गुजरात में अभी तक यह स्थिति नहीं आई है कि किसी कोरोना मरीज़ को अस्पताल में भर्ती होने के लिए भटकना पड़े। यह भी पढ़ें: कोरोना के नाम पर भारत को घटिया माल बेचने के चक्कर में ‘चीन के सेल्समैन’

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(न्यूज़लूज़ टीम)

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