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महाराणा प्रताप पर फिर कांग्रेस का ‘हमला’, स्कूली किताब में अपमानजनक टिप्पणी

राजस्थान में अशोक गहलोत सरकार ने एक बार फिर महाराणा प्रताप के इतिहास से छेड़छाड़ शुरू कर दी है। राज्य शिक्षा बोर्ड की दसवीं कक्षा के सामाजिक विज्ञान की किताब में महाराणा प्रताप के हल्दीघाटी युद्ध के जीतने के बारे में दिए सारे उल्लेखों को हटा दिया गया है। नई किताब में बताया गया है कि राणाप्रताप हार गए क्योंकि वो युद्ध कौशल में बहुत निपुण नहीं थे। किताब में उन्हें एक ‘कमजोर राजा’ बताया है। इसके मुताबिक “16वीं सदी में मेवाड़ के राजा महाराणा प्रताप में शत्रुतापूर्ण परिस्थितियों में एक सेनानायक के रूप में धैर्य और योजना बनाने की क्षमता में कमी थी।” किताब के दूसरे अध्याय ‘संघर्षकालीन भारत’ में लिखा गया है कि ‘किसी भी सेनानायक में प्रतिकूल परिस्थितियों में जिस धैर्य और योजना की आवश्यकता होती है, महाराणा प्रताप में उसकी कमी थी। किताब के अनुसार “महाराणा प्रताप और अकबर के बीच युद्ध धार्मिक नहीं बल्कि राजनीतिक था”। राजस्थान बोर्ड के ई-पाठ्क्रम में भी इसका उल्लेख किया गया है। यह पाठ हल्दीघाटी के युद्ध के बारे में है। यह भी पढ़ें: जो अकबर भी न कर सका, कांग्रेस ने कर दिखाया, कुंभलगढ़ क़िले में नमाज़

महाराणा प्रताप पर बेहूदी टिप्पणियाँ

ख़ास बात है कि राजस्थान बोर्ड की इन किताबों को ऐतिहासिक तथ्यों के बजाय किसी के विचार पर आधारित लिखा गया है। जानबूझकर ऐसे शब्द प्रयोग किए गए हैं जिनकी मंशा बच्चों के अंदर हीनभावना डालने और महाराणा प्रताप को छोटा-मोटा और हारा हुआ राजा साबित करने की है। किताब में लिखा गया है कि “अकबर की सेना पहाड़ी इलाकों में लड़ने में निपुण नहीं थी, वहीं महाराणा प्रताप की सेना मैदानों में लड़ने में सक्षम नहीं थी। इस किताब के लेखक का नाम चंद्रशेखर शर्मा है। मीडिया ने जब लेखक से इस बारे में पूछताछ की तो उनका कहना था कि “मैंने किताब में इस तरह की कोई बात नहीं लिखी थी। मुझे जानकारी नहीं है कि ये तथ्य कैसे और किसने जोड़े।” यह भी पढ़ें: चित्तौड़ की महारानी पद्मावती के नाम एक पत्रकार की चिट्ठी

राणा से पुरानी है कांग्रेस की दुश्मनी

2018 में राजस्थान में सत्ता में आते ही कांग्रेस ने सबसे पहले किताबों को बदलने का काम किया था। हल्दीघाटी युद्ध में राणा प्रताप की जीत के इतिहास को बदलकर नई किताब में बताया जाने लगा कि वो युद्ध अकबर जीता था। जबकि तमाम ऐतिहासिक दस्तावेज और राजस्थान की लोककथाओं में यही कहा गया है कि राणा प्रताप विजयी हुए थे। राजस्थान राजपूतों की धरती है और वहाँ पर महाराणा प्रताप के इतिहास से ऐसी छेड़छाड़ हैरानी में डालने वाली है। बीजेपी ने इसका यह कहते हुए विरोध किया है कि ये चैप्टर फ़ौरन किताब से हटाया जाए। महाराणा प्रताप की वंशज और जयपुर के राजपरिवार की सदस्य दीया कुमारी ने कहा कि “जब भी कांग्रेस सत्ता में आती है वो राजपूतों के इतिहास से छेड़छाड़ शुरू कर देती है।” मज़ेदार बात है कि ख़ुद को राजपूतों का संगठन बताने वाली कर्णी सेना चुप्पी साध रखी है। माना जाता है कि कर्णी सेना के पीछे कांग्रेस का ही हाथ है, ताकि हिंदुओं को कमजोर किया जा सके। यह भी पढ़ें: हमेशा से हिंदू विरोधी रही है कांग्रेस, पढ़ें 10 सबूत

नीचे आप किताब के उस विवादित अंश के ऑनलाइन स्क्रीनशॉट को पढ़ सकते हैं।

दूसरे वीरों का भी अपमान किया गया

महाराणा प्रताप ही नहीं, राजस्थान की वीर परंपरा से जुड़े तमाम दूसरे महापुरुषों को भी कांग्रेस सरकार ने अपमानित करने का अभियान शुरू किया है। 17 जून को राजस्थान पत्रिका में छपी रिपोर्ट के अनुसार राणा सांगा, पन्ना धाय और छत्रपति शिवाजी के अध्याय भी राजस्थान बोर्ड की नई किताबों से ग़ायब हैं। इसी तरह 12वीं क्लास के इतिहास की पुस्तक में वीर सावरकर के नाम के आगे से ‘वीर’ हटा दिया गया। यह आरोप लगता रहा है कि राजस्थान में कांग्रेस के सत्ता में आते ही ईसाई मिशनरियों और जिहादी संगठनों की गतिविधियाँ तेज़ हो गई हैं और हिंदुओं के धर्मांतरण का काम भी शुरू हो गया है। एक तरफ़ स्कूली किताबों को बदलकर कांग्रेस अपना मज़हबी एजेंडा आगे बढ़ा रही है, दूसरी तरफ़ केंद्र की सत्ता में बैठी बीजेपी 6 साल बाद भी अभी तक बच्चों के किताबों में भरे जिहादी ज़हर को निकाल नहीं पाई है। पढ़ें रिपोर्ट: स्कूली किताबों में वामपंथी ज़हर से अब अगले साल मिलेगा छुटकारा, जानिए क्या है कारण

(आशीष कुमार की रिपोर्ट)

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