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जिहादी सफूरा जरगर को ज़मानत से खुश क्यों नहीं है टुकड़े-टुकड़े गैंग?

दिल्ली में हुए हिंदूविरोधी दंगों की साज़िशकर्ता सफूरा जरगर को आख़िरकार ज़मानत मिल गई है। दिल्ली हाई कोर्ट ने उसे मानवीय आधार पर ज़मानत दे दी। सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने ज़मानत याचिका का विरोध नहीं किया। सफूरा जरगर पर फरवरी में दिल्ली में नागरिकता कानून के खिलाफ चल रहे प्रदर्शन के दौरान दंगे भड़काने का आरोप है। उसे आतंकवाद विरोधी कानून के तहत 10 अप्रैल गिरफ्तार किया था। वह गर्भवती है और लगभग पांच महीने से तिहाड़ जेल में बंद थी। कोर्ट ने सफूरा को 10 हजार रूपए के मुचलके पर छोड़ा, लेकिन शर्त रखी कि इस दौरान वो दिल्ली छोड़कर बाहर नहीं जा सकती। साथ ही उसे चेतावनी दी गई कि कोई ऐसा काम नहीं करे जिससे जांच पर असर पड़े। साथ ही उसे 15 दिन में एक बार जांच अधिकारी से फोन पर बात भी करनी होगी। चौंकाने वाली बात है कि दिल्ली दंगों में संदिग्ध भूमिका निभाने वाले इस जमानत पर सकते में हैं। पुलिस सूत्रों की मानें तो उनकी बड़ी प्लानिंग इससे नाकाम हो गई है। ऊपर हमने इस मामले में सबसे ज़्यादा सक्रिय एनडीटीवी चैनल के प्रोग्राम की तस्वीर लगाई है, इससे आप एंकर के चेहरे के भाव पढ़ सकते हैं। यह भी पढ़ें: जानिए दिल्ली दंगों के मोस्टवांटेड खालिद सैफी की करतूतों का कच्चा चिट्ठा

पुलिस ने ज़मानत क्यों होने दी?

कई लोग इस बात पर नाराज़गी जता रहे हैं कि पुलिस ने इस दंगाई की ज़मानत का विरोध क्यों नहीं किया। ग़ुस्सा इस बात पर भी है कि इतनी संगीन आरोपी को गर्भवती होने के आधार पर छोड़ना एक ग़लत परंपरा शुरू कर सकता है। लेकिन जब हमने इस बारे में पुलिस सूत्रों से बात की तो अहम जानकारियाँ हाथ लगीं। दरअसल पिछले कुछ दिनों में सफूरा जरगर को दुनिया भर में पब्लिसिटी दिलाई गई है। उसके नाम पर यह साबित करने की कोशिश हो रही है कि भारत में मुसलमानों को परेशान किया जा रहा है। अगर इतना ही होता तो भी ठीक था। लेकिन तिहाड़ जेल की महिला वार्ड की कर्मचारियों ने गौर किया कि पिछले कुछ समय से सफूरा की गतिविधियाँ संदिग्ध हैं। इससे शक पैदा हुआ कि वो शायद अपने पेट में पल रहे बच्चे को मारना चाहती है। हालाँकि उसके साथ सुरक्षा रहती थी, लेकिन हर समय उस पर नज़र रखना संभव नहीं था। यह शक था कि वो अपने पेट पर किसी चीज से वार करके गर्भपात करवा सकती है। यह भी पढ़ें: देश तोड़ने के लिए मुसलमानों को मोहरा बना रहे हैं शहरी नक्सली

टुकड़े-टुकड़े गैंग में मायूसी क्यों?

सोशल मीडिया की प्रतिक्रियाओं पर नज़र डालें तो सफूरा जरगर के सबसे करीबी कुछ लोग इस ज़मानत से बहुत खुश नहीं दिखाई दे रहे। पुलिस सूत्रों के अनुसार यह तय हो चुका था कि डिलिवरी से ठीक पहले सफूरा कुछ ऐसा करेगी जिससे उसका गर्भपात हो जाए। ऐसा करके वो सहानुभूति बटोरने में कामयाब हो जाती और दिल्ली दंगों की साज़िश में उसकी हिस्सेदारी पर पर्दा पड़ जाता। साथ ही इसी बहाने पूरी दुनिया में भारत को बदनाम करने का सुनहरा मौक़ा भी मिल जाता। लिहाजा सरकार ने यह पहले से ही तय कर लिया था कि वो इस बार ज़मानत का विरोध नहीं करेगी। सरकार के इस पैंतरे की सफूरा के मददगारों को बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी। बताया जा रहा है कि ये उसकी आख़िरी ज़मानत अर्ज़ी थी। यह भी सिर्फ़ इसलिए दाखिल की गई थी ताकि माहौल बना रहे। यह तय था कि आगे कोई और अर्ज़ी नहीं डाली जाएगी। यह भी पढ़ें: किससे बार-बार फ़ोन पर बात कर रहा था ताहिर हुसैन

फ़िलहाल दिल्ली दंगों की जाँच तेज़ी से जारी है। पुलिस बारी-बारी सभी मामलों में चार्जशीट दाखिल कर रही है। सफूरा जरगर इस मामले में बुरी तरह से फँसी हुई है, लेकिन इतना तय है कि मुख्य सरग़ना कोई और है। पुलिस को पता है कि बच्चे के जन्म के बाद वो जब चाहे सफूरा को वापस जेल ला सकती है। क्योंकि ज़मानत सिर्फ़ गर्भवती होने के आधार पर है, बच्चा पैदा होने के बाद यह लागू नहीं होगी।

(न्यूज़लूज टीम)

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