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धार्मिक संस्था का अस्पताल… मोदी ने की मदद… क्रेडिट लेने पहुंच गए केजरीवाल!

दिल्ली और पूरे देश को कोरोना वायरस के संकट में झोंकने के बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल अब भी लगता है मानने को तैयार नहीं हैं। दिल्ली में स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खुलने के बाद केंद्र सरकार इसे अपने हाथ में ले चुकी है। इसके बावजूद केजरीवाल सरकार श्रेय लेने के चक्कर में ऐसे काम कर रही है जिनमें ख़ुद उसकी भद पिट रही है। ताज़ा मामला राधा स्वामी सत्संग ब्यास से जुड़ा हुआ है। दरअसल ब्यास के प्रमुख बाबा गुरिंदर सिंह ढिल्लो ने क़रीब डेढ़ महीने पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलकर प्रस्ताव रखा था कि वो दक्षिणी दिल्ली के भाटी माइन्स इलाक़े में अपने ख़ाली पड़े आश्रम में 10 हज़ार बेड का कोविड हॉस्पिटल बनवाना चाहते हैं। केंद्र सरकार के तकनीकी सहयोग से अस्पताल जब बनकर तैयार हो गया तो सीएम केजरीवाल और डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया मीडिया के लाव-लश्कर के साथ पहुँच गए और वहाँ पहुँचकर अपनी फ़ोटो खिंचवाई, ताकि लोग समझें कि उन्होंने ही इसे खुलवाया है। ताजा खबर यह है कि केजरीवाल की हरकत के कारण गृहमंत्री अमित शाह को बयान देकर साफ करना पड़ा है कि यह आश्रम का अस्पताल है और इसे बनाने में ITBP ने मदद की है।

देश का सबसे बड़ा कोविड हॉस्पिटल

राधा स्वामी आश्रम में खुला कोरोना वायरस मरीज़ों के इलाज का ये देश का सबसे बड़ा अस्पताल है। फ़िलहाल 10 हज़ार बेड लगाए गए हैं, जिनकी देखभाल के लिए 400 डॉक्टर और 800 नर्सें होंगी। अस्पताल में कई ब्लॉक बनाए जाएंगे और हर ब्लॉक में 100 बेड होंगे। कुछ ब्लॉक तैयार हो चुके हैं और बाक़ी पर तेज़ी से काम चल रहा है। ये अस्पताल कुल ढाई लाख वर्ग फीट एरिया में है। यहां गत्ते से बने बेड लगाए जा रहे हैं, जिन्हें रीसाइकिल किया जा सकेगा। इन्हें सैनिटाइज करने की ज़रूरत नहीं होती। अस्पताल के अंदर ऑक्सीजन, पैथोलॉजी लैब और टेस्टिंग वग़ैरह के सारे आधुनिक इंतज़ाम लगाए गए हैं, ताकि मरीज़ों को कहीं बाहर न ले जाना पड़े। वेंटिलेटर वग़ैरह भी केंद्र सरकार ने मुहैया कराए हैं। जुलाई के पहले सप्ताह से यहाँ मरीज़ों को भर्ती किया जाने लगेगा। यह भी पढ़ें: सैनेटाइजेशन में फ़िल्मी स्टाइल फ़ोटोग्राफ़ी करवा रहे हैं AAP नेता

फ़ोटो खिंचाने पहुँचे सीएम केजरीवाल

आश्रम के अधिकारियों को तब हैरानी हुई जब गुरुवार को केजरीवाल और सिसोदिया अस्पताल का जायज़ा लेने पहुँचे। उनके साथ मीडिया का एक बड़ा लाव-लश्कर भी आया था। कई घंटे तक फ़ोटोग्राफ़ी चलती रही। अगले दिन जब चैनलों और अख़बारों में इसका समाचार आया तो उनमें केजरीवाल ही केजरीवाल छाए हुए थे। आजतक और एनडीटीवी जैसे चैनलों ने तो इस पर लंबी-लंबी रिपोर्ट दिखाई और कहीं भी नहीं बताया कि इसके पीछे केजरीवाल का कोई योगदान नहीं है। कई अख़बारों ने भी इस पर रिपोर्ट प्रकाशित की है और यह जताने की कोशिश की है कि अस्पताल दिल्ली सरकार ने खोला है। जबकि सच्चाई कुछ और ही है। समाचार एजेंसी एएनआई ने भी उनकी इस यात्रा की तस्वीरें ट्वीट की हैं।

फेल होकर भी क्रेडिट लेने की होड़

दिल्ली में केजरीवाल सरकार के पूरी तरह नाकाम रहने के बाद फ़िलहाल दिल्ली में स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह केंद्र सरकार अपने हाथ में ले चुकी है। छह सीनियर आईएएस अधिकारियों को महामारी के नियंत्रण के इंतज़ामों की देखरेख का ज़िम्मा सौंपा गया है। ये सभी अधिकारी सीधे गृह मंत्री अमित शाह को रिपोर्ट कर रहे हैं और उनके मातहत दिल्ली सरकार के अधिकारी काम कर रहे हैं। केजरीवाल या दिल्ली सरकार के मंत्रियों के पास कोई अधिकार नहीं हैं, लेकिन वो श्रेय लेने की जीतोड़ कोशिश कर रहे हैं। बीते एक सप्ताह में अस्पतालों में मरीज़ भर्ती न करने और टेस्ट से मना करने जैसी समस्याओं पर काफ़ी हद तक क़ाबू पाया गया है। साथ ही केंद्र सरकार ने प्राइवेट अस्पतालों की फ़ीस दो-तिहाई तक कम कर दी गई है। केजरीवाल सरकार की मिलीभगत से दिल्ली के प्राइवेट अस्पताल मरीज़ों को लूट रहे थे। वैसे केजरीवाल इससे पहले आजतक चैनल की मदद से झंडेवालान मंदिर के भंडारे का क्रेडिट भी ले चुके हैं। पढ़ें: झंडेवालान मंदिर के भंडारे को आजतक ने बताया केजरीवाल का किचन

गृहमंत्री अमित शाह ने केजरीवाल को संबोधित करते हुए कहा है कि अस्पताल का काम आश्रम ने किया है और केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर ITBP ने उनकी मदद की।

दिल्ली बीजेपी के नेता कपिल मिश्रा इसे लेकर लगातार केजरीवाल की चुटकी ले रहे हैं।

(न्यूज़लूज़ टीम)

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