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जब जान हथेली पर लेकर टूट पड़े जाँबाज़… कम से कम 100 मारने की ख़बर

गलवान वैसी की सैटेलाइट इमेज जिससे आप जगह का अंदाज़ा लगा सकते हैं कि कैसे ऊँचाई से जवान नदी में गिरते गए।

लद्दाख के गलवान वैली में 15 और 16 जून की रात को क्या हुआ? यह सवाल अब भी बहुत सारे लोगों के मन में है। आखिर कैसे झगड़ा शुरू हुआ और इस हद तक पहुंच गया कि बड़ी संख्या में जवानों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। इस बारे में अलग-अलग सूत्रों से जो जानकारी सामने आ रही है वो सच के काफी करीब है। लेह के आर्मी हॉस्पिटल में भर्ती कराए गए घायल जवानों और मौके पर मौजूद कुछ अन्य सैनिकों ने जो जानकारी दी है उसके मुताबिक कम संख्या के बावजूद भारतीय सैनिक ऊंची पहाड़ी पर मौजूद चीनी टुकड़ी पर टूट पड़े थे। और आमने-सामने की गुत्थमगुत्था में स्थिति यहां तक पहुंच गई कि कई जवान पहाड़ी से फिसल-फिसल कर नदी में जा गिरे। भारतीय जवानों ने कई चीनी सैनिकों के हाथों से उनके कँटीले हथियार भी छीन लिए और उन्हीं से हमला शुरू कर दिया। आगे हम आपको बताएंगे कि कैसे इस लड़ाई में चीन का ज्यादा नुकसान हुआ।

उस रात को गलवान वैली में क्या हुआ?

भारतीय जवानों के मुताबिक़ पेट्रोलिंग प्वाइंट 14 से जब चीन के सैनिक वापस जा रहे थे तो उन्होंने वहाँ पर अपना एक टेंट छोड़ दिया। इस पर भारतीय टुकड़ी ने उन्हें टेंट भी हटाने को बोला। इस पर वो नहीं माने और पत्थर फेंकने लगे। इतने में ही भारतीय टुकड़ी ने टेंट में आग लगा दी। चीन के सैनिक थोड़ी ऊँचाई पर थे। लिहाज़ा उनको शुरुआती बढ़त मिल गई। इसी हमले में कमांडिंग ऑफ़िसर कर्नल बी संतोष बाबू बुरी तरह ज़ख़्मी हो गए। इसके बाद भारतीय जवान भी बेक़ाबू हो गए और उन्होंने उस पहाड़ी पर चढ़ना शुरू कर दिया, जिस पर चीन के सैनिक भारी संख्या में मौजूद थे। इतने में ही दोनों सेनाओं की अतिरिक्त टुकड़ियाँ पीछे से आ गईं। लगभग 3 से 4 घंटे तक चली इस मारपीट के दौरान कई जवान घायल हालत में नदी में गिर गए। नदी का पानी बेहद ठंडा होने के कारण ज़्यादातर ख़ुद को सँभाल नहीं पाए, क्योंकि उनको हाइपोथर्मिया (Hypothermia) हो गया। इस अवस्था में व्यक्ति के हाथ-पैर अकड़ जाते हैं। जहां पर ये सब हुआ वो बेहद संकरी घाटी है। बड़ी संख्या में दोनों तरफ के सैनिकों की मौत के पीछे भी यही कारण है। मंगलवार देर सुबह तक चीन अपने सैनिकों के शवों की तलाश श्योक गलवान नदी के संगम पर करता रहा था। चीन को ज्यादा नुकसान का कारण यही था कि पहाड़ी पर उसके ज्यादा सैनिक मौजूद थे और शारीरिक तौर पर उनके मुकाबले बलिष्ठ भारतीय जवान उन पर बुरी तरह हावी हो गए थे। चीन में खुफिया सूत्रों से जो खबरें आ रही हैं उनमें तो 100 सैनिकों के मरने तक के दावे किए गए हैं।

अमेरिका ने माना 35 से ज़्यादा चीनी मरे

अमेरिकी इंटेलिजेंस एजेंसियों ने अपने देश में जो रिपोर्ट भेजी है उसके मुताबिक़ मंगलवार रात हुई मारपीट में चीन के कम से कम 35 सैनिक मारे गए हैं। अमेरिकी अख़बार यूएसए न्यूज़ ने एक रिपोर्ट छापी है जिसमें कहा गया है कि इस झड़प में चीन को बहुत बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है। मरने वालों में चीन का कमांडिंग ऑफिसर भी शामिल है। दरअसल चीन दुनिया भर में सैटेलाइट और वायरलेस नेटवर्क की निगरानी करता रहता है। इस इलाके में भारत और चीन के बीच तनाव के कारण उसने पिछले कुछ सप्ताह से निगरानी का काम तेज कर दिया था। इसमें कहा गया है कि दोनों पक्षों ने ईंट-पत्थर, चाकू और नुकीले हथियारों का इस्तेमाल किया। लेकिन इतनी बड़ी संख्या में मौत का कारण मारपीट नहीं, बल्कि इस इलाके की बनावट है। जिस जगह पर भारत और चीन के सैनिक गुत्थमगुत्था हुए वहां एक तरफ ऊंचे पहाड़ और दूसरी तरफ श्योक, गलवान नदी का संगम है। भारतीय खुफिया एजेंसियों ने भी मरने वालों और घायलों को मिलाकर कुल 43 से अधिक होने का अनुमान जताया है। हालांकि चीन से आ रही कुछ अपुष्ट जानकारियों के मुताबिक कई अन्य घायल सैनिक भी दम तोड़ चुके हैं और अब मृतकों की संख्या 100 के लगभग पहुंचने को है।

नीचे आप उन नुकीली कीलों वाले डंडों को देख सकते हैं, जो चीनी सैनिक अपने साथ लेकर आए थे। भारतीयों ने ऐसे कई डंडे उनसे छीन लिए और उन्हीं पर इसका इस्तेमाल शुरू कर दिया।

बेहद बौखलाई हुई है चीन की सरकार

अमेरिकी ख़ुफ़िया अलर्ट के मुताबिक़ इस घटना से चीन सरकार बेहद नाराज़ है। उसे ये शर्मिंदगी लग रही है कि लड़ाई में भारतीय सेना उसके जवानों पर भारी पड़ गई। यही कारण है कि उसने मारे गए अपने जवानों की सही संख्या बताने से इनकार कर दिया। रिपोर्ट में यह भी इशारा किया गया है कि चीन का हमला पहले से तय था। उसके जवान पूरी तैयारी के साथ आए थे। उन्होंने सोचा था कि हमला होने पर भारतीय टुकड़ी उलटे पाँव भाग जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ और भारतीय जवान उनके साथ गुत्थम-गुत्था हो गए। भारतीय जवानों ने ही कई चीनी सैनिकों को उठा-उठाकर नदी में फेंक दिया। इस दौरान फिसलकर कुछ भारतीय जवान भी नीचे गिरे और घायल हो गए। फ़िलहाल अमेरिकी एजेंसियाँ इस बात की आशंका जता रही हैं कि चीन अभी मामले को शांत करके सही समय आने पर बदला लेने की कोशिश करेगा।

नीचे सैटेलाइट तस्वीर में आप श्योक और गलवान नदी के संगम को देख सकते हैं। इसी के किनारे की संकरी जगह पर झड़प हुई।

घटना पर चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के बयान में भी यही बात झलक रही है।

(न्यूज़लूज़ टीम)

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