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मीडिया ने फिर दिखाया हिंदूफोबिया, हाथ चूमने वाले मौलवी को बताया बाबा

भारतीय मीडिया हिंदुओं से किस हद तक घृणा में डूबा हुआ है, इसकी एक और मिसाल सामने आई है। मध्य प्रदेश के रतलाम में हाथ चूमकर लोगों के इलाज का दावा करने वाले एक मौलवी की कोरोना वायरस से मौत हो गई। असलम मियाँ नाम के इस मौलवी को तमाम अख़बारों और चैनलों ने जानबूझकर ‘बाबा’ लिखा है और उसके यहाँ झाड़फूंक कराने वालों को उसका ‘भक्त’ बताया है। आजतक चैनल ने तो सारी हदें पार करके ख़बर के साथ फ़ोटो में तिलक लगाए एक हिंदू साधु को दिखाया है। इसने ख़बर के शुरुआती हिस्से में बड़ी सफ़ाई से छिपाया है कि वो दरअसल मौलवी है और उसका नाम असलम मियाँ है। आजतक ही नहीं, कई लोकल अखबारों और चैनलों ने भी यही खेल किया है।

क्या है मौलवी का मामला?

कोरोना संक्रमण से रतलाम के नयापुरा में झाड़-फूंक करने वाले असलम मियां की 4 जून को मौत हो गई थी, उसके बाद से उसके संपर्क में आए लोगों के पॉजिटिव निकलने का सिलसिला जारी है। इस कारण नयापुरा का ये इलाका अब हॉटस्पॉट बन गया है। बाबा के सीधे संपर्क में आने वालों में 29 पॉजिटिव पाए गए हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि इतने प्रचार के बाद भी कुछ लोग अंधविश्वास में मौलवी के पास कोरोना का इलाज कराने पहुंच रहे थे और वो लोगों का हाथ चूमकर दुआ देकर कोरोना को भगा रहा था। मौलवी के संपर्क में आने वाले ज़्यादातर लोग एक ही मज़हब के हैं। उनमें से कई एक ही परिवार के हैं। अब तक 50 सैंपल लिए जा चुके हैं और 200 से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग की गई है।

हिंदुओं के ख़िलाफ़ दुष्प्रचार

अक्सर देखा जाता है कि ऐसे मामलों में मीडिया जानबूझकर ख़बर ऐसे देता है मानो ये किसी हिंदू धार्मिक गुरु के बारे में हो। आजतक ही नहीं, दैनिक जागरण, नई दुनिया, न्यूजडी, न्यूज18 जैसे संस्थानों ने इस मौक़े का इस्तेमाल हिंदुओं को बदनाम करने के लिए किया। ज़्यादातर ने उसे बाबा लिखा, जबकि बाबा हिंदू धर्म गुरुओं के लिए प्रयोग होने वाली उपाधि है। असलम एक मौलवी था, लेकिन उसको मौलवी लिखने से देश के सेकुलरिज्म और गंगा-जमुनी तहज़ीब पर ख़तरे की आशंका थी। ख़ास बात यह है कि हिंदुओं का मज़ाक़ उड़ाने की नीयत से कई लोग इस ख़बर को शेयर कर रहे हैं। इनमें कट्टरपंथी नेता असदुद्दीन ओवैसी भी शामिल हैं। जिन्होंने इसे रीट्वीट किया है। जिस पर बीजेपी नेता संबित पात्रा ने पलटवार किया है।

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