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क्या चीन के इशारे पर भारतीय सेना से सबूत माँग रहे हैं राहुल गांधी?

लद्दाख में भारतीय सीमा के अंदर चीन की घुसपैठ को लेकर राहुल गांधी के गैरजिम्मेदाराना बयानों का सिलसिला जारी है। उन्होंने लगातार चौथे दिन ट्वीट करके कहा है कि चीन ने हमारी ज़मीन पर क़ब्ज़ा कर लिया। राहुल गांधी इसकी आड़ में भले ही केंद्र सरकार पर निशाना साध रहे हों, लेकिन उनके बयानों के कारण भारतीय सेना ख़ुद को असहज स्थिति में पा रही है। भारतीय सेना साफ़ कर चुकी है कि चीन के सैनिक भारतीय नियंत्रण वाले इलाक़े में नहीं हैं। वो सिर्फ़ उस इलाक़े तक आए थे, जिस पर भारत अपना होने का दावा करता है। आम तौर पर उस इलाक़े में चाइनीज़ और भारतीय सैनिक अक्सर पैट्रोलिंग के लिए जाते रहते हैं। फ़र्क़ सिर्फ़ यह रहा कि इस बार चीन ने वहाँ पर अपने तंबू गाड़ लिए। राहुल गांधी की इस बयानबाज़ी से भारतीय सेना के पूर्व अधिकारी बेहद नाराज़ हैं और कह रहे हैं कि उनकी बातों से सेना का मनोबल कमजोर होता है। राहुल गांधी डोकलाम विवाद के समय भी यही काम कर चुके हैं। यह भी पढ़ें: जब चीन के दूतावास में चोरी-चुपके गए थे राहुल गांधी

कांग्रेस का सबूत कांड पार्ट-3

कांग्रेस ने उरी हमले के बाद सर्जिकल ऑपरेशन के सबूत माँगे थे। इसके बाद जब बालाकोट एयरस्ट्राइक हुआ तब भी सबूत माँगने में कांग्रेस सबसे आगे थी। राहुल गांधी का अभी का रवैया उसी तरह का है। क्योंकि वो जो कुछ कह रहे हैं उसका जवाब सेना बहुत साफ़ तौर पर दे चुकी है। कई रिटायर्ड सेना अधिकारियों ने राहुल गांधी की बयानबाजी को गलत सोच से प्रभावित और राष्ट्रीय हितों के खिलाफ बताया है। उन्होंने कहा कि “चीन के साथ सीमा विवाद पर उनके ट्वीट उनकी अज्ञानता प्रकट करते हैं या फिर यह पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के जमाने में हुई ऐतिहासिक भूलों पर पर्दा डालने की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हैं।” इस मामले में लेफ्टिनेंट जनरल नितिन कोहली, लेफ्टिनेंट जनरल आरएन सिंह और मेजर जनरल एम श्रीवास्तव समेत 9 पूर्व आर्मी अफसरों ने एक लिखित बयान जारी किया। इसमें कहा गया है कि जब नेहरू ने तिब्बत और अक्साई चिन को प्लेट में सज़ा कर चीन को दे दिया, तभी इस समस्या के बीज पड़ गए थे। यह भी पढ़ें: वो फ़ौजी अफ़सर, जिन्होंने कांग्रेस सरकार से छिपाकर खोली थी दौलतबेग ओल्डी हवाई पट्टी

क्या है लद्दाख का ज़मीनी सच

वास्तव में पिछले छह साल से लद्दाख में LAC (लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल) तक सड़कें और पुल बनाने का काम चल रहा है। अब तक चीन के डर से कांग्रेस की सरकारें यहां पर सड़कें नहीं बनाती थीं और बनाती थी भीं तो ऐसी कि उन पर बड़े टैंक और हथियार न ले जाए जा सकें। चीन वास्तव में इसी से बौखलाया हुआ है। जहां तक चीन के घुसने की बात है यह बात सिर्फ 3 लोग कह रहे हैं- 1. राहुल गांधी, 2. कांग्रेस से जुड़े पत्रकार अजय शुक्ला और 3. आम आदमी पार्टी के लिए काम कर चुके पूर्व सैनिक अधिकारी एच पनाग। उनके अलावा लद्दाख के जमीनी हालात जानने वाले तमाम वर्तमान और पूर्व सैनिक अधिकारी यही कह रहे हैं कि भारतीय सेना अपने मोर्चों पर मजबूती के साथ खड़ी है और चीन चाहकर भी यथास्थिति में कोई बदलाव नहीं कर पाया है। यह भी पढ़ें: किसके दबाव में झारखंड सरकार ने लद्दाख प्रोजेक्ट के लिए मजदूर देने से इनकार किया?

तो फिर विवाद किस बात का?

विवाद सिर्फ़ इस बात का है कि जो विवादित इलाक़े हैं भारत चाहता है कि चीन उनसे दूर रहे। दूसरा विवाद यह है कि चीन के वहाँ होने से दौलत बेग ओल्डी तक जाने वाले भारत के नए पुल पर उसकी नज़र हो गई है। यही कारण था कि दौलत बेग ओल्डी तक भारत को वायुसेना की मदद से अपने जवान पहुँचाने पड़े। फ़िलहाल यह तय है कि राहुल गांधी और उनके अजय शुक्ला और एमएस पनाग जैसे लोग जो कुछ कह रहे हैं उसका आधार भारतीय सेना के इनपुट्स से ज़्यादा चीन का दुष्प्रचार है। राहुल गांधी के लिए यह नई बात नहीं है, इससे पहले राफ़ेल सौदे के समय भी वो चीन के उकसावे पर बार-बार राफ़ेल का दाम पूछ चुके हैं

नीचे आप राहुल गांधी का ताज़ा ट्वीट देख सकते हैं, जिसमें उन्होंने कहा है कि चीन अंदर आ गया और हमारी ज़मीन पर क़ब्ज़ा कर लिया और प्रधानमंत्री चुप हैं।

राहुल गांधी का एक और विचित्र ट्वीट, जिसकी भाषा सरकार से सवाल पूछने के बजाय साफ़ तौर पर चीन को फ़ायदा पहुँचाने वाली है।

(न्यूज़लूज़ टीम)

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