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भारतीय कंपनियों को छोड़ बांग्लादेश से कोरोना की दवा खरीदेंगे उद्धव ठाकरे

क्या आप यक़ीन कर सकते हैं कि महाराष्ट्र सरकार बांग्लादेश से दवा ख़रीदने की तैयारी कर रही है? अंग्रेज़ी अख़बार इकोनॉमिक टाइम्स में छपी ख़बर के मुताबिक़ उद्धव ठाकरे सरकार के इस फ़ैसले से भारतीय दवा कंपनियों में भारी नाराज़गी है। इस बांग्लादेशी कंपनी एस्केफ फ़ार्मास्यूटिकल्स (Eskayef Pharmaceuticals) के पास न तो दवा आयात करने का लाइसेंस है और न ही वो कोरोना वायरस की जो दवा बना रही है उसके लिए गिलीड (Gilead) नाम की अमेरिकी दवा कंपनी की तरफ कोई अनुमति ही ले रखी है। इतना ही नहीं, यही दवा भारतीय कंपनियां आधे से भी कम कीमत पर बेच रही हैं। ऐसे समय में जब पीएम नरेंद्र मोदी ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान चला रहे हैं महाराष्ट्र सरकार का ये फैसला समझ से परे है।

सीएम रिलीफ़ फंड से फ़िज़ूलख़र्ची

महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने 6 जून को कहा था कि राज्य सरकार बांग्लादेशी कंपनी एस्केफ फार्मा से Remdesivir खरीदेगी। ढाका की इस कंपनी ने 10 हजार डोज़ के बदले 12 हजार रुपये प्रति शीशी का दाम तय किया है। जबकि यही दवा भारतीय कंपनियां अमेरिकी कंपनी के साथ साझेदारी में बनाती हैं, जो कि 7000 रुपये प्रति डोज़ की कीमत में उपलब्ध है। महाराष्ट्र सरकार ने बहाना बनाया है कि भारतीय कंपनियां अभी दवा नियामक की मंजूरी के इंतजार में हैं, जबकि बांग्लादेशी कंपनी तुरंत सप्लाई के लिए तैयार है। इसके लिए फंड मुख्यमंत्री राहत कोष से दिया जा रहा है। नियमों के मुताबिक बांग्लादेश से दवा खरीदने पर भी मरीजों को देने के लिए दवा नियामक की अनुमति लेनी जरूरी होगी।

नक़ली हो सकती है बांग्लादेशी दवा

गिलीड कंपनी ने एक बयान जारी करके कहा है कि “हमने एस्केफ फॉर्मा को कोरोनावायरस दवा remdesivir बनाने का कोई लाइसेंस नहीं दिया है। कंपनी उसके प्रोडक्ट की क्वालिटी की कोई गारंटी नहीं लेती है” यानी ये दवा नॉनलाइंसेंस कैटेगरी में आएगी। जिसके आयात की मंजूरी भारत सरकार नहीं देती है। इसके लिए नियमों में फेरबदल की भी जरूरत पड़ सकती है। कड़े पेटेंट नियमों के कारण भी भारत सरकार के लिए संभव नहीं होगा कि वो बांग्लादेश से होने वाली इस खरीदारी की मंजूरी दे। ऐसे में सवाल यही है कि महाराष्ट्र सरकार इस आयात के नाम पर किसी तरह की कमीशनखोरी या भ्रष्टाचार के चक्कर में तो नहीं है?

महाराष्ट्र में कोरोना वायरस की हालत सबसे ज़्यादा ख़राब है और उद्धव ठाकरे सरकार की नाकामी खुलकर सामने आ गई है। ऐसे में बांग्लादेश से दवा ख़रीदने का ये फ़ैसला इस बात का इशारा भी कर रहा है कि महामारी की आड़ में भ्रष्टाचार भी जारी है।

(न्यूज़लूज़ टीम)

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