Home » Loose Top » वो अफ़सर जिन्हें कांग्रेस से छिपाकर खोलनी पड़ी थी दौलत बेग ओल्डी एयरस्ट्रिप
Loose Top

वो अफ़सर जिन्हें कांग्रेस से छिपाकर खोलनी पड़ी थी दौलत बेग ओल्डी एयरस्ट्रिप

चीन से जारी विवाद के बीच आप दौलत बेग ओल्डी एयरस्ट्रिप का नाम बार-बार सुन रहे होंगे। DOB या दौलत बेग ओल्डी एक जगह है जो कि लद्दाख में चीन की सीमा से बिल्कुल सटी हुई है। 1962 में हुए चीन युद्ध के समय इसे बनाया गया था। लेकिन कुछ समय बाद इसे बंद कर दिया गया। चीन का आक्रामक रवैया जारी रहा, लेकिन किसी सरकार ने इस हवाई पट्टी पर ध्यान नहीं दिया। यह वो एयरस्ट्रिप है जिस पर बड़े हवाई जहाजों के जरिए सैनिकों को पहुंचाया जा सकता है। अभी जारी तनाव में भी इसी हवाई पट्टी के कारण कुछ ही मिनटों के अंदर भारी संख्या में भारतीय सैनिक पहुंच पाए। भारतीय वायुसेना के पूर्व उप प्रमुख एयरमार्शल पीके बारबोरा ने एक बड़ा खुलासा किया है कि 2008 में जब उन्होंने इस हवाई पट्टी को खुलवा दिया तो तब की कांग्रेस सरकार उनसे इसे लेकर बेहद नाराज हो गई थी। आपको बता दें कि दौलत बेग ओल्डी दुनिया की सबसे ऊंची हवाई पट्टी है। यह भी पढ़ें: भारत नेपाल सीमा विवाद और कोरोना वाले चीन की कुटिल चाल

देश की सुरक्षा करना था अपराध?

एयर मार्शल (रिटायर्ड) पीके बारबोरा ने इस मामले पर अपनी चुप्पी तोड़ी है। आम तौर पर सेना के अधिकारी ऐसे मामलों पर सार्वजनिक बयान देने से बचते हैं। लेकिन जब लद्दाख में चीन के ख़िलाफ़ मोर्चेबंदी में दौलतबेग ओल्डी पट्टी की उपयोगिता साबित हो गई तो एयर मार्शल बारबोरा ने इसी को लेकर अपने साथ हुए सलूक के बारे में देश को बता दिया। समाचार एजेंसी ANI से बातचीत में उन्होंने कहा कि “मुझसे कुछ भी लिखित में नहीं कहा गया। लेकिन 2008 में जब मैं वहां से लौटा तो मुझसे प्रॉपर चैनल के जरिए यह पूछा गया कि आपने ऐसा क्यों किया? इस पर मैंने जवाब दे दिया कि यह वायुसेना की जिम्मेदारी है कि वहां पर सेना की मौजूदगी सुनिश्चित की जाए। यह जगह भारतीय इलाके में आती है। इसलिए मैंने हवाई पट्टी को खोलने का आदेश दिया।” एयर मार्शल बारबोरा ने ही अपने सामने यहां पर AN-32 विमानों की लैंडिंग भी कराई थी। वो उन दिनों पश्चिमी कमान के कमांडर इन चीफ थे। यह पूरी तरह खुफिया मिशन था और इसके लिए केंद्र सरकार और तब के रक्षा मंत्री एके एंटनी को भी नहीं बताया गया था। यह भी पढ़ें: ये हैं चीन के 42 चोर, आपके मोबाइल फोन में भी सेंध तो नहीं लगी

क्यों महत्वपूर्ण है दौलतबेग ओल्डी

दुनिया की सबसे ऊँची एयरस्ट्रिप होने के अलावा यह पाकिस्तान में काराकोरम दर्रे से कुछ ही दूरी पर है। यहाँ से चीन की गतिविधियों पर नज़र रखने के साथ-साथ पाकिस्तान की तरफ़ से भी किसी तरह की घुसपैठ की निगरानी हो सकती है। एयरस्ट्रिप होने के बावजूद इतने साल से भारतीय सैनिकों को कई दिन तक पैदल चलकर यहाँ तक पहुँचना होता था। ऊँचाई वाला इलाक़ा होने के कारण यहाँ ऑक्सीजन बहुत कम होती है। इसलिए चढ़ाई आसान नहीं होती। हालाँकि कभी-कभार हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल किया जाता रहा। एयर मार्शल बारबोरा ने बताया कि “भारतीय सेना ने कम से कम 5 बार इस हवाई पट्टी को खोलने का प्रयास किया। लेकिन हर बार प्रस्ताव को नामंज़ूर कर दिया जाता था।” यह भी पढ़ें: ज़ोरावर सिंह, वो महान योद्धा जिसने कैलाश मानसरोवर को भारत में मिलाया था

वो कहते हैं कि “जब मैंने एयरस्ट्रिप को शुरू करने की बात सोची, तो पिछली पाँचों फाइलें देखीं। उन फाइलों को देखने के बाद मैं समझ गया कि अगर मैंने एक और फ़ाइल बनाई और लिखित रूप में अपना अनुरोध रखा, तो मुझे भी आने नहीं बढ़ने दिया जाएगा।। पहले की सभी फाइलें विभिन्न कारणों से बंद कर दी गईं थीं। इसलिए, मैंने बिना किसी लिखित अनुमति के दौलत बेग ओल्डी एयरस्ट्रिप को फिर से खोलने का फैसला किया।” आगे वो कहते हैं कि “मैंने फैसला किया कि कोई फाइल नहीं बनेगी और कुछ भी लिखित में नहीं होगा। यदि आप अनुमति माँगते हैं, तो सभी पुरानी फाइलें खँगाली जाएँगी आखिकार जवाब एक और नहीं होगा। इसके बजाय मैंने सेना में अपने समकक्षों से बात की और वायुसेना के अधिकारियों के साथ एयरस्ट्रिप के लिए ज़रूरी तैयारियाँ शुरू कर दीं।”

लद्दाख में श्योक नदी पर बना ये मज़बूत पुल भी दौलत बेग ओल्डी तक जाता है। ये भारत का सबसे ऊँचा सड़क पुल है, जिसका उद्घाटन 2019 में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने किया।

रक्षामंत्री को बताए बिना मिशन पूरा

एयरस्ट्रिप को खोलना इतना आसान भी नहीं था। इसके लिए कुछ ख़ास बातों का ध्यान ज़रूरी था। जैसे कि AN-32 विमान को 14,000 फीट से ऊपर नहीं ले जाया जा सकता। इस तरह लैंडिंग से ज्यादा समस्या टेकऑफ की थी। उन्होंने इसके लिए गुपचुप तरीके से ट्रेनिंग का काम भी शुरू किया। जैसे कि इंजन बंद हो जाए तो क्या करना होगा? बिना इंजन बंद किए टायर कैसे बदला जाए? इत्यादि। बारबोरा कहते हैं कि “मैंने 31 मई 2008 को वायु सेना के तत्कालीन प्रमुख एयर चीफ मार्शल फली होमी मेजर की मौखिक अनुमति ले ली। मैंने एयर स्टाफ के तत्कालीन डिप्टी चीफ प्रदीप नाईक को भी जानकारी दी। रक्षा मंत्री एके एंटनी को मिशन पूरा होने के बाद ही बताया गया।” नीचे नक्शे में आप देख सकते हैं कि दौलत बेग ओल्डी की हवाई पट्टी चीन के कब्जे वाले अक्साई चिन के कितने करीब है। इसीलिए ये चीन के आंखों की किरकिरी है। यह भी पढ़ें: चीन के दबाव में राफेल सौदे से पीछे हटी थी कांग्रेस सरकार

‘चीन की सेना को चौंका दिया’

अख़बार इकोनॉमिक टाइम्स से बातचीत में एयर मार्शल पीके बारबोरा ने बताया है कि “हमने चंडीगढ़ से AN-32 में उड़ान भरी। दो पायलट को मिलाकर हम कुल 5 लोग थे। विमान सुबह 9 बजे से पहले दौलत बेग ओल्डी पर उतरा। किसी को मिशन की भनक तक नहीं लगी, सिर्फ मेरी पत्नी को किसी तरह पता चल गया था।” इसके बाद विमान ने वापसी की उड़ान भी भरी। बारबोरा कहते हैं कि यह किसी ऊँचे मैदान पर ऊँट की सवारी की तरह था। लेकिन हमने विमान को सफलतापूर्वक उतार दिया। हमारे विमान की निगरानी के लिए एक अतिरिक्त विमान भी साथ में था। हम तुरंत दिल्ली पहुँचे। हमने साबित कर दिया कि हम सक्षम थे। हमने चीनियों को चौंका दिया। क्योंकि उन्हें इसकी बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी। 2013 में भी एक चार इंजन वाला विमान C-130 हरक्यूलिस वहाँ उतारा गया। यह अब 2020 है, 1962 नहीं।”

(न्यूज़लूज़ टीम)

एक अपील: न्यूज़लूज़ के जरिए हम राष्ट्रवादी पत्रकारिता को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं। इस वेबसाइट पर होने वाला खर्च बहुत ज्यादा है और हमारी आमदनी काफी कम। हम अपने काम को जारी रख सकें इसके लिए हमें आर्थिक मदद की जरूरत है। ये हमारे लिए ऑक्सीजन का काम करेगी। डोनेट करने के लिए क्लिक करें:

या स्कैन करें


कृपया लेख कॉपी-पेस्ट न करें। कई लोग पोस्ट कॉपी करके फेसबुक और व्हाट्सएप पर शेयर कर देते हैं, जिससे वेबसाइट की आमदनी काफी कम हो गई है। राष्ट्रवाद की विचारधारा पर आधारित यह वेबसाइट बंद हो जाएगी तो क्या आपको खुशी होगी? कृपया खबरों का लिंक शेयर करें।

comments

अपनी लिखी पोस्ट या जानकारी साझा करें 

Polls

क्या नरेंद्र मोदी सरकार इसी कार्यकाल में जनसंख्या कानून लाएगी?

View Results

Loading ... Loading ...

Donate to Newsloose.com

एक अपील: न्यूज़लूज़ के जरिए हम राष्ट्रवादी पत्रकारिता को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं। इस वेबसाइट पर होने वाला खर्च बहुत ज्यादा है और हमारी आमदनी काफी कम। हम अपने काम को जारी रख सकें इसके लिए हमें आर्थिक मदद की जरूरत है। डोनेट करने के लिए क्लिक करें:

या स्कैन करें

Popular This Week

Don`t copy text!