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स्कूली किताबों में ‘वामपंथी ज़हर’ से अब अगले साल मिलेगा छुटकारा

स्कूलों में पढ़ाई जाने वाली किताबों में पढ़ाई जा रही आपत्तिजनक बातों को हटने के लिए अभी एक साल और इंतज़ार करना पड़ेगा। अब जाकर नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग यानी NCERT ने नेशनल क्यूरिकुलम फ्रेमवर्क की समीक्षा के बाद इसका प्रस्ताव मानव संसाधन मंत्रालय को भेजा है। नई किताबें अगले साल तक ही छपकर आ पाएंगी। उम्मीद की जाती थी कि नरेंद्र मोदी सरकार आने के बाद स्कूली किताबों में पढ़ाई जा रही देश विरोधी और हिंदू धर्म के खिलाफ बातों को तुरंत हटाया जाएगा। लेकिन इस मोर्चे पर सरकार फिसड्डी साबित हुई। इसके पीछे बड़ा कारण प्रकाश जावड़ेकर और अब रमेश पोखरियाल निशंक जैसे ढीले-ढाले मंत्रियों को माना जाता है। यहां यह जानना जरूरी है कि 2004 में जब कांग्रेस सत्ता में आई थी तो अगले ही साल उसने पूरा कोर्स बदलकर लागू कर दिया था, लेकिन बीजेपी सरकार को इतना वक्त लग रहा है।

ढीली है सरकार, देरी से काम शुरू

कांग्रेस की सरकारों के समय जानबूझकर इतिहास की किताबों में ऐसी बातें डाली गईं जिनका वास्तविकता से कोई लेना-देना नहीं है। ऐसा नई पीढ़ी के मन में अपने देश, संस्कृति और धर्म के लिए हीनभावना डालने के उद्देश्य से किया गया। इन किताबों में मुग़ल राजाओं के महिमामंडन पर ज़्यादा फ़ोकस है। जबकि हिंदू राजाओं को एक-एक पैरा में सिमटा दिया गया। नए प्रस्ताव के अनुसार किताबों से अनावश्यक हिस्सों को हटाया जाएगा। साथ ही नई शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप सामग्री का इसमें समावेश होगा। NCERT ने नए पाठ्यक्रम के लिए 22 वर्किंग ग्रुप यानी कार्य समूह बनाए हैं। इनमें उन विषयों के विशेषज्ञों को रखा गया है। लोकसभा चुनावों के नतीजों के बाद फौरन यह काम शुरू हो गया होता तो नई किताबें अब तक तैयार हो सकती थीं, लेकिन मानव संसाधन मंत्रालय की ढिलाई के चलते यह प्रक्रिया ही नवंबर 2019 में शुरू हो पाई। सूत्रों के अनुसार अभी भी मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक का ज्यादा ध्यान इस पर नहीं है, जिसके चलते कई समस्याएं बनी हुई हैं। यह भी पढ़ें: ममता के बंगाल में हिंदूफोबिया पढ़ रहे हैं स्कूली बच्चे

इतिहास ही नहीं, हर विषय में ज़हर

आमतौर पर समझा जाता है कि इतिहास के कोर्स में ही गड़बड़ी होगी, लेकिन ऐसा नहीं है। भाषा, समाजशास्त्र, राजनीति शास्त्र और यहाँ तक कि विज्ञान और गणित में भी वामपंथी ज़हर घोला गया है। इनमें ऐसी बातें हैं जिन्हें पढ़कर बच्चों को यह लगे कि हिंदू एक दक़ियानूसी धर्म है और भारत में सभ्यता का आगमन मुग़लों के आने के बाद हुआ। उससे पहले हिंदू कबीलों की शक्ल में रहते थे। इसी तरह आर्यों के आक्रमण का नेहरू का सिद्धांत आज भी किताबों का हिस्सा है, जबकि डीएनए स्टडी में ये थ्योरी झूठ साबित हो चुकी है। इस विषय पर ‘ब्रेनवॉश्ड रिपब्लिक’ नाम से किताब लिखने वाले नीरज अत्री के मुताबिक़ “NCERT का अभी का कोर्स यह बताता है कि भारत का जन्म 15 अगस्त 1947 को ही हुआ और उससे पहले ऊंची जातियों के लोग दलितों पर बहुत अत्याचार करते थे। दूसरी तरफ अंग्रेजों और मुगलों के अत्याचारों को गायब कर दिया गया है।” यह भी पढ़ें: 2017 में शुरू हुआ नई शिक्षा नीति बनाने का काम

11वीं क्लास की सोशियोलॉजी की किताब में लिखा है कि 2002 के दंगों के बाद से देश में मुसलमानों के अलग मोहल्ले और इलाक़े बसने का चलन शुरू हुआ।

12वीं की NCERT की किताब ‘Politics in India since Independence’ के मुताबिक कश्मीर में सभी धर्मों के लोग रहते हैं। इसमें घाटी से हिंदुओं के पलायन और इस्लामी आतंकवाद पर एक भी शब्द नहीं लिखा गया है।

छोटी से लेकर बड़ी क्लास की किताबों तक में 2002 के गुजरात दंगों का कई जगह ज़िक्र मिल जाएगा। लेकिन 1984 के सिख नरसंहार, जिसमें ज़्यादा लोग मारे गए थे, के बारे में किसी भी किताब में नहीं बताया गया है।

एनसीईआरटी की किताबों में डाले गए ज़हर पर नीरज अत्री का वीडियो आप नीचे देख सकते हैं।

(न्यूज़लूज़ टीम)

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