Home » Loose Top » जानिए देश पर क्यों हुआ टिड्डियों का हमला, कोरोना से क्या है कनेक्शन?
Loose Top

जानिए देश पर क्यों हुआ टिड्डियों का हमला, कोरोना से क्या है कनेक्शन?

जयपुर में यह तस्वीर 26 मई को ली गई है।

देश के कई क्षेत्रों में इन दिनों टिड्डियों (Locust) का आतंक छाया हुआ है। ये एक तरह का हमला है जिसमें लाखों-करोड़ों टिड्डियाँ किसी इलाक़े में आंधी की तरह आती हैं और देखते ही देखते वहाँ के तमाम पेड़-पौधे और खेती को चट कर जाती हैं। बताया जा रहा है कि 27 साल के बाद इतना बड़ा टिड्डी हमला हुआ है। टिड्डियों की ये आंधी पाकिस्तान की सीमा के तरफ़ से आई है। फिलहाल राजस्थान, गुजरात, पंजाब, मध्यप्रदेश, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश खासतौर पर इसके निशाने पर आए हैं। आमतौर पर टिड्डियाँ शहरी और आबादी वाले इलाक़ों से दूर रहती हैं। लेकिन पहली बार हुआ है कि इनके झुंड ने जयपुर जैसे शहर को भी चपेट में ले लिया। प्रश्न उठता है कि ये टिड्डे आख़िर क्या होते हैं? कैसे ये पूरे के पूरे इलाक़ों में हरियाली को सफाचट कर देते हैं? इन सवालों के जवाब नीचे हम आपको देते हैं:

विश्व भर में है टिड्डियों का आतंक

यह एक तरह की अंतरराष्ट्रीय समस्या है। आम दिनों में भी खेतों में टिड्डियाँ होती हैं और फसल को खाती रहती हैं। लेकिन उनकी संख्या इतनी नहीं होती कि कोई चिंता की जाए। लेकिन कुछ प्राकृतिक कारणों से कभी-कभी इनकी संख्या अचानक कई गुना बढ़ जाती है। अभी इस समय अरब सागर के आसपास का पूरा इलाक़ा टिड्डियों के आतंक से जूझ रहा है। इसमें अफ्रीका, अरब और भारतीय उपमहाद्वीप के देश हैं। जलवायु परिवर्तन के चलते बीते 2-3 साल में कुछ असामान्य चक्रवाती तूफान आए हैं। इनके चलते खासतौर पर अरब देशों में अक्सर बरसात हो रही है। जिससे रेतीली जमीन में ज्यादा नमी पैदा हो गई। इस कारण से टिड्डियों को पैदा होने के लिए अनुकूल माहौल मिल गया और देखते ही देखते उनकी संख्या बढ़ने लगी। लेकिन इस साल यह संख्या कुछ ज़्यादा ही असामान्य रूप से बढ़ गई।

कोरोना संकट के कारण मिला मौक़ा

टिड्डी हमले के पीछे एक बड़ा कारण कोरोना वायरस को माना जा रहा है। खाड़ी के देशों में रेतीले इलाक़ों में टिड्डियाँ अंडे देती हैं। हर साल ईरान, इराक़ जैसे देशों में इनके अंडों पर कीटनाशकों का छिड़काव कराया जाता है ताकि ये पैदा न होने पाएं। लेकिन इस साल कोरोना वायरस फैलने के कारण ईरान में इस पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। जैसे ही अप्रैल के बाद जैसे ही गर्मी बढ़नी शुरू हुई वैसे ही अंडों से टिड्डियाँ निकलनी शुरू हो गईं और पूरे इलाक़े को एक तरह से घेर लिया। ईरान ने जब तक दवाओं का छिड़काव कराया तब तक काफ़ी देरी हो चुकी थी।

गाँवों में किसान थालियाँ और घंटे बजाकर टिड्डियों को डराकर भगाते हैं।

भारत का मौसम भी बना बड़ा कारण

भारत में इस साल मार्च, अप्रैल और मई महीनों में लगातार कुछ-कुछ दिनों पर बारिश होती रही। ऐसा पश्चिमी विक्षोभों की सक्रियता के कारण हुआ। इस कारण मौसम में नमी बनी रही। यह टिड्डी जैसे कीड़ों के पनपने के लिए अत्यंत अनुकूल स्थिति होती है। ऐसे ही मौसम के कारण 1926 से 1931 के बीच भी भारत में टिड्डियों की समस्या विकराल हो गई थी। उस समय ये असम तक पहुँच गए थे।

एक टिड्डी अपने जीवनकाल में इतना खा जाती है जितना एक आदमी सालभर में खाता है।

सबकुछ उजाड़कर जाती हैं टिड्डियाँ

टिड्डी दल हर तरह के पेड़-पौधे, फसलें चट कर जाते हैं। बड़े पेड़ों की भी कोमल पत्तियों और यहाँ तक कि टहनियों को वो खा जाते हैं। इनके असर से कई इलाक़े बंजर जैसे दिखाई देने लगते हैं, क्योंकि कोई हरियाली बचती ही नहीं। इनके कारण कई बार अकाल का ख़तरा भी पैदा हो जाता है। एक सामान्य टिड्डी दल में 12 से 15 करोड़ तक टिड्डे हो सकते हैं। हवा अगर अनुकूल हो तो वो एक दिन में 150 किलोमीटर तक की यात्रा कर सकते हैं। एक वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला एक सामान्य टिड्डी दल एक दिन में 35 हजार लोगों के बराबर का खाना खा सकता है। हालाँकि ओक, नीम, धतूरा, शीशम और अंजीर के पत्तों को ये नहीं खा पाते। एक टिड्डे की उम्र 3 से 5 महीने तक होती है।

सूरज को भी ढक लेते हैं टिड्डी दल

एक विशाल टिड्डी दल 10 से लेकर 300 वर्ग किलोमीटर तक में फैला हो सकता है। कई बार इनकी संख्या इतनी हो जाती है कि बादलों की तरह सूरज की रोशनी को भी रोक लेते हैं। टिड्डियों का हमला जब भयानक रूप में होता है तो ये घरों, बिस्तरों और रसोईघरों तक में घुस जाती हैं। कई लोगों को इनसे एलर्जी भी होती है। कई बार ये इतनी बड़ी संख्या में रेल पटरियों पर बैठ जाती हैं कि इनके कारण ट्रेनों के पटरी से फिसलने का ख़तरा भी हो जाता है। यही कारण है कि टिड्डी प्रभावित इलाक़ों में रेलगाड़ियों का आवागमन रोक दिया जाता है। ये जिन तालाब और कुओं में गिरते हैं उनका पानी भी पीने लायक़ नहीं रहता। एक बार जो टिड्डियों का हमला होता है उसे पूरी तरह ख़त्म होने में 4 से 5 साल भी लग सकते हैं।

सोशल मीडिया पर टिड्डियों के हमले के 5 वायरल वीडियो:


(न्यूज़लूज़ टीम)

एक अपील: न्यूज़लूज़ के जरिए हम राष्ट्रवादी पत्रकारिता को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं। इस वेबसाइट पर होने वाला खर्च बहुत ज्यादा है और हमारी आमदनी काफी कम। हम अपने काम को जारी रख सकें इसके लिए हमें आर्थिक मदद की जरूरत है। ये हमारे लिए ऑक्सीजन का काम करेगी। डोनेट करने के लिए क्लिक करें:

कृपया लेख कॉपी-पेस्ट न करें। कई लोग पोस्ट कॉपी करके फेसबुक और व्हाट्सएप पर शेयर कर देते हैं, जिससे वेबसाइट की आमदनी काफी कम हो गई है। राष्ट्रवाद की विचारधारा पर आधारित यह वेबसाइट बंद हो जाएगी तो क्या आपको खुशी होगी? कृपया खबरों का लिंक शेयर करें।

comments

Polls

क्या नरेंद्र मोदी सरकार इसी कार्यकाल में जनसंख्या कानून लाएगी?

View Results

Loading ... Loading ...
Don`t copy text!