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किसके इशारे पर हो रहा है देसी वेंटिलेटर ‘धमन’ के ख़िलाफ़ दुष्प्रचार?

कोरोनावायरस संकट के बीच सस्ता देसी वेंटिलेटर बनाने वाली गुजरात की एक कंपनी इन दिनों निशाने पर है। ज्योति सीएनसी (Jyoti CNC) नाम की इस कंपनी पर आरोप लगाया जा रहा है कि उसने ‘धमन’ नाम से जो वेंटिलेटर बनाया वो नकली है। दरअसल इस कंपनी ने जो वेंटिलेटर बनाया है वो मात्र 1 लाख रुपये का है। जबकि चीन और दूसरे देशों से आने वाले वेंटिलेटर 6 से 10 लाख रुपये तक में होते हैं। भारत में राजकोट की यह कंपनी इकलौती है जो औद्योगिक पैमाने पर वेंटिलेटर बना रही है। उसने अपने पहले 100 वेंटिलेटर गुजरात के सरकारी अस्पतालों को मुफ्त में दिए। टाइम्स ग्रुप के अखबार अहमदाबाद मिरर और एनडीटीवी समेत कुछ मीडिया संस्थान इसे घोटाला बता रहे हैं और उसी आधार पर कांग्रेस गुजरात सरकार को घेर रही है। जबकि सच यह है कि कंपनी ने ये वेंटिलेटर गुजरात सरकार को मुफ्त में दिए हैं। यह भी पढ़ें: ‘आत्मनिर्भर भारत’ बनाने में आएंगी ये मुसीबतें, क्या आप तैयार हैं?

क्या है देसी वेंटिलेटर का मामला?

कोरोनावायरस आने से पहले देश में क़रीब 50 हज़ार वेंटिलेटर थे। अगर मरीज़ों की संख्या बढ़ती रही तो ज़रूरत 10 लाख वेंटिलेटर तक की हो सकती है। इतने वेंटिलेटर विदेश से ख़रीदना बहुत महँगा सौदा है। कुछ देसी कंपनियों ने यह ज़िम्मेदारी हाथ में ली। राजकोट की कंपनी ज्योति CNC ने सबसे पहले इसका प्रोटोटाइप तैयार कर लिया। इसके अलावा मारुति, हुंडई और महिंद्रा जैसी कार कंपनियां भी वेंटिलेटर बना रही हैं। लेकिन गुजरात की कंपनी ने सब पर बढ़त ले ली। इसे काफी प्रचार भी मिला। कंपनी ने शुरू में ही कहा था कि उसका प्रोडक्ट अभी शुरुआती जरूरतों के लिए है। इसलिए उसका नाम धमन-1 रखा गया था। यह एक बेसिक मॉडल है, जिसे कम गंभीर मरीजों के लिए प्रयोग किया जा सकता है। इसके कुछ दिन बाद ही धमन-2 भी लॉन्च हुआ। कंपनी बहुत जल्द धमन-3 उतारने वाली है। कंपनी ने यह भी कहा है कि वो सभी मौजूदा मशीनों को अपग्रेड कर देगी। क्योंकि पहले दोनों मॉडल में कुछ कमियां हैं। पहले दोनों मॉडल जल्दीबाजी में लाए गए ताकि थोड़ी-बहुत सुविधा दी जा सके।

देसी वेंटिलेटर के ख़िलाफ़ दुष्प्रचार

‘अहमदाबाद मिरर’ ने दावा किया कि वेंटिलेटर नक़ली है। वहाँ से एनडीटीवी ने इसे उठा लिया और झूठ प्रचार शुरू हो गया। इन सभी में यह छिपाया कि जिसमें ख़राबी की बात कही जा रही है वो बेस मॉडल है। जिसे अपग्रेड होना बाक़ी है। इसके लिए जापान से कुछ पार्ट्स आने हैं। इसे जल्दी में उतारा गया क्योंकि मरीज़ों की संख्या बढ़ रही थी। ज्योति सीएनसी कंपनी मशीनरी टूल्स बनाने वाली कंपनी है और उसने पहले कभी वेंटिलेटर नहीं बनाया था। कंपनी के मालिक पराक्रम सिंह जडेजा ने बढ़ती माँग को देखते हुए इसे बनाने की पहल की थी। उन्होंने इसके लिए एक विदेशी वेंटिलेटर ख़रीदा और उसके कलपुर्जों का अध्ययन इंजीनियरों से कराया। कई मरीज़ों पर इसका टेस्ट किया गया। बीमारी के एक स्तर तक के लिए इसे उपयोगी पाया गया। जिसके बाद सरकारी एजेंसियों ने इस पर मुहर लगा दी। प्रोपोगेंडा वेबसाइट ‘द वायर’ ने तो यहाँ तक कह डाला कि ये वही कंपनी ने जिसने पीएम नरेंद्र मोदी को सूट गिफ़्ट किया था। जबकि सूट गिफ़्ट करने वाले सूरत के हीरा कारोबारी रमेश विरानी थे। दोनों में आपस में कोई संबंध ही नहीं है।

विदेशों से भी मिल रहे हैं ऑर्डर

कंपनी ने पहली खेप में 5000 मशीन बनाकर गुजरात सरकार को दिया। तभी अमेरिका से एक लाख मशीनों के ऑर्डर आ गए। स्पेन और कुछ अन्य यूरोपीय देशों ने भी इस सस्ते वेंटिलेटर में दिलचस्पी दिखाई। अहमदाबाद के अलावा इन मशीनों का पॉन्डिचेरी और बांग्लादेश में भी इस्तेमाल हो रहा है। वहाँ पर इसमें कोई समस्या नहीं है। अहमदाबाद में कोरोना वायरस (Covid-19) का स्ट्रेन अलग है, लिहाजा गुजरात में मौतों की संख्या ज्यादा है। यहां जिन अस्पतालों में विदेशी वेंटिलेटर लगे हैं उनमें भी मरने वालों की दर उतनी ही है जितनी ‘धमन’ के साथ। गुजरात की प्रधान स्वास्थ्य सचिव जयंति रवि ने इस बात की पुष्टि की है।

चीन की मदद के लिए झूठा प्रचार

देसी वेंटिलेटर ‘धमन’ के कारण चीन को भारी नुक़सान हो रहा है। क्योंकि उसने भारी मात्रा में वेंटिलेटर बना रखे हैं। चीन को उम्मीद थी कि उसे भारत से कम से कम 40 से 50 हज़ार वेंटिलेटरों का ऑर्डर मिलेगा। जबकि ऐसा नहीं हुआ। लिहाज़ा भारत में चीन समर्थक लॉबी ने देसी वेंटिलेटर के ख़िलाफ़ दुष्प्रचार शुरू कर दिया। यह स्थिति तब चीन के अपने वेंटिलेटर घटिया साबित हो रहे हैं। न्यूज़वीक की रिपोर्ट के अनुसार ब्रिटेन ने चीन से 250 वेंटिलेटर खरीदे थे, जिनमें से ज्यादातर खराब हो गए और उनके कारण मरीजों की जान चली गई। इसी तरह अमेरिका और दूसरे यूरोपीय देशों में बिके चीन के वेंटिलेटरों में भी खराबी पाई गई है। जबकि चीन इन्हें भारतीय रुपये के हिसाब से 10 से 12 लाख रुपये में बेच रहा है। यही कारण था कि दुनिया के देशों ने भारतीय प्रोडक्ट ‘धमन’ में दिलचस्पी दिखानी शुरू की है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस तरह से ‘आत्मनिर्भर भारत’ योजना शुरू की है और देसी उत्पादों को बढ़ावा देने की बात कही है यह तय है कि आने वाले समय में चीन इसमें तरह-तरह से अड़ंगेबाजी करेगा। चिंता की बात यह है कि भारतीय मीडिया का एक बड़ा वर्ग चीन के इशारे पर अपने ही देश की कंपनियों और उत्पादों के ख़िलाफ़ झूठ फैलाने से बाज नहीं आ रहा।

(आशीष कुमार की रिपोर्ट)

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