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आख़िर योगी आदित्यनाथ को बार-बार क्यों टार्गेट कर रही है कांग्रेस!

अगर देखा जाए तो बड़ी संख्या में लोग उन सभी राज्यों से वापस लौट रहे हैं जहां वे रोज़गार के सिलसिले में अपने गृह राज्यों से गए थे। उदाहरण के लिए, दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक, पंजाब, हरियाणा से श्रमिक वर्ग उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल और राजस्थान की तरफ लौट रहा है। फिर कांग्रेस और गांधी परिवार केवल योगी आदित्यनाथ को चिन्हित करके उनके पीछे ही क्यों पड़ा हुआ है? एक कारण यह है कि छत्तीसगढ़, झारखंड और राजस्थान में उस राजशाही परिवार की सरकार है। मध्यप्रदेश में लड़ाई बराबर की है और अभी कुछ समय पहले ही चुनाव हुआ है। बिहार में कांग्रेस मैदान में दूर-दूर तक नहीं है। उत्तर प्रदेश में भी कांग्रेस बिखरी हुई है। तो आखिरकार योगी जी ने ऐसा क्या कर दिया कि उनको अटैक किया जा रहा है?

मज़दूरों के पलायन को भांप चुके थे योगी

एक कारण, जो जानकारी में नहीं आया है, वह यह है कि योगी जी ने कोरोनावायरस तथा मजदूरों के पलायन की आशंका को देखते हुए उनके कल्याण और रोजगार के लिए डेढ़ महीने पहले ही कार्य शुरू कर दिया था। अप्रैल की शुरुआत में ही योगी समझ गए थे की मजदूरों को शायद वापस आना पड़े। अतः उन्होंने 15 लाख नौकरियों के सृजन का लक्ष्य रखा। कुछ ही समय बाद मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि वे अन्य राज्यों के साथ सहयोग करके उत्तर प्रदेश के उन श्रमिक वर्ग को वापस लाएंगे जो लौटना चाहते हैं। अब तक कई लाख व्यक्ति वापस लौट चुके हैं। मई के पहले सप्ताह में पंजाब, कर्नाटक, हरियाणा, और गुजरात के मुख्यमंत्रियों ने योगी आदित्यनाथ से फोन करके निवेदन किया था कि वह उत्तर प्रदेश के श्रमिक वर्ग को उनके राज्यों से वापस ना आने दे। उन्होंने आश्वासन दिया कि वह इन श्रमिकों की अच्छे से देखभाल करेंगे क्योंकि उन्हें चिंता थी कि इन श्रमिकों के बिना लॉकडाउन खुलने पर उनके राज्यों का आर्थिक पुनरुद्धार नहीं हो पायेगा।

संकट को अवसर में बदलने की तरफ़ यूपी

उत्तर प्रदेश सरकार चीन से शिफ्ट होने वाली कंपनियों के लिए भी आकर्षक पैकेज की घोषणा कर चुकी है। जूते बनाने वाली एक जर्मन कंपनी ने आगरा शिफ्ट होने की घोषणा कर भी दी है। अब तक यूरोप के एक देश लक्ज़ेमबर्ग के दोगुने क्षेत्रफल वाली भूमि को उत्तर प्रदेश में उद्योगों के लिए चिन्हित किया जा चुका है। श्रमिक कानून तथा अन्य कानून, जो उद्यमियों की प्रगति पर बाधा डालते थे, उन्हें कुछ समय के लिए ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। इसका परिणाम यह होगा की उत्तर प्रदेश के अगले चुनाव में कांग्रेस का अस्तित्व पूर्ण रूप से समाप्त हो जाएगा। सपा और बसपा भी हाशिए पर आ चुके हैं। अतः गठबंधन से भी अपेक्षित परिणाम नहीं मिल पाएगा। यह सभी जानते हैं कि उत्तर प्रदेश में पैठ बनाए बिना दिल्ली की राजनीति में आप का महत्व कम हो जाता है। इसीलिए राजशाही परिवार को लगा कि श्रमिक वर्ग की समस्या पर राजनीति करके वह उत्तर प्रदेश में शायद कुछ जड़े जमा सकें।

निजी हमलों के पीछे शहज़ादी की खीझ

आखिरकार निर्धनों और श्रमिक वर्ग को भड़का कर, उनकी समस्या की आग पर खिचड़ी पका कर तुच्छ राजनीति को चमकाने का प्रयास किया जाता है। और कई बार या खिचड़ी पक भी जाती है। लेकिन इस परिवार ने योगी की राजनीतिक सूझबूझ और आक्रामकता को कम करके आंकने की भूल कर दी। आखिरकार योगी कान्वेंट के पढ़े-लिखे नहीं है; गोसेवा, गौशाला तथा प्रभु सेवा में जीवन व्यतीत किया है। जब राजनीतिक रूप से तगड़ा पलटवार हुआ तो तिलमिलाकर वह प्रदेश के अधिकारियों तथा उनके परिवार पर निजी हमले करने लगे। शहजादी के निजी सचिव जब लिखते हैं कि “महोदय आप एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी हैं। बहुत अनुभवी हैं और कोरोना महामारी के इस भयानक संकट से भिज्ञ भी हैं”, तभी समझ में आ गया कि कांग्रेसियों ने हाथ फैला दिए हैं। क्योंकि यह लिखने की चीज नहीं है। सभी को पता है कि प्रशासन में कौन कितना वरिष्ठ और अनुभवी है। किसी भी तर्क-वितर्क में ऐसी भाषा का प्रयोग करना, परिवार पर आक्षेप लगाना ही यह बता देता है कि आपकी फेंकी हुई बाजी उल्टी पड़ गई है। चूंकि मैं कांग्रेसियों का शुभचिंतक हूं, अतः प्रभु श्रीराम से प्रार्थना करता हूं कि “दादी की नाक” वाली शहज़ादी ऐसी रणनीति के मार्ग पे चलती रहे।

(अमित सिंघल के फ़ेसबुक पेज से साभार)

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