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10 बजे… 12 बजे… फिर 5 बजे… दिन बीत गया नहीं आई प्रियंका वाड्रा की बस

यूपी में मज़दूरों को घरों तक पहुँचाने के लिए हज़ार बसों की बात करके कांग्रेस पार्टी और प्रियंका गांधी वाड्रा बुरी तरह फँस गए हैं। मंगलवार को दिन भर चले तमाशे के बाद भी कांग्रेस पार्टी बसों का इंतज़ाम नहीं कर पाई। हमें आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार नोएडा या ग़ाज़ियाबाद में तय स्थान पर कांग्रेस की तरफ़ से भेजा एक भी बस या कोई अन्य वाहन नहीं आया। नियमित तरीके से यूपी सरकार ने अपनी बसों से ही मजदूरों को भेजने का काम जारी रखा। एक दिन पहले प्रियंका गांधी ने ट्विटर पर लिखा था कि कांग्रेस पार्टी की एक हज़ार बसें नोएडा और ग़ाज़ियाबाद के बॉर्डर पर खड़ी हैं, लेकिन यूपी सरकार इन्हें अंदर नहीं आने दे रही है। प्रियंका ने अपने दावे के सबूत के तौर पर कुछ वीडियो और फ़ोटो भी ट्वीट किए। इस पर उत्तर प्रदेश सरकार ने उन्हें बसों के नंबर और उनके साथ ड्राइवर की लिस्ट माँग ली। इसके बाद कांग्रेस पार्टी के अंदर तहलका मच गया। कल देर रात बड़ी मुश्किल से क़रीब एक हज़ार गाड़ियों की लिस्ट उत्तर प्रदेश सरकार को भेजी गई। जब जाँच हुई तो पता चला कि उनमें से कई बस नहीं, बल्कि स्कूटी, बाइक, ऑटोरिक्शा, कार और दूसरे वाहनों के नंबर हैं। लिस्ट में बताई गई कोई भी गाड़ी यूपी या यूपी बॉर्डर के आसपास कहीं भी मौजूद नहीं थी। फिलहाल सरकार को झूठी जानकारी देने के मामले में प्रियंका वाड्रा के निजी सचिव संदीप सिंह के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है। यह भी पढ़ें: अब कांग्रेस का बस घोटाला, बस के नाम पर भेजे स्कूटी और ऑटोरिक्शा के नंबर

थोड़ा और समय चाहती है कांग्रेस पार्टी

यूपी सरकार के प्रस्ताव स्वीकार के बाद कांग्रेस पार्टी ने बसों की लिस्ट देने में लगभग 12 घंटे लगा दिए। मंगलवार देर रात जब लिस्ट सौंपी गई तब यूपी सरकार ने एक औपचारिक पत्र भेजकर उन्हें दोपहर 12 बजे तक ग़ाज़ियाबाद और नोएडा बॉर्डर पर 500-500 बसें भेजने को कहा। इस पर प्रियंका वाड्रा के निजी सचिव ने उत्तर प्रदेश सरकार से शाम 5 बजे तक का समय माँगा। इस पत्र को आप नीचे पढ़ सकते हैं। इसमें निजी सचिव संदीप सिंह की भाषा बेहद नरम हो गई है। उन्होंने अब अपर मुख्य सचिव (गृह) अवनीश अवस्थी को साधुवाद और ऐतिहासिक कदम जैसे शब्द इस्तेमाल किए। जबकि इससे पहले वो प्रदेश सरकार पर आग उगल रहे थे। सबसे ख़ास बात कि इस पत्र में प्रियंका वाड्रा की तरफ़ से इस बात पर कोई सफ़ाई नहीं दी गई कि एक हज़ार बसों की लिस्ट में कई स्कूटी, कार, ऑटोरिक्शा और बिना फ़िटनेस सर्टिफिकेट वाली गाड़ियाँ क्यों हैं? यह भी पढ़ें: मज़दूरों के लिए 1000 बसों का ब्लफ मार रही थीं प्रियंका, योगी ने बुरा फँसा दिया

सवालों पर कांग्रेस ने जवाब नहीं दिया

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यालय की तरफ से सोमवार को ट्विटर के माध्यम से कांग्रेस पार्टी और प्रियंका गाँधी से कुछ सवाल किए गए थे। उन्होंने प्रियंका वाड्रा से पूछा कि जब उनके पास 1000 बसें उपलब्ध थी, तब आखिर क्यों राजस्थान और पंजाब से श्रमिकों को ट्रकों में भरकर क्यों भेजा गया? कांग्रेस या प्रियंका वाड्रा की तरफ़ से अभी तक इसका कोई जवाब नहीं दिया गया है। यूपी सरकार का कहना है कि प्रियंका ने संकट के इस समय में सिर्फ़ प्रचार पाने के लिए बसों की बात कही थी। इसी कारण जब वास्तव में मदद की ज़रूरत पड़ी तो वो ऐसा नहीं कर पाईं। इस सबके बीच मज़दूरों की परेशानी जारी है। जहां तक उत्तर प्रदेश की बात है प्रशासन लगातार उन्हें अपनी बसों में बिठाकर घरों की तरफ़ रवाना कर रहा है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि लोगों को सीधे घर के बजाय क्वारंटाइन सेंटर ले जाना होता है। वहाँ से उन्हें 14 दिन बाद ही घरों को जाने दिया जाएगा। इस चक्कर में क्वारंटाइन सेंटरों पर अक्सर भ्रम की स्थिति भी पैदा हो रही है।

नीचे आप प्रियंका के निजी सचिव संदीप सिंह का वो पत्र देख सकते हैं जिसमें उन्होंने बस भेजने के लिए और समय देने की बात लिखी है:

फ़िलहाल प्रियंका वाड्रा के इस झूठ को लेकर सोशल मीडिया पर उनका खूब मज़ाक़ भी उड़ रहा है।


(न्यूज़लूज़ टीम)

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