Home » Dharm » बापू से मोरारी बापू तक… हिंदू धर्म के इस्लामीकरण की कोशिश जारी है!
Dharm Loose Top

बापू से मोरारी बापू तक… हिंदू धर्म के इस्लामीकरण की कोशिश जारी है!

सोशल मीडिया पर इन दिनों मोरारी बापू जैसे प्रसिद्ध कथावाचकों के ढेरों वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिनमें वो ‘अली मौला’ और ‘अल्लाह अल्लाह’ का जाप करते देखे जा सकते हैं। ऐसा नहीं है कि ये सब कुछ अचानक शुरू हुआ। भागवत प्रवचनों में इसकी शुरुआत शेरो-शायरी से हुई जो कि अब भागवत से पहले नमाज़ तक पहुँच गई है। लोगों ने शुरू में इस पर ध्यान नहीं दिया, लेकिन अब ये ट्रेंड बन चुका है। हिंदू धर्म की प्राचीन कथाओं में भी फेरबदल किए जा रहे हैं ताकि हिंदुओं को दकियानूसी, अवैज्ञानिक और तंग सोच वाला साबित किया जा सके। यह सब करने वाले वही लोग हैं जिन्होंने हिंदू धर्म के नाम पर ही अपना नाम बनाया है। हिंदुओं के इस्लामीकरण के ये प्रयास आजादी के पहले से जारी है। इसकी शुरुआत का श्रेय बापू के नाम से मशहूर महात्मा गांधी को दिया जाता है। बाद के सालों में यह काम देवदत्त पटनायक जैसे वामपंथी ठगों ने भी किया। यह भी पढ़ें: भागवत कथा के नाम पर अली मौला क्यों जप रहे हैं कथावाचक?

हिंदू धर्म में मज़हबी तड़के की कोशिश

यूँ तो यह काम भारत में सूफ़ी इस्लाम आने के बाद से ही शुरू हो गया था। सूफ़ी ज़्यादातर मुग़ल लुटेरे और बलात्कारी ही थे, जिनकी मौत के बाद उनकी दरगाहें बन गईं और वहाँ पर मन्नतें माँगने का सिलसिला शुरू हो गया। धार्मिक रूप से उदार होने के कारण हिंदुओं ने भी इन दरगाहों पर जाना शुरू कर दिया। लिहाज़ा इन सूफ़ी दरगाहों पर हिंदुओं के जैसे तौर-तरीके अपनाए जाने लगे। मन्नतें माँगने के चक्कर में लोग भूल ही गए कि जिसकी कब्र पर वो सिर झुका रहे हैं वो आदमी था कौन? हिंदू धर्म में इस्लामी मिलावट का असली खेल शुरू हुआ महात्मा गांधी के साथ, जिन्होंने न सिर्फ़ गीता की ग़लत व्याख्या की, बल्कि पुराने भजनों में ‘अल्लाह’ को घुसाना शुरू किया। गांधी के इस अभियान का सबसे बड़ा शिकार बना “रघुपति राघव राजाराम” भजन। यह भी पढ़ें: तालिबान से भी ख़तरनाक है सूफ़ी इस्लाम, जानें पूरा सच

हिंदू भजनों और श्लोकों से छेड़छाड़

“रघुपति राघव राजाराम, पतित पावन सीताराम। ईश्वर अल्लाह तेरो नाम, सब को सन्मति दे भगवान” को गांधी जी का प्रिय भजन बताया जाता है। जबकि असली भजन है “रघुपति राघव राजाराम, पतित पावन सीताराम। सुंदर विग्रह मेघाश्याम, गंगा तुलसी शालीग्राम”। गांधी जी ने अपने सियासी एजेंडे के लिए उस दौर के इस लोकप्रिय भजन में अल्लाह को घुसा दिया। इस भजन के असली जनक थे पंडित लक्ष्मणाचार्य। यह उनकी पुस्तक ‘श्री नमः रामणायनम’ से लिया गया है। किसी दूसरे की रचना में इस तरह की फेरबदल करना अनैतिक माना जाता है। गांधी जी ने ठीक यही काम श्रीमद्भागवत गीता की कई सूक्तियों के साथ किया। वो बोला करते थे कि ‘अहिंसा परमो धर्म:’ जबकि पूरी पक्ति है ‘अहिंसा परमो धर्मः, धर्म हिंसा तदैव च।’ गांधी अहिंसा के समर्थक थे लेकिन इसके लिए गीता की एक पंक्ति को तोड़ने-मरोड़ने का अधिकार उन्हें कैसे मिल गया? यह भी पढ़ें: गजवा ए हिंद के बारे में जानना आपके लिए ज़रूरी है

भागवत कथाओं में अल्लाह की एंट्री

महात्मा गांधी ने भजनों में अल्लाह को इसलिए घुसाया था ताकि वो हिंदू और मुसलमानों के बीच एकता ला सकें। इसके बावजूद देश धर्म के नाम पर टूट गया। अब जो कथावाचक ‘अल्ला-अल्ला’ और ‘अली मौला’ कर रहे हैं उनका मक़सद भी गांधी जी जैसा ही है। हालाँकि एकता से ज़्यादा उनकी नीयत अपने प्रवचनों में मुसलमानों को आकर्षित करने और उनकी संस्थाओं से चंदा हासिल करना है। बीते कुछ साल में खाड़ी देशों में ऐसे कथावाचकों के प्रवचनों में भारी बढ़ोतरी हुई है। संस्कृत विद्वान देवदत्त पाठक के अनुसार “जब कोई कथावाचक मंच से अल्ला-अल्ला करते हैं तो इससे उनकी उदार हिंदू की छवि बनती है और इस्लामी संस्थाएँ इसकी मुंहमांगी क़ीमत चुकाने को तैयार रहती हैं। क्योंकि इससे हिंदुओं में इस्लाम को लेकर एक तरह का भ्रम बना रहता है। उनमें अपने इतिहास का बोध पैदा नहीं होने पाता। अपने ही धर्म को लेकर वो एक हीनभावना का शिकार रहते हैं। इसका नतीजा लव जिहाद और धर्मांतरण के रूप में सामने आता है। हो सकता है कि यही कारण रहा हो कि गांधी जी के बेटे हरिलाल ने भी इस्लाम कबूल लिया था।” यह भी पढ़ें: मंदिरों के ख़ज़ाने पर लंबे समय से है गिद्धदृष्टि, अब तक लूटे करोड़ों रुपये

हिंदू धर्म के इस्लामीकरण की एक बड़ी मिसाल अथीरा (Athira) नाम की यह लड़की है। केरल के कासरगोड़ की रहने वाली अथीरा भी यह सोचने लगी थी कि इस्लाम हिंदू धर्म से बेहतर है। 2017 में यह मामला काफी सुर्खियों में आया था जब उसने हिंदू धर्म छोड़कर इस्लाम कबूल कर लिया था। उसने अपने माता-पिता को एक चिट्ठी लिखकर जो कारण बताए थे उसमें सबसे बड़ा यह था कि “हिंदू धर्म में अल्लाह को पूजने की इजाज़त है तो क्यों न हम मुसलमान ही बन जाएं।” लड़की ने इसके बाद धर्मांतरण कर भी लिया। हालांकि बाद में उसकी आंखें खुलीं और वो दोबारा अपने माता-पिता के घर लौट आई। 

मीडिया से बातचीत में अथीरा ने माना था कि बचपन से उसे जो धार्मिक शिक्षा मिली उसमें हिंदू धर्म के बजाय उसे इस्लाम ज़्यादा शक्तिशाली लगा। जिसके कारण उसने मुसलमान बनने के बारे में सोचा। उसने कहा कि “मेरे दोस्त हिंदू धर्म का मज़ाक़ उड़ाते थे। उनमें कई मुसलमान और कई हिंदू भी होते थे। मैं उनकी बातों का जवाब नहीं दे पाती थी।” यह घटना बताती है कि बापू से लेकर मोरारी बापू तक हिंदू धर्म के इस्लामीकरण की जो कोशिश कर रहे हैं उसका क्या परिणाम होता है। यह भी पढ़ें: इंसान जैसी बातों पर हम मुसलमानों को महान क्यों बना देते हैं?

(आशीष कुमार की रिपोर्ट)

एक अपील: न्यूज़लूज़ के जरिए हम राष्ट्रवादी पत्रकारिता को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं। इस वेबसाइट पर होने वाला खर्च बहुत ज्यादा है और हमारी आमदनी काफी कम। हम अपने काम को जारी रख सकें इसके लिए हमें आर्थिक मदद की जरूरत है। ये हमारे लिए ऑक्सीजन का काम करेगी। डोनेट करने के लिए क्लिक करें:

या स्कैन करें


कृपया लेख कॉपी-पेस्ट न करें। कई लोग पोस्ट कॉपी करके फेसबुक और व्हाट्सएप पर शेयर कर देते हैं, जिससे वेबसाइट की आमदनी काफी कम हो गई है। राष्ट्रवाद की विचारधारा पर आधारित यह वेबसाइट बंद हो जाएगी तो क्या आपको खुशी होगी? कृपया खबरों का लिंक शेयर करें।

comments

Polls

क्या नरेंद्र मोदी सरकार इसी कार्यकाल में जनसंख्या कानून लाएगी?

View Results

Loading ... Loading ...

Donate to Newsloose.com

एक अपील: न्यूज़लूज़ के जरिए हम राष्ट्रवादी पत्रकारिता को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं। इस वेबसाइट पर होने वाला खर्च बहुत ज्यादा है और हमारी आमदनी काफी कम। हम अपने काम को जारी रख सकें इसके लिए हमें आर्थिक मदद की जरूरत है। डोनेट करने के लिए क्लिक करें:

या स्कैन करें

Popular This Week

Don`t copy text!