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मंदिरों के ख़ज़ाने पर लंबे समय से है गिद्धदृष्टि, अब तक करोड़ों की लूट

कांग्रेस के बड़े नेता पृथ्वीराज चव्हाण के उस बयान पर इन दिनों हंगामा मचा हुआ है, जिसमें उन्होंने मंदिरों का सोना ज़ब्त करने की माँग की है। यह सवाल उठ रहा है कि जब हिंदू मंदिरों ने कोरोनावायरस महामारी से लड़ने के लिए करोड़ों रुपये दान में दिए हैं तो फिर उनके स्वर्णभंडार पर बुरी नज़र डालने के पीछे नीयत क्या है? इस बात को समझने के लिए आपको कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान मंदिरों में हुई सरकारी लूट के बारे जानना ज़रूरी है। हम सबने सुना है कि पहले मुग़लों और बाद में अंग्रेजों ने देश के बड़े हिंदू मंदिरों को लूटा और उनका ख़ज़ाना अपने साथ ले गए। लेकिन क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि आज़ादी के बाद भी यह लूट जारी है? कुछ समय पहले आरटीआई में यह खुलासा हुआ था कि कर्नाटक की तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने सत्ता में रहते हुए न सिर्फ़ मंदिरों का पैसा लूटा, बल्कि उसे राज्य में ईसाई धर्म के प्रचार पर खर्च कर दिया। 2016 में आरटीआई की गई थी, जिसमें पता चला कि कांग्रेस की तत्कालीन सिद्धारमैया सरकार ने ईसाई संस्थाओं को करोड़ों रुपये दिए हैं। ये पैसे चर्च की मरम्मत और सुंदरीकरण के नाम पर बाँटे गए। नए चर्च और क्रिश्चियन कम्युनिटी हॉल बनाने के लिए भी मंदिरों का पैसा दिया गया। ऐसा करना संविधान की मूल भावना का उल्लंघन है, क्योंकि सेकुलर देश होने की वजह से कोई सरकार धार्मिक संस्थाओं को पैसा नहीं दे सकती। आरोप है कि ईसाई संस्थाओं की जेब भरने का यह काम कांग्रेस आलाकमान के इशारे पर ही हुआ।

ईसाई धर्म को बढ़ावा देने का एजेंडा

26 मार्च 2016 को आरटीआई के तहत कर्नाटक सरकार से कुल 4 प्रश्न पूछे गए। ये सरकारी आदेश नंबर- MWD 318MDS2011 (दिनांक 16/01/2012) के हवाले से राज्य अल्पसंख्यक विभाग की तरफ से चर्च को दिए जा रहे फंड के बारे में थे।
पहला सवाल– चर्च की मरम्मत के लिए सरकार की तरफ से साल दर साल कितना फंड दिया गया?
दूसरा सवाल– उन ईसाई संस्थाओं/चर्च के नाम और पते बताएं जिन्हें मरम्मत के नाम पर सरकार से पैसे मिले हैं?
तीसरा सवाल– नए चर्च बनाने पर साल दर साल राज्य सरकार ने कितने पैसे जारी किए?
चौथा सवाल– उन ईसाई संस्थाओं/चर्च के नाम और पते बताएं जिन्हें नए चर्च बनाने के लिए पैसे दिए गए?

चर्च के लिए खोला सरकारी खजाना

आररटीआई से मिली सूचना के अनुसार 2013-14 में कर्नाटक सरकार ने राज्य के 134 गिरिजाघरों को 12.30 करोड़ रुपये दिए। इसके अलावा 6.72 करोड़ रुपये क्रिश्चियन कम्युनिटी सेंटर बनाने के लिए दिए गए। इन कम्युनिटी सेंटरों में ही धर्मांतरण का ज्यादातर काम होता है। गाँव-गाँव में बने इन्हीं कम्युनिटी सेंटरों में यीशू के चमत्कार दिखाने के नाम पर भोले-भाले ग़रीबों को शिकार बनाया जाता है। 2014-15 में यह फंडिंग और बढ़ गई। इस दौरान 125 चर्चों को 16.56 करोड़ रुपये सरकारी खजाने से दिए गए। इसी तरह 55 ईसाई समुदाय भवन बनाने के लिए करीब 15 करोड़ रुपये बांटे गए। 2015-16 में चर्च की मरम्मत पर 15 करोड़ रुपये बांटे गए। इस दौरान कम्युनिटी सेंटर बनाने के खर्च का ब्योरा नहीं दिया गया। जो शक पैदा करता है कि कोई बड़ी रक़म ग़लत तरीक़े से किसी संस्था को दी गई होगी और उसे छिपाने की कोशिश हो रही है।

साल दर साल बढ़ा चर्च का फंड

तीन साल के अंदर चर्च को बांटे जा रहे पैसे में भारी बढ़ोतरी देखी जा सकती है। 2013-14 में कुल मिलाकर 19 करोड़ रुपये दिए गए थे, जोकि 2014-15 में बढ़कर 31.55 करोड़ रुपये हो गए। 2015-16 में रकम कुछ कम हुई, लेकिन इस साल भी 23 करोड़ रुपये ईसाई संस्थाओं की जेब में डाल दिए गए।

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मुख्यमंत्री सिद्धारमैया खुद को नास्तिक बताते हैं। लेकिन ईसाई संस्थाओं पर पैसे लुटाने की उनकी नीति का ही नतीजा है कि सरकार के 3 साल होने पर 13 मई के दिन क्रिश्चियन संस्थाओं ने बाकायदा उनका अभिनंदन किया।

मंदिरों का पैसा ईसाई संस्थाओं को देने की परंपरा काफी पुरानी है। 2002 में कर्नाटक के छोटे-बड़े मंदिरों में चढ़ावे के तौर पर कुल 72 लाख रुपये कमाई हुई थी। इसमें से मात्र 10 करोड़ रुपये मंदिरों को उनके रखरखाव और कर्मचारियों के वेतन के तौर पर वापस मिला। बाक़ी 50 करोड़ रुपया मदरसों और हज सब्सिडी के नाम पर और 10 करोड़ रुपये चर्च को दे दिया गया था। यह वो समय था जब कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार थी और एसएमएस कृष्णा मुख्यमंत्री थे। यह लूट हमेशा से जारी रही है। नीचे आप बाक़ी सालों का हिसाब भी देख सकते हैं।

एक अनुमान के मुताबिक़ पिछले लगभग 20-25 साल में मंदिरों का कम से कम 500 करोड़ रुपया अवैध तरीक़े से ईसाई और मुस्लिम संस्थाओं को दे दिया गया। देखा जाए तो यह लूट किसी मुग़ल आक्रमणकारी या अंग्रेजों से बहुत अधिक है। दरअसल यही वो समय है जब कांग्रेस में सोनिया गांधी की पकड़ मज़बूत होती गई। यह आँकड़ा भी सिर्फ़ कर्नाटक का है, अगर बाक़ी राज्यों का हिसाब जोड़ें तो यह रक़म कहीं अधिक होगी।

हिंदू मंदिरों को लूट रही है कांग्रेस!

जिस तरह से मंदिरों का पैसा मदरसों और चर्च को दिया जा रहा है उसे लूट नहीं कहेंगे तो क्या कहेंगे? क्योंकि चर्च और मदरसे इसी फंड से हिंदुओं का धर्मांतरण करते हैं। मंदिरों का पैसा हिंदुओं का है क्योंकि ये पैसा चढ़ावे के तौर पर हिंदू ही देते हैं। दूसरी तरफ़ चर्च और मस्जिदों में जमा होने वाले किसी पैसे में सरकार की कोई दखल नहीं होती। अमेरिका जैसे दुनिया के बड़े-बड़े ईसाई देशों में भी सरकारें चर्च बनाने या मरम्मत करने के नाम पर एक भी पैसा नहीं देतीं। कई देशों में ऐसा करना गैर-कानूनी है। सेकुलर देश होने के नाते भारत में भी कोई सरकार किसी धर्म के पूजास्थल बनाने या मरम्मत के लिए पैसे नहीं दे सकती। जहां तक कर्नाटक सरकार का सवाल है उसने राज्य कई कई हिंदू मंदिरों की करोड़ों की संपत्ति सील कर रखी है। इन मंदिरों के रख-रखाव पर इसी में से थोड़ी-बहुत रकम खर्च की जाती है। नतीजा राज्य के सैकड़ों साल पुराने मंदिरों की हालत बेहद जर्जर होती जा रही है। साथ ही राज्य के मंदिर ट्रस्टों की करोड़ों की कमाई भी सरकारी ख़ज़ाने में ही जाती है, जिसे हिंदू धर्म के बजाय ईसाइयों और दूसरे धर्मों पर लुटाया गया।

(न्यूज़ वेबसाइट इंडियाफैक्ट्स के इनपुट्स के साथ)

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