Home » Loose Top » पालघर हत्याकांड में पीड़ितों के वकील की रहस्यमय कार हादसे में मौत
Loose Top

पालघर हत्याकांड में पीड़ितों के वकील की रहस्यमय कार हादसे में मौत

बायीं तस्वीर वकील दिग्विजय त्रिवेदी की है। बीच में हादसे की शिकार उनकी कार को देखा जा सकता है।

महाराष्ट्र के पालघर में साधुओं की हत्या के मामले का रहस्य गहराता जा रहा है। अब इस मामले में पीड़ितों के वकील दिग्विजय त्रिवेदी की रहस्यमय हालात में सड़क हादसे में मौत हो गई। ये घटना 13 मई की है। वो मुंबई-अहमदाबाद हाइवे से सूरत जा रहे थे। मनोर के पास सड़क हादसे में उनकी जान चली गई। दिग्विजय त्रिवेदी ने विश्व हिंदू परिषद की तरफ़ से केस देखना शुरू किया था। हालाँकि उन्हें अभी इस मामले में औपचारिक तौर पर वकालतनामा भरना बाक़ी था। दावा किया जा रहा है कि यह घटना जब हुई तब वो इसी केस के सिलसिले में जा रहे थे। दो दिन पहले ही उन्होंने इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों की ज़मानत नहीं होने दी थी। दरअसल जिस तरह से इस मामले में जाँच कर रहे पुलिसवालों को बदला गया और फिर मीडिया में मामला उठाने वाले पत्रकार अर्णब गोस्वामी के ख़िलाफ़ पुलिस केस दर्ज करके उनसे पूछताछ की गई उसके कारण वकील दिग्विजय त्रिवेदी की मौत का मामला भी शक के दायरे में आ गया है। सोशल मीडिया पर लोग पूछ रहे हैं कि कहीं इसके पीछे कोई साज़िश तो नहीं है और साथ ही सीबीआई जाँच की माँग भी तेज़ हो गई है।

पहले से ईसाई नक्सली गठजोड़ पर शक

मुंबई से लगा पालघर का ये पूरा इलाक़ा ईसाई मिशनरियों का अड्डा है। यहाँ रहने वाले जनजातीय लोगों का वो धर्मांतरण कराते हैं। साथ ही ये महाराष्ट्र के उन कुछ इलाक़ों में से है जहां पर नक्सली गिरोह अलग-अलग नामों से सक्रिय हैं। जिस तरह से साधुओं की हत्या की गई थी उसके बाद से यह शक जताया जा रहा है कि उनका हाथ इसमें हो सकता है। साथ ही महाराष्ट्र के कुछ ताकतवर राजनीतिज्ञों की भूमिका भी सवालों के दायरे में है। सबसे बड़ी बात कि जिस तरह से इस मामले में चर्च का नाम जुड़ रहा है उससे अपने आप संदेह कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की तरफ़ मुड़ जाता है। यह माना जाता है कि भारत में ऐसे नक्सली और ईसाई संगठनों को हमेशा से सोनिया गांधी का संरक्षण मिलता रहा है। इस मामले में प्रदीप प्रभु उर्फ़ फादर पीटर डिमेलो और उसकी बीवी शिराज़ बिसारा पर भी आरोप लगे थे। यह बात भी कही जा रही है कि उन्हीं का एनजीओ काश्तकारी संगठन हत्या के आरोपियों के लिए वकील मुहैया करा रहा है और उन्हें ज़मानत दिलाने की कोशिश में है।

सड़क हादसे को लेकर कई तरह के सवाल

महाराष्ट्र टाइम्स के मुताबिक, ये हादसा मुंबई-अहमदाबाद हाईवे पर मनोर में मेंडवान ब्रिज के पास हुआ। यह जगह पालघर ज़िले में ही पड़ती है। जिस समय यह हादसा हुआ, उस समय त्रिवेदी ही गाड़ी चला रहे थे। पुलिस का कहना है कि कार का नियंत्रण खो गया और गाड़ी पलट गई, जिस कारण त्रिवेदी की मौके पर ही मौत हो गई। लेकिन ये वो मामला है जिसमें महाराष्ट्र सरकार और वहाँ की पुलिस से लेकर दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष तक शक के दायरे में हैं। लिहाज़ा पुलिस जो कह रही है उस पर आँख मूँद कर भरोसा नहीं किया जा सकता। क्योंकि ये वही पुलिस है जिसने 70 साल के कल्पवृक्ष गिरी और 35 साल के सुशील गिरी महाराज और उनके ड्राइवर निलेश तेलगड़े की हत्या को तीन दिन तक ये कह छिपाए रखा था कि उन्हें बच्चा चोरी के शक में मारा गया। 16 अप्रैल की रात को यह घटना हुई थी और इसके बाद 19 अप्रैल को एक वीडियो सामने आया जिसमें देखा जा सकता था कि ख़ुद पुलिस वाले तीनों लोगों को भीड़ के हवाले कर रहे हैं। इस घटना ने पूरे देश के हिंदू समाज को झकझोर कर रख दिया था।

महाराष्ट्र सरकार का रवैया अजीबोगरीब

इस मामले में महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार का रवैया सबसे विचित्र है। सबसे पहले उसने साधुओं की हत्या को दबाने की पूरी कोशिश की। जब फिर भी कामयाब नहीं हुई तो कहा कि हत्यारे भी हिंदू हैं। इसके बाद इस हत्याकांड को मीडिया में दिखाने वाले रिपब्लिक चैनल के पत्रकार अर्णब गोस्वामी पर हमला हुआ और उनसे पुलिस ने पूछताछ शुरू कर दी। इसके कुछ दिन बाद मामले की जाँच कर रहे पालघर के पुलिस अधीक्षक (एसपी) गौरव सिंह को अचानक छुट्टी पर भेज दिया गया। बताया जाता है कि उनकी जाँच स्थानीय चर्च और उससे जुड़े कुछ ताकतवर लोगों और उन्हें शह दे रहे सत्ताधारी नेताओं तक पहुँच गई थी।

देखें वीडियो:

(न्यूज़लूज़ ब्यूरो)

एक अपील: न्यूज़लूज़ के जरिए हम राष्ट्रवादी पत्रकारिता को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं। इस वेबसाइट पर होने वाला खर्च बहुत ज्यादा है और हमारी आमदनी काफी कम। हम अपने काम को जारी रख सकें इसके लिए हमें आर्थिक मदद की जरूरत है। ये हमारे लिए ऑक्सीजन का काम करेगी। डोनेट करने के लिए क्लिक करें:

कृपया लेख कॉपी-पेस्ट न करें। कई लोग पोस्ट कॉपी करके फेसबुक और व्हाट्सएप पर शेयर कर देते हैं, जिससे वेबसाइट की आमदनी काफी कम हो गई है। राष्ट्रवाद की विचारधारा पर आधारित यह वेबसाइट बंद हो जाएगी तो क्या आपको खुशी होगी? कृपया खबरों का लिंक शेयर करें।

comments

Polls

क्या नरेंद्र मोदी सरकार इसी कार्यकाल में जनसंख्या कानून लाएगी?

View Results

Loading ... Loading ...
Don`t copy text!