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औरंगज़ेब ने बनाया था मुसलमान, 250 लोगों ने की ‘घर वापसी’

हरियाणा के हिसार जिले में बड़ी संख्या में मुस्लिम आबादी ने घर वापसी करके दोबारा हिंदू धर्म को अपना लिया है। ये मामला हिसार के बिठमड़ा गाँव का है। जहां क़रीब साढ़े तीन सौ साल पहले औरंगज़ेब के डर से लोगों को हिंदू धर्म छोड़कर मुसलमान बनना पड़ा था। दरअसल पिछले दिनों गाँव की एक बुजुर्ग का निधन हो गया था। गाँव वालों ने फ़ैसला किया कि वो उन्हें दफ़नाने के बजाय उनका दाह संस्कार करेंगे और इसी के साथ वो सामूहिक रूप से दोबारा हिंदू धर्म को अपना लेंगे। ये सभी 250 लोग कुल क़रीब 30 परिवारों के हैं। सभी ने एलान किया है कि वो अपनी मर्ज़ी से इस्लाम छोड़कर अपने मूल धर्म में लौट रहे हैं। गाँव के लोगों ने कुछ समय से मुसलमान होने के बावजूद हिंदू नाम रखने शुरू कर दिए थे। दरअसल पिछले कुछ समय से यह चलन देखा जा रहा है। अभी कुछ दिन पहले ही हरियाणा के जींद में भी कई मुस्लिम परिवारों ने हिंदू धर्म अपना लिया था। बताया जा रहा है कि अकेले हरियाणा और वहाँ से लगे पश्चिमी यूपी में कई मुस्लिम परिवार घर वापसी के लिए तैयार हैं। यह भी पढ़ें: दुनिया भर में इस्लाम क्यों छोड़ रहे हैं लोग?

इस्लाम से हो चुका था मोहभंग

गाँव के लोगों का कहना है कि उनके अंदर यह भावना हमेशा से थी कि उनके पूर्वजों को मजबूरी में तलवार के नोक पर मुसलमान बनाया गया था। इसलिए लोगों ने यह सोचना शुरू कर दिया कि अब जब औरंगज़ेब या उसके जैसे किसी राजा का कोई डर नहीं है तो अपने साथ मुस्लिम पहचान को क्यों ढोया जाए। लिहाज़ा कुछ साल से लोगों ने बच्चों के नाम हिंदुओं जैसे रखने शुरू कर दिए थे। साथ ही बच्चों में ख़तना करने की रस्म भी खत्म कर दी और मस्जिद जाना भी बंद कर दिए। इसके बाद लोगों ने ईद, बक़रीद जैसे मुस्लिम त्यौहारों की जगह होली, दिवाली मनाना शुरू कर दिया। हालाँकि लोगों ने शवों को दफ़नाने की परंपरा जारी रखी थी। लेकिन अब उसे भी छोड़ दिया और औपचारिक तौर पर एलान कर दिया कि वो अब से हिंदू हैं। आगे से काग़ज़ी कार्रवाई वग़ैरह में भी वो ख़ुद को हिंदू के तौर पर ही दर्ज कराएँगे। यह भी पढ़ें: मैंने इस्लाम क्यों छोड़ा? पढ़िए एक पूर्व-मुस्लिम का पत्र

कई परिवार चाहते हैं घर वापसी

हिसार का ये मामला इकलौता नहीं है। हरियाणा, पश्चिमी यूपी और दिल्ली में ऐसे कई दर्जन गाँव हैं जहां मुस्लिम आबादी सामूहिक तौर पर हिंदू धर्म में लौटना चाहती है। अक्सर सामाजिक दबाव में ये लोग हिम्मत नहीं कर पाते। लेकिन समय के साथ इन लोगों ने अपनी मुस्लिम पहचान को छिपाना शुरू कर दिया है। पश्चिमी यूपी में रहने और दिल्ली में नौकरी करने वाले एक शख़्स से हमने जब इसका कारण पूछा तो उसने बताया कि “पिछले कुछ साल में आतंकवाद और अपराधों के कारण मुसलमानों की छवि ख़राब हुई है। इस कारण ख़ुद को मुसलमान कहने में शर्मिंदगी होती है।” शर्मिंदगी का ज़्यादा बड़ा कारण यह है कि गाँवों के बुजुर्ग जानते हैं कि उनके दादा-परदादा हिंदू थे। ऐसे में लोग अब हिम्मत करके इस्लाम छोड़कर घर वापसी की तरफ़ बढ़ रहे हैं। ऐसे ढेरों गाँव मिलेंगे जहां मुसलमानों ने अपने बच्चों के हिंदू नाम रखने शुरू कर दिए हैं।

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आपको बता दें कि इससे पहले हरियाणा के जींद जिले के दनौदा गाँव में रहने वाले 6 मुस्लिम परिवारों करीब 35 सदस्यों ने हिंदू धर्म को अपना लिया था। दरअसल 18 अप्रैल को बुजुर्ग निक्काराम की मौत के बाद उनके शव का भी हिंदू रीति से दाह संस्कार किया गया था। इसके बाद परिवार के सदस्यों ने हिंदू धर्म में वापसी की इच्छा जताई और फिर घर पर हवन यज्ञ करा जनेऊ पहन हिंदू धर्म में वापसी कर ली थी।

(न्यूज़लूज टीम)

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