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जहां मारा गया रियाज़ नाइकू, वो अवंतिपोरा कभी हिंदुओं का तीर्थ था

अवंतिपोरा का ऐतिहासिक अवंति स्वामी मंदिर। आज यहाँ सिर्फ़ खंडहर बचा है।

हिज़बुल मुजाहिदीन के आतंकी रियाज़ नायकू के एनकाउंटर के बाद से कश्मीर के पुलवामा ज़िले का अवंतिपोरा क़स्बा भी ख़बरों में हैं। कम लोगों को पता होगा कि आज इस्लामिक आतंकवादियों का गढ़ बन चुकी ये जगह कभी सनातन धर्म की आस्था का केंद्र हुआ करता था। 14वीं शताब्दी तक यहाँ लगभग पूरी तरह हिंदू धर्म को मानने वाले लोग ही रहा करते थे। कश्मीर ही वो जगह है जहां पर हिंदू धर्म की शैव विचारधारा का जन्म हुआ था। इसके अलावा शंकराचार्य द्वारा स्थापित चार पीठों में से एक शारदा पीठ कश्मीर में है। शारदा माँ सरस्वती का ही एक नाम है। उन्हें ‘कश्मीरपुर वासिनी’ भी कहा गया है। पहले मुग़लों और बाद में अंग्रेजों के दौर में कश्मीर घाटी के अंदर हिंदुओं को जबरन मुसलमान बनाने का काम लगातार चलता रहा, जिसका नतीजा निकला कि धीरे-धीरे क़रीब 500 साल में कश्मीर घाटी में मुसलमानों की आबादी हिंदुओं से अधिक हो गई। आज़ादी के समय तक यह सब काम बहुत प्यार-मुहब्बत के साथ चलता रहा, लेकिन उसके बाद यहाँ के बहुसंख्यक मुस्लिम तबके ने धीरे-धीरे अपना असली रंग दिखाना शुरू कर दिया। इसका सबसे ज़्यादा शिकार वो हिंदुओं के वो धार्मिक स्थल बने जो कभी आस्था का केंद्र हुआ करते थे। यह भी पढ़ें: हिंदू मंदिरों के निर्माण के पीछे का विज्ञान जो आज भी रहस्य है

जानिए अवंतिपोरा का इतिहास

अवंतिपोरा का नाम राजा अवंति वर्मन के नाम पर पड़ा था। वो उत्पल वंश के राजा थे, जिन्होंने साल 853 से 888 के बीच यहाँ पर शासन किया। उत्पल वंश जाटों के सबसे शक्तिशाली राजवंशों में से एक माना जाता है। अवंतिपुरा में इसी जाट गोत्र के ज्यादातर लोग रहा करते थे। उस दौर में अवंतिपोरा अवंतिपुर के नाम से जाना जाता था और ये जम्मू कश्मीर के बड़े इलाक़े की राजधानी था। ठीक वैसे ही जैसे आजकल श्रीनगर राजधानी है। उस दौर में ये जगह हिंदू आस्था के बड़े केंद्रों में से एक थी। राजा अवंति वर्मन के बनवाए कई मंदिर यहाँ आज भी मौजूद हैं। उससे क़रीब 100 साल पहले राजा ललितादित्य के बनवाए मंदिरों के अवशेष भी देखे जा सकते हैं। ये सभी आज भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की देखरेख में हैं। मुग़लों के दौर में जब यहाँ पर इस्लामी अत्याचारों का सिलसिला शुरू हुआ तो कुछ लोग पंजाब और गुजरात में जाकर बस गए। उप्पल और ओपल जाति नाम वाले लोग ख़ुद को इसी वंश का मानते हैं। यह भी पढ़ें: जानिए जगन्नाथ मंदिर में क्यों घुसना चाहते हैं ग़ैर-हिंदू?

अवंति स्वामी मंदिर के खंडहर

अवंतिपोरा की पहचान कभी यहाँ बना अवंति स्वामी मंदिर हुआ करता था। झेलम नदी के किनारे बना यह मंदिर मार्तंड सूर्य मंदिर की शैली का है। आज इसके खंडहर बाक़ी हैं। लेकिन इन्हें देखकर ही अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि यह कभी कितना विशाल और भव्य मंदिर रहा होगा। कहते हैं कि इस मंदिर को झेलम में आई बाढ़ से काफ़ी नुक़सान पहुँचा था। बाद में मुग़लों के दौर में इस पर किसी ने ध्यान नहीं दिया और ये धीरे-धीरे खंडहर में बदलता गया। राजा अवंति वर्मन ने अवंतिपुर में दो भव्य मंदिर बनवाए थे। एक भगवान विष्णु का, जिसे अवंति स्वामी मंदिर कहते हैं और दूसरा भगवान शिव का मंदिर था जिसे अवंतीश्वर मंदिर कहते हैं। राजा ने विष्णु मंदिर अपने राज्याभिषेक से पहले बनवाया था और शिव मंदिर बाद में। लेकिन ये दोनों ही मंदिर आज बुरी हालत में हैं। अंग्रेजों ने यहाँ पर खुदाई भी कराई थी, जिसमें बेशक़ीमती मूर्तियाँ मिली थीं। इनमें से कई अंग्रेज अपने साथ ले गए। यह भी पढ़ें: वेटिकन सिटी और मक्का से भी बड़ा होगा भगवान राम का मंदिर

अवंतीश्वर मंदिर आज खंडहर की शक्ल में पड़ा हुआ है और उसके चारों तरफ़ विशाल मस्जिदें पनप चुकी हैं।

तीर्थस्थल बना आतंक का अड्डा

अवंतिपोरा का उस दौर के कई धार्मिक दस्तावेज़ों में वर्णन मिलता है। मध्यकाल तक कई आस्थावान हिंदू साधु-संत यहाँ पर दर्शनों के लिए पहुँचा करते थे। लेकिन मुगलकालीन अत्याचारों के चरम पर पहुँचने, फिर अंग्रेजों की ग़ुलामी और आज़ादी के बाद सरकारों से मिली उपेक्षा और इस्लाम के बढ़े प्रभाव के कारण हिंदुओं का ये तीर्थस्थान आज देशद्रोही विधर्मी आतंकवादियों का अड्डा बन चुका है। कश्मीर में मुग़लों के अत्याचार का तरीक़ा बिल्कुल अलग था। तलवार के दम पर यहाँ भी धर्मांतरण कराए गए, लेकिन उससे ज़्यादा लोग सूफ़ी संतों का शिकार बने। सूफ़ी संत बड़े ही प्यार से मज़हब बदलवा दिया करते थे। उनके प्रभाव के कारण ही कई कश्मीरी मुसलमान आज भी हिंदुओं के सरनेम (उपनाम) इस्तेमाल करते हैं, जबकि वो अपना धर्म बदल चुके हैं। विडंबना यह है कि यहाँ की मुस्लिम आबादी में से ज़्यादातर ऐसे हैं जो पहले हिंदू हुआ करते थे। आज भी यहाँ ढेरों मुस्लिम परिवार मिलते हैं जो दो-चार पीढ़ी पहले तक हिंदू थे। यानी जिन लोगों ने कभी तलवार या किसी अन्य कारण से धर्म का त्याग किया था वो आज उसी धर्म और उसी देश के लिए नासूर बन चुके हैं।

अवंतिस्वामी मंदिर में भगवान विष्णु की प्राचीन प्रतिमा। पूजापाठ तो दूर आज इनकी देखभाल भी ठीक से नहीं हो रही है।

(न्यूज़लूज़ रिपोर्ट)

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