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ममता के बंगाल में ‘कोरोना विस्फोट’?, एक लाख लोगों में हैं लक्षण

बंगाल में कोरोना वायरस के मरीज़ों की सही संख्या छिपाने की ममता बनर्जी की तमाम कोशिशों के बाद जो सच्चाई सामने आ रही है वो दिल दहलाने वाली है। पहली बार बंगाल सरकार ने इशारों-इशारों में माना है कि उसके यहाँ कोविड19 संक्रमित मरीज़ों की संख्या क़रीब एक लाख तक हो सकती है। अब तक बंगाल सरकार कुल मरीज़ों की संख्या 1300 के आसपास बताती रही है। बीजेपी लगातार आरोप लगाती रही है कि ममता बनर्जी राज्य में कोरोनावायरस को लेकर देश को गुमराह कर रही हैं। इसके बाद एक केंद्रीय टीम राज्य के हालात का जायज़ा लेने गई है। जिसके बाद बंगाल सरकार पर इस बात का दबाव बढ़ गया था कि वो सही स्थिति ख़ुद बताए। बंगाल सरकार ने एक औपचारिक सूचना में बताया है कि राज्य में ‘इनफ्लूएंजा के जैसे लक्षणों’ वाले मरीज़ों की संख्या 91,515 है। इसके अलावा 872 लोगों को सांस से जुड़ी गंभीर बीमारियाँ हुई हैं। ममता सरकार का कहना है कि उसने राज्यभर में 5.57 करोड़ घरों में जाकर सर्वे (surveillance) कराया है, ये आँकड़े उसी से मिले हैं। 6 मई तक पूरे देश में कोरोना संक्रमित लोगों की संख्या 50 हजार के लगभग थी, जिसमें बंगाल का आंकड़ा सिर्फ 1300 ही था। इनमें भी मृत्यु की दर 14 प्रतिशत के आसपास है।

बंगाल में हालात बेहद ख़राब

बंगाल सरकार ने अपने बयान में लगभग 92 हज़ार मरीज़ों की बात एक तरह से मान ली है। जो लक्षण बताए गए हैं वो बहुत कुछ कहते हैं। क्योंकि बंगाल के ज़्यादातर इलाक़ों में गर्मी पड़ रही है। इस समय सामान्य या मौसमी सर्दी-जुकाम के मरीज़ बहुत कम पाए जाते हैं। समझना मुश्किल नहीं है कि अगर बंगाल सरकार ख़ुद ही मान रही है कि इतनी बड़ी संख्या में ऐसे मरीज़ हैं तो इनमें से ज़्यादातर कोविड-19 के ही मरीज़ होंगे। बंगाल सरकार अब तक जिस तरह सच छिपाने में लगी रही थी, उसे देखते हुए इस आँकड़े पर भी बहुत सारे लोग यक़ीन नहीं कर पा रहे हैं। वैसे भी यह सर्वे 7 अप्रैल से 3 मई के बीच का बताया जा रहा है। इस दौरान बंगाल में लॉकडाउन पर बहुत सख़्ती के साथ अमल नहीं कराया गया है। रमज़ान के मौक़े पर कोलकाता और बंगाल के सारे मुस्लिम इलाक़ों में आम दिनों की तरह ही चहल-पहल बनी रही। मतलब साफ़ है कि कोरोना वायरस का फैलाव इस दौरान और भी तेज़ी से बढ़ा होगा और सही संख्या शायद कहीं अधिक होगी। फ़िलहाल सबसे बुरा हाल दक्षिण 24 परगना में है जहां कुल 8712 मरीज़ मिले हैं, इसके बाद बर्दवान पूर्व और अलीपुर द्वार हैं।

चीन स्टाइल में ममता सरकार

ऐसा लग रहा है कि बंगाल सरकार कोरोना से बिल्कुल चीन के अंदाज में निपट रही है। आँकड़ों में हेराफेरी ही नहीं, लाशों को चोरी-छिपे जलाने या दफ़नाने के मामले भी सामने आ रहे हैं। बड़ी संख्या में इलाज या टेस्ट के बिना ही लोगों के मरने की बातें सामने आ रही हैं। इंद्रनील खान नाम के एक डॉक्टर ने बदइंतज़ामी के ख़िलाफ़ ट्विटर पर लिखा तो उसे रातोंरात ममता सरकार ने उठवा लिया था। ग़रीबों में बाँटने के लिए केंद्र की तरफ़ से जो अनाज मिला उसकी कालाबाज़ारी के भी मामले सामने आ रहे हैं। जब राज्यपाल ओपी धनखड़ ने इसके ख़िलाफ़ बोला तो ममता ने उल्टा राज्यपाल को ही धमका दिया। हैरानी की बात है कि मीडिया ममता सरकार से बुरी तरह से डरा हुआ है। जिन पत्रकारों ने भी सच लिखने की कोशिश की उसके ख़िलाफ़ मुक़दमे दर्ज कर लिए गए।

मुस्लिम तुष्टीकरण का नतीजा

जब कोरोना वायरस शुरू हुआ था तब ममता बनर्जी पहली नेता थीं, जिन्होंने कहा था कि ये बीमारी कुछ नहीं है। केंद्र सरकार इसका हौवा फैला रही है ताकि नागरिकता क़ानून के ख़िलाफ़ विरोध से ध्यान भटकाया जा सके। इसके बाद उन्होंने तब्लीगी जमात के लोगों का बचाव शुरू किया। अब जब महामारी पूरे बंगाल को अपनी चपेट में ले चुकी है इसके बावजूद भी बंगाल की मस्जिदों में खुलेआम नमाज़ हो रही है। जबकि बंगाल में मंदिर, गुरुद्वारे और दूसरे धर्मस्थलों पर ताला लगा हुआ है।

(न्यूज़लूज़ टीम)

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