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दुबई की राजकुमारी के भारत विरोधी अभियान का कांग्रेस कनेक्शन

खाड़ी देशों में भारतीयों और ख़ास तौर पर हिंदुओं के ख़िलाफ़ अभियान में पहली बार कांग्रेस का नाम सामने आया है। इस अभियान के तहत लोगों के सोशल मीडिया प्रोफ़ाइल खंगालकर उनको नौकरी से निकलवाया जा रहा है। इसका शिकार वो लोग हो रहे हैं जिन्होंने कभी सोशल मीडिया पर अपने राजनीतिक विचारों को खुलकर जताया था। यह प्रचार किया जा रहा है कि भारत में ‘इस्लामोफोबिया’ है। अभियान का चेहरा दुबई के शाही घराने की कथित राजकुमारी को बनाया गया है। प्रिंसेस हेंद फैसल अल-कासमी (Princess Hend Al Qassimi) नाम की यह महिला खुद को सामाजिक कार्यकर्ता बताती है। भारत में तब्लीगी जमात की हरकतों को लेकर जब लोगों में नाराजगी पैदा हुई और कुछ लोगों ने उनके खिलाफ लिखना और बोलना शुरू किया तो यूएई की इस प्रिंसेस ने इसे भारत और हिंदुओं के खिलाफ हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर लिया। लेकिन सवाल उठ रहा है कि यूएई की एक राजकुमारी को भारतीय राजनीति में इतनी दिलचस्पी क्यों है? दुबई की राजकुमारी के इस अभियान के पीछे कांग्रेस का हाथ होने के आरोप लग रहे हैं। यह बात सामने आ रही है कि कांग्रेस की शह पर ही प्रिंसेज हेंद अल-कासमी ने भारतीयों और हिंदुओं को टारगेट किया। सबसे चिंता की बात यह है कि इस पूरे अभियान में पाकिस्तान और भारत के कट्टरपंथी इस्लामी संगठन भी शामिल हैं। यह भी पढ़ें: क्या फिर से पाकिस्तान को बचाने की फिराक में है कांग्रेस

‘राजकुमार’-राजकुमारी का ‘नापाक’ मिलन

प्रिंसेस हेंद अल क़ासमी की कांग्रेस के प्रिंस राहुल गांधी के साथ एक तस्वीर सोशल मीडिया पर सामने आई है। यह तस्वीर ही अपने आप में काफ़ी कुछ कह रही है। क्योंकि इसमें पीछे कांग्रेस की ओवरसीज़ सेल के प्रमुख सैम पित्रोदा दिखाई दे रहे हैं। सैम पित्रोदा वो शख़्स हैं जिन्होंने कुछ महीने पहले दुनिया भर के देशों में भारतीय दूतावासों के बाहर प्रदर्शन का आयोजन किया था। ये अपने आप में इकलौती घटना थी, जब भारत की एक राजनीतिक पार्टी अपने ही देश के ख़िलाफ़ दूसरे देश में प्रदर्शन कर रही थी। बताया जा रहा है कि प्रिंसेस अल क़ासमी और राहुल गांधी की ये मुलाक़ात 2019 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले जनवरी माह की है। खुफिया सूत्रों के मुताबिक़ प्रिंसेस अल क़ासमी को कांग्रेस अपनी पीआर एजेंट के तौर पर नियुक्त किया है। वो ट्विटर पर काफ़ी एक्टिव हैं, लेकिन अपने इस्लामी देश में ग़ैर-मुस्लिमों के साथ नाइंसाफ़ी पर कभी कुछ नहीं बोलतीं। लेकिन भारत में मुसलमानों पर तथाकथित अत्याचार को लेकर वो भारत को ज्ञान देती रहती हैं। मज़ेदार बात यह है कि ये तथाकथित राजकुमारी ख़ुद को महात्मा गांधी का प्रशंसक बताती है। यह भी पढ़ें: जानिए जब कांग्रेस ने मुफ़्त में छोड़ दिए थे पाकिस्तान के 25 आतंकवादी

यूएई और भारत के रिश्ते बिगाड़ने की साज़िश

भारत और यूएई के रिश्ते हमेशा से बहुत अच्छे रहे हैं। अगस्त 2019 में यूएई ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने सर्वोच्च सम्मान ऑर्डर ऑफ जायेद से सम्मानित किया था। भारत कई मुश्किल मौक़ों पर यूएई की मदद करता रहा है। इस समय भी जब कोरोना वायरस फैला हुआ है, भारत ने दवाओं और मेडिकल साजो-सामान ही नहीं, डॉक्टरों की एक टीम भी वहाँ भेजी। पिछले साल मार्च में अबू धाबी में इस्लामी देशों (OIC) की बैठक में भारत को गेस्ट ऑफ ऑनर के तौर पर बुलाने के पीछे भी यूएई का बड़ा रोल रहा था। यूएई और भारत के यही रिश्ते पाकिस्तान समर्थक लॉबी को हमेशा से खटकते रहे हैं। पाकिस्तान की एजेंसियां हमेशा भारत और यूएई की सरकार के बीच खटास पैदा करने की कोशिशें करते रहे हैं। कश्मीर मुद्दे पर भी उन्होंने इसकी बहुत कोशिश की थी, लेकिन सफल नहीं रहे। लेकिन ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि अब उसे इस काम में कांग्रेस पार्टी की ओवरसीज विंग से जुड़े कुछ लोगों का समर्थन मिल गया है। हाल के दिनों में दुबई में भारतीयों के कारोबारी हितों और उनकी नौकरियों पर हो रहे हमलों के पीछे वही है। यह भी पढ़ें: सबूत मांगकर ऐसे पाकिस्तान की मदद करती है कांग्रेस

भारतीय कारोबारी बीआर शेट्टी बने शिकार

इस अभियान का सबसे बड़ा शिकार वहाँ भारतीय मूल के अरबपति बीआर शेट्टी को होना पड़ा है। उसे शक था कि वो दुबई में बीजेपी के मददगार के तौर पर काम कर रहे हैं। लिहाज़ा उनके कारोबार के ख़िलाफ़ बहुत बड़ा षड्यंत्र रचा गया। लंदन में उनकी कंपनी एनएमसी हेल्थ (NMC Health) पर भ्रष्टाचार का एक आरोप लगा। इसके बाद दुबई शेयर बाजार में उनके कारोबार पर रोक लगा दी गई। इस घटना से खाड़ी देशों में कारोबार करने वाले भारतीयों के बीच डर है। न्यूज़लूज़ ने इस बारे में कुवैत और दुबई में रहने वाले कुछ भारतीयों से बात की। उन्होंने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इस कार्रवाई से पूरा भारतीय बिज़नेस समुदाय डरा हुआ है। आशंका है कि दुबई में किसी भारतीय को बिज़नेस वीज़ा मिलना भी मुश्किल होगा। बड़े पदों पर बैठे भारतीय अधिकारियों की नौकरी भी ख़तरे में पड़ सकती है। बीआर शेट्टी की कंपनी पर इतनी जल्दी और इतनी बड़ी कार्रवाई के पीछे जो सबसे बड़ा कारण बताया जा रहा है वो है खाड़ी में भारत के ख़िलाफ़ दुष्प्रचार। कुछ का तो यहां तक आरोप है कि दुबई की प्रिंसेस के पीछे कोई और नहीं बल्कि कांग्रेस और पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI का हाथ है। राहुल गांधी के साथ उनकी तस्वीरों से इस आरोप को और भी बल मिल रहा है। यह भी पढ़ें: क्या राहुल गांधी और प्रियंका वाड्रा के ट्विटर अकाउंट पाकिस्तान से चल रहे हैं?

बीआर शेट्टी

टर्की में कांग्रेस ने खोला है अपना दफ़्तर

आपको यह जानकर हैरानी होगी कि जो कांग्रेस पार्टी भारत के अंदर अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है उसने पिछले साल (2019) नवंबर में इस्लामिक देश टर्की में अपना दफ़्तर खोला है। इसकी टाइमिंग भी बेहद चौंकाने वाली थी। टर्की ने कश्मीर के मामले पर जिस दिन पाकिस्तान का समर्थन किया, उसके ठीक अगले ही दिन वहाँ इंडियन ओवरसीज़ कांग्रेस (Indian Overseas Congress (IOC)) का दफ़्तर खोलने का एलान किया गया। इसका प्रमुख मुहम्मद यूसुफ खान (Muhammad Yusuf Khan) नाम के एक व्यक्ति को बनाया गया है, जो अपने आप में बेहद संदिग्ध किस्म का है। कोई नहीं जानता कि उसकी ऐसी क्या योग्यता थी कि कांग्रेस ने उसे यह जिम्मेदारी दी। कहा गया कि कांग्रेस का ये कार्यालय भारत और टर्की के बीच द्विपक्षीय संबंधों, संस्कृति, व्यापार, पर्यटन, शिक्षा और स्वास्थ्य को बढ़ावा देने का काम करेगा। टर्की का रवैया हमेशा से भारत विरोधी रहा है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर वो हमेशा पाकिस्तान का साथ देता रहा है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि कांग्रेस के इस कदम के पीछे क्या रहस्य है? यह शक है कि टर्की में यह दफ्तर ही खाड़ी और यूरोपीय देशों में भारत विरोधी अभियानों का केंद्र बनता जा रहा है।

(न्यूज़लूज़ टीम)

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