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कोरोना से सब बदहाल, तो क्यों है शेयर बाजारों में भारी उछाल?

सारी दुनिया में कोरोना वायरस की वजह से मौत का तांडव मचा हुआ है। खबरों में लोगों की नौकरियां जाने और कंपनियों के भरी नुकसान की बातें अब आम हैं। ऐसे में यह बात समझ से परे है कि भारत और दुनिया के शेयर बाजारों में इन दिनों भारी उछाल क्यों है? भारतीय शेयर सूचकांक सेंसेक्स में पिछले एक ही हफ्ते में लगभग 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। यहाँ तक कि सप्ताह के आख़िरी कारोबारी दिन यानी 30 अप्रैल को सेंसेक्स में लगभग 1000 अंकों की भारी बढ़त देखने को मिली। ये सब भी तब जब इसी हफ्ते में देश की सबसे बड़ी कार उत्पादक मारुति ने बीते एक महीने में एक भी कार न बेच पाने की बात मानी है। कंपनी की शुरुआत से आज तक ऐसा पहली बार हुआ है। हालाँकि इस बात का भी शेयर बाजार पर कोई असर नहीं पड़ा। ऐसे में लोग पूछ रहे हैं कि निवेशक ऐसा क्या देख रहे हैं जो आम लोग नहीं देख पा रहे? यह भी बढ़ें: लॉकडाउन की तपस्या के बाद भारत के लिए हैं सुनहरे भविष्य के अवसर

कैसे कोरोना से बदल रही है दुनिया

पिछले दो दशकों में चीन ने दुनिया भर में अपनी मैन्युफैक्चरिंग की धाक जमा रखी थी। दुनिया की तमाम बड़ी-बड़ी कंपनियों ने उसके यहाँ पर अपनी फ़ैक्टरियाँ खोलीं। इसकी वजह से जहाँ चीन दुनिया भर का मैन्युफैक्चरिंग हब बन गया, दुनिया भर के कई दूसरे देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर इसका बहुत बुरा असर हुआ। लेकिन कोरोना वायरस फैलने के बाद इन देशों के लिए एक अलग तरह की समस्या भी उठ खड़ी हुई। चीन में मैन्युफैक्चरिंग होने की वजह से दुनिया भर के देशों और उनकी कंपनियों की सप्लाई चेन बुरी तरह से बाधित हो गई। ऐसे में कुछ कंपनियां अपनी मैन्युफैक्चरिंग को अपने देश वापस ले जाना चाहती हैं, क्योंकि वहाँ के स्थितियों पर उनका ज़्यादा बेहतर नियंत्रण हो सकता है। लेकिन बड़ी संख्या में ऐसी कंपनियां भी हैं जो अपने निवेश और निर्माण के लिए चीन के अलावा दूसरे विकल्प भी ढूँढ रही हैं। ऐसे में उनकी पसंद वो देश हैं जिन्हें उभरती अर्थव्यवस्था के तौर पर देखा जाता है, लेकिन वहाँ निर्माण करना लगभग चीन की तरह ही सस्ता पड़ता है। भारत ऐसे पसंदीदा जगहों में से एक है। यह भी पढ़ें: बिक रही BSNL के लिए क्यों आज कोई रोने वाला नहीं

ऐसा क्या है जो निवेशक देख रहे हैं?

दुनिया भर में निवेशक इस तेज़ी से होते बदलाव को भली भांति समझ रहे हैं। आमतौर पर निवेशकों को वर्तमान में तेज़ बदलाव पर प्रतिक्रिया करने वाला माना जाता है। हालाँकि कोरोना के कारण बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हुई अर्थव्यवस्था के बीच निवेशक वर्तमान के मोह से निकल कर बेहतर भविष्य को देख रहे हैं। चूँकि इन निवेशकों को अर्थव्यवस्था के बारे में भविष्यवाणी करने का बेहतर अनुभव होता है, उम्मीद किया जा सकता है कि भारत और दुनिया भर के शेयर निवेशक कुछ ऐसा देख पा रहे हैं जो वर्तमान की बदहाल अर्थव्यवस्था से पीड़ित करोड़ों लोगों की समझ से अभी परे है। इस दिशा में बहुत सारे काम ऐसे भी हुए हैं जिन्हें आप मीडिया में देख सकते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले दिनों मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक में कहा था कि वो चीन से शिफ़्ट हो रही कंपनियों को लुभाने के लिए अपनी योजनाओं का एलान करें। यह भी पढ़ें: लॉकडाउन के कारण पार्किंग में खड़ी है कार? फ़ौरन करें ये ज़रूरी काम

यूपी सरकार निवेश की होड़ में आगे

चीन से आने वाले निवेश का फ़ायदा उठाने में उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार सबसे आगे दिख रही है। 29 अप्रैल को मुख्यमंत्री ने अमेरिका के लगभग 100 निवेशकों और कंपनियों के साथ वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग की, जिसमें उन्होंने खुलकर कहा कि अगर वो अपने मैनुफ़ैक्चरिंग यूनिट चीन से निकालकर उत्तर प्रदेश में लगाना चाहें तो सरकार उन्हें मनचाही सुविधाएँ देगी। सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि कंपनियों को ऐसी सारी सहूलियतें मिलें, जो वहाँ भी मिलती थीं। इस बैठक में फेडएक्स (FedEx), UPS, सिस्को, एडोब, लॉकहीड मार्टिन, हनीवेल, बोस्टन साइंटिफिक जैसी बड़ी अमेरिकी कंपनियों के बड़े अधिकारी शामिल थे। ग्रेटर नोएडा में जेवर एयरपोर्ट बनने से नोएडा, ग्रेटर नोएडा से लेकर बुलंदशहर, मथुरा, अलीगढ़ और आगरा तक के इलाके उद्योगों के निवेश के हिसाब से बेहद उपयुक्त बन गए हैं। यह भी पढ़ें: जानिए अमेरिका को मलेरिया की दवा देकर भारत ने बदले में क्या लिया?

अमेरिकी बाज़ार भी उम्मीद से हैं

कोरोनावायरस से मची तबाही के बीच अमेरिकी शेयर बाज़ारों में भी लगातार तेज़ी का रुख़ है। बीते गुरुवार को S&P 500 सूचकांक में 23 मार्च के सबसे निचले स्तर के मुकाबले 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी रिकॉर्ड की गई। अमेरिकी बाजारों के जानकारों का भी यही कहना है कि कोरोनावायरस के कारण दुनिया एक नए दौर में प्रवेश कर रही है। बहुत सारी कंपनियों का निवेश वापस अमेरिका की तरफ मुड़ेगा, जबकि कई कंपनियां भारत जैसे उन देशों में पैसा लगाएंगी जो अमेरिका के लिए अनुकूल हैं।

(आशीष कुमार की रिपोर्ट)

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