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इरफ़ान खान के पिता ने क्यों कहा था- “पठान के घर ब्राह्मण पैदा हुआ है”

अभिनेता इरफ़ान खान के निधन के बाद हर कोई उन्हें अपनी-अपनी तरह से याद कर रहा है, लेकिन इरफ़ान से जुड़ा एक ऐसा क़िस्सा भी है जिसे सुनकर यक़ीन करना मुश्किल होता है। दरअसल इरफ़ान खान मुसलमान परिवार में जन्म के बावजूद पूरी तरह से शाकाहारी थे। वो मांस-मछली से दूर रहते थे और खाने के लिए जानवरों की हत्या करने का खुलकर विरोध करते थे। उनका यह स्वभाव बचपन से ही था। जिसके कारण उनके पिता अक्सर मज़ाक़ में कहा करते थे कि पठान के घर में ब्राह्मण पैदा हो गया है। इरफ़ान खान का परिवार राजस्थान के टोंक ज़िले का रहने वाला था। उनका जन्म जयपुर में हुआ था। पूरा नाम साहबजादे इरफान अली खान था। पिता जागीरदार खान टायर का व्यापार करते थे। इरफ़ान ने मांसाहार से अपनी नापसंदगी कभी छिपाई नहीं। वो खुलकर जानवरों की हत्या का विरोध करते थे। इरफ़ान इस्लाम की कुरीतियों के ख़िलाफ़ भी बोलते थे, जिसके कारण अक्सर वो कट्टरपंथियों के निशाने पर रहे। यह भी पढ़ें: जब इरफ़ान ने कहा था- मौलवियों मुझे डराओ मत, भारतीय होने पर गर्व है

जानवरों की हत्या से होते थे दुखी

इरफ़ान ने कई बार मीडिया से बातचीत में ख़ुद बताया है कि कैसे बचपन में वो बक़रीद के मौक़े पर जानवरों की हत्या देखकर रो पड़ते थे। उनके पिता को शिकार का शौक़ था। जब उन्होंने बेटे को साथ लेकर जाना चाहा तो इरफ़ान ने साफ़ मना कर दिया। वो अपने पिता से पूछा करते थे कि आपने जिस जानवर को मार दिया उसके बच्चे आज क्या खाएँगे? वो रो रहे होंगे। इरफ़ान की ऐसी बातें सुनकर उनके परिवार के लोग हैरान रह जाते थे, क्योंकि पूरे घर में या दोस्तों में ऐसा कोई नहीं था जो उनके दिमाग़ में ऐसी बातें डाल सके। इरफ़ान बताया करते थे कि कैसे बचपन में परिवारवाले और दोस्त-मित्र उन्हें मांसाहार के लिए उकसाया करते थे। जब वो इन्हें खाने से मना कर देते थे तो उनका मज़ाक़ उड़ाया जाता था। इसके बावजूद उन्होंने कभी मीट को हाथ नहीं लगाया। उनकी यह आदत हमेशा बनी रही। यह भी पढ़ें: इरफ़ान खान के वो 5 बयान, जिनसे कट्टरपंथियों को मिर्ची लग गई

हिंदू लाइफ़स्टाइल में रहे इरफ़ान

इरफ़ान की सही मायनों में सेकुलर थे। वो मुसलमान परिवार में पैदा हुए और पूरे जीवन मुसलमान ही रहे। लेकिन उनकी जीवनशैली वैसी नहीं थी जैसी मुसलमानों से उम्मीद की जाती है। वो इस्लाम की कुरीतियों का खुलकर विरोध करते थे। बक़रीद, मुहर्रम और रमज़ान तक के रिवाजों के ख़िलाफ़ वो खुलकर बोला करते थे। उन्होंने शादी भी एक हिंदू लड़की सुतपा सिकदर से की थी। उनके दो बेटे बाबिल और अयान हैं। किसी मज़हबी मुसलमान के बजाय उन्होंने सही अर्थों में एक लिबरल का जीवन जिया। एनएसडी में इरफान के एडमिशन के कुछ समय बाद ही उनके पिता का निधन हो गया था। इसके बाद उन्हें घर से मिलने वाले पैसे भी बंद हो गए थे। एनएसडी की फेलोशिप के जरिए उन्होंने किसी तरह पढ़ाई पूरी की। उस मुश्किल दौर में इरफान की क्लासमेट सुतापा सिकदर ने उनका साथ दिया था। जो आगे चलकर उनकी पत्नी बनीं।

सलाम बॉम्बे से किया था डेब्यू

इरफ़ान ख़ान ने अपने फ़िल्मी करियर की शुरुआत इंटरनेशल फ़िल्म से की थी। उनकी पहली फ़िल्म ‘सलाम बॉम्बे’ थी जिसको ऑस्कर के लिए नॉमिनेशन भी मिला था। उस समय इरफ़ान ख़ान एनएसडी में अंतिम वर्ष की पढ़ाई कर रहे थे। इरफ़ान की आखिरी फ़िल्म अंग्रेजी मीडियम रही। यह फ़िल्म इस साल लॉकडाउन से पहले सिनेमाघरों में उतरी। इसके बाद में इसे डिज़वी प्लस हॉटस्टार पर स्ट्रीम किया गया। बीमारी की वजह से इरफ़ान ख़ाान इस फ़िल्म की प्रमोशन में भी शामिल नहीं हुए। इरफ़ान ख़ान कभी क्रिकेट बनना चाहते थे। हालांकि, इस पर उनके पिता राजी नहीं हुए। इसके बाद उन्होंने नेशलन स्कूल ऑफ ड्रामा में एडमिशन लिया। मुंबई में इरफ़ान ने एक लंबा संघर्ष किया।

(न्यूज़लूज़ टीम)

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