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जब इरफ़ान खान ने कहा था “मौलवियों मुझे डराओ मत, भारतीयता पर गर्व है”

साभार- इंडियन एक्सप्रेस

मशहूर फ़िल्म अभिनेता इरफ़ान खान का निधन हो गया है। 53 साल की उम्र में उन्होंने मुंबई के अस्पताल में आख़िरी सांस ली। 2018 में इरफ़ान के शरीर में एक बहुत ही दुर्लभ क़िस्म के कैंसर का पता चला था। उसके बाद इलाज के लिए वो लंदन गए थे। लंबे इलाज के बाद वहाँ से लौटकर उन्होंने थोड़ा-बहुत काम भी किया। लेकिन समस्या बनी रही। इरफ़ान वो अभिनेता हैं जो अपनी एक्टिंग के अलावा अपनी मानवता के लिए भी हमेशा याद किए जाएँगे। अपने इसी गुण के कारण 2016 में इरफ़ान मुस्लिम कट्टरपंथियों के निशाने पर आ गए थे। तब उन्होंने बक़रीद के मौक़े पर जानवरों की क़ुर्बानी का खुलकर विरोध किया था। तमाम दबावों के बावजूद अपने बयान से वो कभी पीछे नहीं हटे। इरफ़ान खान मुसलमान होने के बावजूद मांसाहारी नहीं थे। उन्होंने एक बार ख़ुद ही बताया था कि बचपन में उनके परिवार वाले कहते थे कि मुसलमानों के घर में पंडित ने जन्म ले लिया है। इरफ़ान का जन्म राजस्थान के जयपुर में 7 जनवरी 1967 को हुआ था। यह भी पढ़ें: जब इरफान खान के पिता ने कहा था- पठान के घर में ब्राह्मण पैदा हुआ है

बक़रीद और रोज़े के ख़िलाफ़ थे इरफ़ान

जुलाई 2016 में इरफ़ान खान ने मीडिया से बातचीत में कहा था कि “बकरीद पर बकरे की कुर्बानी बंद होनी चाहिए। कुर्बानी तो अपनी सबसे प्यारी चीज की होती है। ये क्या बात हुई कि बाजार से दो बकरे खरीदकर लाए उन्हें काट दिया और कहने लगे कि हमने खुदा की खुशी के लिए इनकी जान ले ली। किसी दूसरे जानवर को मारकर किसी इंसान को कैसे पुण्य मिल सकता है?” उन्होंने यह भी कहा था कि “भूखे रहना रोजा नहीं बोता, बल्कि असली मकसद अपने अंदर झांकना है।” इरफ़ान ने मुहर्रम को भी सर्कस कहा था। इस बयान के बाद भारत के कट्टरपंथी मुसलमान और सेकुलर हिंदू उनकी जान के दुश्मन बन गए थे। आमिर खान जैसे लोग जो हिंदुओं की कुरीतियों को लेकर फ़िल्म बना चुके हैं उन्होंने भी इरफ़ान खान के समर्थन में कुछ नहीं बोला। जावेद अख़्तर और ऐसे तमाम तथाकथित प्रगतिशील मुसलमानों ने इरफ़ान को तब बिल्कुल अकेला छोड़ दिया था। इरफ़ान कई बार यह भी कह चुके थे कि भारतीय मुसलमानों को आतंकवाद के ख़िलाफ़ आवाज़ उठानी चाहिए, क्योंकि आतंकवादी इस्लाम के नाम पर ही पैदा हो रहे हैं। पढ़ें पूरी ख़बर: इरफ़ान खान के वो 5 बयान जिनसे कट्टरपंथियों को मिर्ची लग गई

हमेशा मुस्लिम कट्टरपंथियों के निशाने पर

बक़रीद और आतंकवाद जैसे मुद्दों पर अपनी बेबाक़ राय के बाद इरफ़ान खान हमेशा कट्टरपंथियों को खटकते रहे। यहाँ तक कि 2018 में जब उन्हें कैंसर होने की ख़बर आई थी तो कई मुसलमानों ने सोशल मीडिया पर लिखा था कि इस्लाम के ख़िलाफ़ बोलने के कारण खुदा ने उन्हें सज़ा दी है। हालाँकि वो कभी इन दबावों से प्रभावित नहीं हुए। ट्विटर के ज़रिए उन्होंने अपनी राय बार-बार खुलकर जताई। उन्होंने हमेशा इस्लाम की बुराइयों के ख़िलाफ़ अपनी बात बिना डरे हुए कही। जब उन्हें लगातार धमकियाँ मिल रही थीं तब इरफ़ान ने ट्वीट करके कहा था कि “प्लीज भाइयों, आप जो मेरे बयान से दुखी हो, या तो आप आत्मचिंतन करने को तैयार नहीं हो या आप बिना सोचे-समझे नतीजे पर पहुंच जाने की हड़बड़ी में हो। मेरे लिए धर्म का मतलब आत्मचिंतन है। इससे दया और बुद्धि प्राप्त होती है। इसका पोंगापंथी या कट्टरपंथ से कोई वास्ता नहीं। मौलवियों मुझे डराओ मत!!! मैं भगवान का शुक्र अदा करता हूं कि मैं ऐसे देश में नहीं रहता जिसे मज़हब के ठेकेदार चलाते हों।

इरफ़ान के निधन की जानकारी उनके मित्र और फ़िल्मकार शूजीत सरकार ने ट्वीट करके दी।

कट्टरपंथियों के ख़िलाफ़ इतने बेबाक़ विचारों का ही नतीजा था कि भारतीय मीडिया ने इरफ़ान खान का कभी साथ नहीं दिया। इस्लाम के बारे में उनके बयानों को विवादित ठहरा दिया गया। कई अख़बारों और चैनलों ने यहाँ तक भी अफ़वाह उड़ाई कि वो ऐसा इसलिए बोल रहे हैं ताकि राजस्थान की तब की बीजेपी सरकार के ब्रांड एंबेसडर का पद बना रहे।

(न्यूज़लूज़ टीम)

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