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दवा कंपनी के मालिकों के मजहब पर झूठ फैला रहे हैं जिहादी पत्रकार

बायीं तस्वीर हबील खोराकीवाला की है, बीच में सबा नकवी और दायीं तरफ़ सिपला के यूसुफ़ हामिद

क्या सिपला और वॉकहार्ट जैसी भारतीय दवा कंपनियों के मालिक मुसलमान हैं? ऐसा दावा कुछ जिहादी पत्रकारों ने किया है। कांग्रेस की करीबी मानी जाने वाली पत्रकार सबा नकवी का एक वीडियो (देखें नीचे) सामने आया है जिसमें वो दावा कर रही हैं कि देशभर में मुस्लिम फल-सब्जीवालों से लोग सामान नहीं ख़रीद रहे। उन्होंने गुजरात की उस खबर पर भी नाराजगी जताई जिसमें बताया गया था कि अस्पताल में कोरोना वायरस के हिंदू और मुस्लिम मरीजों को अलग-अलग रखा जा रहा है। बाद में यह खबर गलत साबित हुई थी। इन्हीं दोनों मामलों को उछालते हुए दवा कंपनियों के मालिकों का मजहब बताया जा रहा है। सबा नकवी ही नहीं, शाहिद सिद्धिकी नाम के जिहादी पत्रकार ने भी दावा किया है कि सिपला और वॉकहार्ट जैसी दवा कंपनियों के मालिक मुसलमान हैं। दरअसल ये दावे इसलिए किए जा रहे हैं ताकि डॉक्टरों पर हमले और थूकने जैसी घटनाओं को सही ठहराया जा सके। जानिए क्या है इन दावों का सच:

सिपला के यूसुफ़ हमीद

दावा किया जा रहा है कि दवा कंपनी सिपला के मालिक यूसुफ़ के हामिद मुसलमान हैं। जबकि ख़ुद यूसुफ़ हामिद ऐसा नहीं मानते। दरअसल यूसुफ़ हामिद की माँ यहूदी थीं और उनके पिता मुसलमान। उनके पिता ख़्वाजा अब्दुल हमीद अलीगढ़ में पैदा हुए थे। बाद में उनका इस्लाम से मोहभंग हो गया था। मुस्लिम लीग ने जब अलग मुस्लिम देश माँगा तो उन्होंने इसका खुलकर विरोध किया था। 1928 में ख़्वाजा अब्दुल हमीद ने लिथुआनिया की रहने वाली यहूदी Luba Derczanska से एक Synagogue (यहूदी मंदिर) में शादी कर ली। मां लुबा की याद में यूसुफ हामिद ने ठाणे के शार यहूदी मंदिर में एक पत्थर भी लगवाया है। इसकी तस्वीर आप इसी पेज में नीचे देख सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय न्यूज़ पोर्टल क्वार्ट्ज़ में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, “1992 में मुंबई दंगों के समय टाइम्स ऑफ इंडिया के संपादक ने यूसुफ हामिद को फोन करके एक भारतीय मुस्लिम हस्ती के तौर पर उनकी राय मांगी थी। इस पर यूसुफ हामिद ने जवाब दिया था कि आप मुझसे ये सवाल भारतीय यहूदी के नाते क्यों नहीं पूछते? क्या सिर्फ इसलिए क्योंकि मेरे नाम में हामिद है? मेरी मां यहूदी थीं।”

वॉकहार्ट के हबील खोराकीवाला

देश की सबसे बड़ी दवा कंपनियों में से एक वॉकहार्ट (Wockhardt) के चेयरमैन हबील खोराकीवाला बेशक मुसलमान हैं, लेकिन वो दाऊदी वोहरा हैं। ये गुजरात का कारोबारी समुदाय है जिन्हें सुन्नी और शिया मुसलमान नहीं मानते। दाऊदी वोहरा समुदाय के लोग बेहद शांत प्रकृति के होते हैं और जहां भी होते हैं वहां की तरक्की में अपना योगदान देते हैं। सवाल यह भी खड़ा होता है कि क्या सबा नकवी दाऊदी वोहरा समुदाय के लोगों को मुसलमान मानने को तैयार हैं? फिलहाल महाराष्ट्र में वॉकहार्ट के कई अस्पताल कोरोना वायरस संक्रमण के कारण बद करने पड़े हैं, क्योंकि किसी मरीज या डॉक्टर ने जानकारी छिपाकर बीमारी फैला दी। फिलहाल वॉकहार्ट कंपनी मुश्किल दौर में चल रही है। कुछ समय पहले ही डॉक्टर रेड्डीज़ ने इसके कारोबार का बड़ा हिस्सा खरीद लिया है।

बाकी नामों की सच्चाई

यूसुफ़ हामिद और हबील खोराकीवाला ही नहीं, अज़ीम प्रेमजी और शाहरुख़ खान के मुसमान होने का भी वास्ता दिया जा रहा है। देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनियों में से एक विप्रो के प्रमुख अज़ीम प्रेमजी सामाजिक कार्यों के लिए संपत्ति के दान के लिए भी जाने जाते हैं। उद्योग जगत में उनकी एक ख़ास पहचान है। लेकिन सबा नकवी ने जिस अंदाज में उन्हें मुसलमान ठहराया उससे कई सवाल पैदा होते हैं। क्योंकि अजीम प्रेमजी ने आज तक कभी अपनी मज़हबी पहचान का इस्तेमाल अपने कारोबार में नहीं किया। वो गुजरात के उसी खोजा समुदाय से आते हैं जिसका मोहम्मद अली जिन्ना भी हुआ करता था। ये लोग शिया मुसलमान होते हैं। सुन्नी मुसलमान इन्हें घृणा की नज़र से देखते हैं। कोरोना वायरस फैलने पर कई सुन्नी मौलवियों ने शुरू में यह दावा भी किया था कि ये वायरस सिर्फ़ हिंदुओं, ईसाइयों और शियाओं को मारेगा।

यह सवाल भी पूछा जा रहा है कि क्या 130 करोड़ आबादी वाले भारत में सबा नकवी को सिर्फ़ 3 ‘मुस्लिम कारोबारी’ मिले, जिनकी धौंस देकर वो तब्लीगी जमात के लोगों और थूक लगाकर फल-सब्जियां बेचने वालों को सही ठहरा सकें? नीचे आप सबा नकवी का वो वीडियो देख सकते हैं, जिसमें उन्होंने इन तीनों उद्योगपतियों के नाम पर पूरे देश की छवि को दाग़दार करने की कोशिश की है।

ठाणे के यहूदी उपासना स्थल में यूसुफ़ हामिद का अपनी माँ की याद में लगाया ये पत्थर देखा जा सकता है।

(न्यूज़लूज़ टीम)

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