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लॉकडाउन की ‘तपस्या’ के बाद भारत के लिए सुनहरे भविष्य का अवसर

ऐसे समय में जब पूरा देश और दुनिया लॉकडाउन में अपने घरों या इलाक़ों में बंद है हर किसी के मन में यह प्रश्न है कि आगे क्या होगा? क्या देश इस संकट से उबर पाएगा या भविष्य अंधकारमय होने वाला है? विश्व की तमाम आर्थिक संस्थाएँ इसका अनुमान लगाने में जुटी हैं। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (International Monetary Fund IMF) के मुताबिक इस साल यानी 2020 में भारत की विकास दर 1.9 फीसदी तक गिर सकती है। जबकि चीन की विकास दर भारत से भी नीचे 1.2 पर हो सकती है। अमेरिका और तमाम यूरोपीय देशों की विकास दर तो नकारात्मक यानी नेगेटिव होने का अनुमान जताया गया है। जानकारों की राय में दुनिया अब जिस स्थिति में पहुंच चुकी है वहां से आगे बढ़ने के सबसे अच्छे अवसर भारत के पास हैं। क्योंकि दुनिया के अग्रणी देशों में अब तक भारत ही है जहां पर कोरोनावायरस के कारण उतनी तबाही नहीं हुई है, जितनी चीन, अमेरिका और यूरोपीय देशों में।

चीन के विकल्प की तलाश शुरू

हार्वर्ड बिज़नेस स्कूल के एक सेमीनार में दुनिया भर के हालात पर चर्चा में यह बात उभरकर आई कि आने वाले समय में भारत के लिए सबसे बेहतर संभावनाएँ हैं। क्योंकि कोरोनावायरस की महामारी ने दुनिया भर में चीन की विश्वसनीयता को गहरा आघात पहुँचाया है। अमेरिकी ही नहीं, पश्चिमी देशों की तमाम कंपनियाँ अब चीन से अपनी मैनुफ़ैक्चरिंग यूनिट्स को या तो पूरी तरह या आधे हिस्से को किसी दूसरे देश में शिफ़्ट करने पर विचार कर रही हैं। चीन ही नहीं, जापान के लिए भी यह मुश्किल समय है। जहां पर बरसों से काम कर रही कई जापानी और बाहरी कंपनियाँ अब निवेश के लिए भारत की तरफ़ देख रही हैं। उनके सामने सॉफ़्टवेयर इंडस्ट्री एक उदाहरण की तरह है जिसमें भारत लगातार उम्मीदों पर खरा उतरा है। बीते 5-6 साल में पूरे भारत में बुनियादी ढाँचे जैसे सड़कों, बिजली, पानी वग़ैरह के क्षेत्र में हुए सुधार विदेशी कंपनियों के लिए भारत आने के लिए एक बड़ा आकर्षण हैं।

महामारी में मज़बूत देश की इमेज

कोरोनावायरस महामारी से निपटने में भारत की छवि एक गंभीर देश की बनी है। भारत ने न सिर्फ़ ख़ुद को इस महामारी से बेहतर तरीक़े से बचाया, बल्कि पास-पड़ोस और दुनिया भर के देशों की सहायता की। इससे पहली बार दुनिया को भारत के दवा उद्योग की ताक़त का पता चला। क्योंकि अब तक अमेरिका की एकाधिकार वाली नीतियों के कारण भारतीय दवा कंपनियों को ज़्यादातर अमेरिकी और यूरोपीय बाज़ारों में घुसने का मौक़ा ही नहीं मिलता था। लेकिन कोरोना वायरस में कारगर मलेरिया की दवा के बदले भारत सरकार ने अमेरिकी बाज़ारों को खुलवाने में कामयाबी हासिल की है। इससे दवा और मेडिकल सर्विसेज़ के मामले में भारत एक बड़ी महाशक्ति के तौर पर उभरता दिखाई दे रहा है।

लॉकडाउन के बाद की रणनीति पर काम

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ सरकार ने लॉकडाउन खत्म होने के बाद की आर्थिक रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। ऐसी उम्मीद है कि मौजूदा स्थिति खत्म होते ही सरकार कुछ प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के लिए स्टिमुलस पैकेज (प्रोत्साहन) की घोषणा करेगी। ताकि उन क्षेत्रों में निवेश और उत्पादन बढ़ाने पर फोकस किया जा सके। इनमें मैनुफैक्चरिंग यानी विनिर्माण क्षेत्र को प्राथमिकता होगी। दरअसल ये वो क्षेत्र था जिसमें पिछले 5-6 साल में तमाम कोशिशों के बावजूद भारत को उम्मीद के मुताबिक कामयाबी नहीं मिल रही थी। इसका सबसे बड़ा कारण चीन से मिल रही प्रतियोगिता को माना जाता है। लेकिन बदलते हालात में चीन की बढ़त काफी हद तक खत्म हो चुकी है। जाहिर है भारत के लिए ये भविष्य के लिए मौका हो सकता है। यही कारण है कि भारत सरकार का पूरा जोर किसी तरह लॉकडाउन की स्थिति से बाहर निकलने पर है।

(न्यूज़लूज़ टीम)

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