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जानिए अमेरिका को मलेरिया की दवा देकर बदले में भारत ने क्या लिया

कोरोना वायरस के बढ़ते संकट के बीच भारत ने अमेरिका को हाइड्रोक्लोरोक्वीन (HCQ) नाम की दवा की सप्लाई शुरू कर दी है। इसे लेकर कई विवाद भी हैं। कहा गया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस दवा के लिए भारत को धमकी दी। हालाँकि ये दावा सरासर झूठ साबित हुआ। लेकिन यह सवाल बना हुआ है कि ऐसे समय में जब इस महामारी का साया भारत पर भी मंडरा रहा है भारत ने दवा अमेरिका को क्यों दी? और बदले में भारत को क्या मिला? इस सवाल का जवाब आगे हम आपको देंगे। पहले हम आपको बता दें कि हाइड्रोक्लोरोक्वीन दरअसल कोरोनावायरस का इलाज नहीं करती। यह दवा सिर्फ उन डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ को दी जाती है जो मरीजों का इलाज करते हैं। भारत में हाइड्रोक्लोरोक्वीन बड़ी मात्रा में बनती है। जैसे ही यह स्टडी सामने आई थी भारत सरकार ने इसके निर्यात पर रोक लगा दी थी। लिहाजा भारत में इस दवा का बड़ा स्टॉक मौजूद है और उत्पादन का काम भी तेजी से चल रहा है। अब अमेरिका ही नहीं, दुनिया के कई देश भारत के आगे हाथ फैलाए खड़े हैं कि वो यह दवा उन्हें दे दे। यह भी पढ़ें: 70 साल में मलेरिया खत्म नहीं करने का क्रेडिट चाहती है कांग्रेस

दवा के बदले भारत ने रखी 3 शर्तें

दरअसल भारत की दवा कंपनियों पर अमेरिकी फ़ूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन यानी US-FDA तमाम तरह की पाबंदियां लगा रखी हैं ताकि भारतीय कंपनियां वहां पर घुसने न पाएं। अमेरिका बड़ा बाजार है, लिहाजा भारत लंबे समय से अमेरिका से मांग करता रहा है कि वो ये पाबंदियां हटाए। पीएम मोदी ने इसमें कुछ हद तक कामयाबी पाई भी, जिसके बाद अमेरिका ने कुछ भारतीय कंपनियों की दवाओं को अपने यहां एंट्री दे दी। लेकिन जब अमेरिका ने HCQ की मांग की तो यही पाबंदी आड़े आ गई। सरकारी सूत्रों के मुताबिक भारत ने अमेरिका के आगे कुल 3 शर्तें रखीं। पहली यह कि भारतीय दवा कंपनियों के लिए अमेरिका अपना बाजार खोले। दूसरी यह कि FDA की सारी पाबंदियां हटें और तीसरी यह कि आगे भी भारतीय दवा कंपनियों को अमेरिका में तंग नहीं किया जाएगा। अमेरिकी सरकार ने फौरन तीनों मांगों पर सहमति दे दी और भारत ने दवा भेजने का काम शुरू कर दिया। चूंकि यह अनौपचारिक डील थी, इसलिए दोनों ही देशों ने इस बारे में कोई बयान जारी नहीं किया। यह भी पढ़ें: चीन के लोग सांप, चमगादड़ और चूहे क्यों खाते हैं, जानिए कारण

दवा कंपनियों से पाबंदी हटनी शुरू

अकेले गुरुवार को कुल 5 बड़ी देसी दवा कंपनियों ने शेयर बाज़ार को सूचित किया कि उन पर अमेरिकी FDA की रोक हट गई है। ये कंपनियां हैं- सिपला, अजंता फार्मा, अरबिंदो फार्मा, जाइडस कैडिला और ग्रैन्यूल्स इंडिया। इनके अलावा डॉक्टर रेड्डीज लैब्स, एलेंबिक, ग्लेनमार्क, ल्यूपिन फार्मा, IPCA लैब्स और कुछ अन्य कंपनियों को अनुमति देने की प्रक्रिया या तो चल रही है या शुरू कर दी गई है। आने वाले हफ्तों में कई अन्य कंपनियों को अमेरिकी बाजार में एंट्री मिलने के आसार हैं। इसी का नतीजा है कि बीते पूरे सप्ताह शेयर बाजार में फार्मा कंपनियों के शेयरों में भारी उछाल देखने को मिला। निफ्टी का फार्मा इंडेक्स इस सप्ताह 19 फीसदी से अधिक चढ़ा है। करीब एक दशक में यह पहली बार हो रहा है जब दवा कंपनियों के शेयरों में इतनी तेजी देखी जा रही है। भारतीय दवा कंपनियों के लिए यह बड़ी कामयाबी है क्योंकि उन्हें एक बहुत बड़ा बाजार मिल गया है, जिसका उन्हें लंबे समय से इंतजार था। साथ ही हाइड्रोक्लोरोक्वीन को भारत बाजार दर पर अमेरिका समेत दुनिया के कई देशों को बेच रहा है, जिससे विदेशी मुद्रा का फायदा हो रहा है।

(न्यूज़लूज़ टीम)

संदर्भ:

1. https://www.moneycontrol.com/news/business/stocks/cipla-share-price-hits-52-week-high-on-final-approval-from-us-fda-5125071.html
2. https://www.moneycontrol.com/news/business/stocks/ajanta-pharma-share-price-jumps-8-on-us-fda-nod-for-cholesterol-drug-5125061.html
3. https://business.medicaldialogues.in/pharma-news/aurobindo-pharma-gets-usfda-approval-for-fluoxetine-tablets-64719?utm_campaign=pubshare&utm_source=Twitter&utm_medium=3246541758&utm_content=scheduled-link&utm_id=140
4. https://www.business-standard.com/article/markets/cadila-healthcare-soars-31-in-2-days-on-usfda-nod-for-perphenazine-tablets-120040800212_1.html
5. https://www.reuters.com/article/brief-granules-india-says-us-fda-approve/brief-granules-india-says-u-s-fda-approves-abbreviated-new-drug-application-filed-by-unit-idUSFWN2BW1Y3
6. https://www.equitybulls.com/admin/news2006/news_det.asp?id=265174

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