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‘कोरोना जमात’ के बचाव में आई केजरीवाल सरकार, कहा- भाषा के कारण दिक़्क़त

कोरोना वायरस के नाम पर यूपी बिहार के लाखों लोगों को दिल्ली से खदेड़ने वाली अरविंद केजरीवाल सरकार ने अब खुलकर तबलीगी जमात का बचाव शुरू कर दिया है। अब तक इस मामले में बचाव में दिख रहे अरविंद केजरीवाल ने अपने मंत्री सत्येंद्र जैन को आगे किया है। केजरीवाल सरकार में स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने दलील दी है कि जमात के लोगों को हिंदी या अंग्रेज़ी भाषा नहीं आती इसके कारण थोड़ी-बहुत दिक़्क़त है। उनसे ग़ाज़ियाबाद के अस्पताल में नर्सों के साथ अश्लील हरकतों पर सवाल पूछा गया था। लेकिन मंत्री जी छिछोरे मौलवियों के बचाव में ही उतर आए। अब सवाल उठ रहा है कि क्या किसी को भाषा नहीं आएगी तो वो पैंट उतार देगा? या भाषा नहीं आने पर थूकना सामान्य बात है? या फिर भाषा नहीं आने पर अश्लील गाने सुनने का मन करने लगता है? महिलाओं के मामले में केजरीवाल सरकार का पुराना रिकॉर्ड बहुत खराब रहा है। खुद केजरीवाल के मंत्री भी यौन शोषण में रंगे हाथ पकड़े जा चुके हैं।

किसको बचा रहे हैं केजरीवाल?

दरअसल यह बात सामने आ रही है कि निज़ामुद्दीन मरकज़ में जो जलसा चल रहा था वो पूरी तरह से दिल्ली सरकार की जानकारी में था। इतना ही नहीं आम आदमी पार्टी के कई सक्रिय कार्यकर्ता भी उसमें जुटे हुए थे। पुलिस और केंद्र सरकार की दखल के बाद मरकज़ को ख़ाली तो करा लिया गया, लेकिन इस मामले में उनकी पार्टी लगातार बुरी तरह से घिरी हुई है। दूसरी तरफ़ केजरीवाल सरकार पर इन मौलवियों को बचाने का भी दबाव है, क्योंकि ये वो इलाक़ा है जहां पर केजरीवाल का मुस्लिम वोट बैंक भारी संख्या में है। यही कारण है कि वो लगातार इस मामले पर चुप्पी साधे हुए हैं। दिल्ली सरकार की तरफ़ से अभी तक इस इतने गंभीर मामले पर ज़्यादा कुछ नहीं कहा गया है। जबकि देखा जाए तो यह दिल्ली सरकार की ज़िम्मेदारी थी कि लॉकडाउन के एलान के बाद मरकज़ में इतनी बड़ी संख्या में लोग न रहने पाएं। यह ख़बर भी है कि मरकज़ के मुखिया मौलाना साद ने चुनाव में आम आदमी पार्टी को भारी मदद दी थी।

अमानतुल्ला खान को किया आगे

अरविंद केजरीवाल इस मामले में किस हद तक परेशान हैं ये इसी से पता चलता है कि सत्येंद्र जैन से दो दिन पहले से उन्होंने अपने कट्टरपंथी विधायक अमानतुल्लाह खान को आगे कर रखा है। अमानतुल्ला खान ने तो खुलकर मौलाना साद के बचाव में ट्वीट किया और उसकी पोल खोलने वाले आरिफ़ मोहम्मद खान और मुख़्तार अब्बास नकवी के लिए गाली-गलौज की भाषा का इस्तेमाल किया। लेकिन अपने ट्वीट में अमानतुल्ला ने यह माना कि उसे 23 मार्च को ही पता चल चुका था कि मरकज़ में ढाई हज़ार लोग रह रहे हैं। उसने पुलिस और डीएम पर सवाल उठाए, लेकिन डीएम तो दिल्ली सरकार का अधिकारी होता है। फिर भी अमानुतल्ला चाहते तो सीधे सीएम से बात करके लोगों को निकलवा सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। फ़िलहाल अब वो वही भाषा बोल रहे हैं जो इस जिहादी जमात के लोग बोल रहे हैं।

कोरोना पर केजरीवाल का गेम

इस बात की पुष्टि हो चुकी है कि देश में कोरोना वायरस के अब तक के मामलों में सबसे बड़ा योगदान तबलीगी जमात का ही है। दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने बताया था कि निजामुद्दीन के तबलीगी जमात के मरकज से कुल 2361 लोगों को निकाला गया था। ये सभी दिल्ली और आसपास के अलग-अलग अस्पतालों में क्वारंटाइन में रखे गए हैं। हालत यह है कि बीते दो दिनों में देश के 14 राज्यों में 647 कोरोना वायरस संक्रमण के ऐसे मामलों की पुष्टि हुई है जो मरकज से जुड़े हैं। ये राज्य हैं- अंडमान और निकोबार, असम, दिल्ली, हिमाचल, हरियाणा, जम्मू कश्मीर, झारखंड, कर्नाटक, महाराष्ट्र, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश।

(न्यूज़लूज़ टीम)

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