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‘कोरोना जिहाद’ का रहस्य गहराया, देशभर में मिले हैं ‘चाइनीज़ मौलवी’

देश भर की मस्जिदों में चीन और दूसरे देशों के मौलवियों की धरपकड़ जारी है। ताज़ा मामला दिल्ली, मेरठ और राँची का है, जहां बड़ी संख्या में विदेशी मौलवियों को पकड़ा गया है। इनमें से कुछ को कोरोना वायरस संक्रमण की आशंका है लिहाज़ा उन्हें अस्पतालों में भर्ती भी कराया गया है। सबसे सनसनीखेज मामला दिल्ली का है, जहां निजामुद्दीन इलाके में कोरोना वायरस के 200 संदिग्ध रोगी पकड़े गए। ये सभी तब्लिगी जमात से संबंध रखते हैं। तब्लिगी जमात मुसलमानों की एक संस्था है जो इस्लाम का प्रचार करती है। जो लोग पकड़े गए उनमें चीन, सऊदी अरब और ब्रिटेन जैसे देशों के मौलवी शामिल हैं। ये सभी महामारी से प्रभावित इलाके हैं। माना जा रहा है कि इन्होंने अलग-अलग राज्यों में हजार से ज्यादा लोगों को यह बीमारी बांटी है। दिल्ली के अलावा मेरठ और रांची से भी विदेशी मौलवियों को पकड़ा गया है। पिछले कुछ समय से देश के कई शहरों से चीन और आसपास के देशों के मौलवी बरामद किए गए। कई लोग इसे कोरोना वायरस महामारी के साथ जोड़कर देख रहे हैं। शुरुआती पूछताछ यह बात भी सामने आ रही है कि पांच वक्त नमाज पढ़ने से कोरोना वायरस नहीं होने की अफवाह पीछे भी इन मौलवियों का बड़ा हाथ है। लिहाजा ये मामला अब रहस्यमय होता जा रहा है।

दिल्ली के निज़ामुद्दीन में बड़ा भंडाफोड़

दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में तब्लीगी जमात के मरकज से 10 से अधिक देशों के नागरिकों समेत 200 मौलवी पकड़े गए। इन सभी को अलग-अलग अस्पतालों में जांच के लिए ले जाया गया। इनमें चीन, बांग्लादेश, श्रीलंका, अफगानिस्तान, मलेशिया, सऊदी अरब और इंग्लैंड के करीब 100 विदेशी नागरिक शामिल है। इनमें से कई को बुख़ार भी था। सभी की जाँच कराई जा रही है। रविवार को तमिलनाडु में 64 साल के एक शख्स की मौत हो गई थी जो दिल्ली के इसी मरकज में रुका हुआ था। इसके अलावा तेलंगाना समेत कुछ अन्य राज्यों में क़रीब 10 मौतें हुई हैं, जो यहाँ से लौटे थे। दिक़्क़त यह है कि ये कट्टरपंथी मौलवी सहयोग भी नहीं कर रहे हैं। कई के अब भी चोरी-छिपे बीमारी बाँटने का शक जताया जा रहा है। आज जब कुछ संदिग्धों को बस से अस्पताल ले जाया जा रहा था तब कई मौलवी डॉक्टरों पर थूकने की कोशिश कर रहे थे ताकि बीमारी फैला सकें। फ़िलहाल पुलिस ने आसपास के इलाके को पूरी तरह सील कर दिया है। मरकज से कुछ दूरी पर निजामुद्दीन औलिया की दरगाह है, उसे भी बंद कर दिया गया है।

मेरठ, राँची भी मौलवियों की धरपकड़

झारखंड की राजधानी रांची के हिंदपीढ़ी की मस्जिद से पुलिस ने 24 मौलवियों को हिरासत में लिया है। इनमें मलेशिया, वेस्टइंडीज़ और पोलैंड के मौलवी हैं। इनमें से एक में कोरोना वायरस की पुष्टि हो गई है। कुछ दिन पहले भी यहीं पर क़रीब एक दर्जन विदेशी मौलवी पकड़े गए थे। इन सभी को अलग रखा गया है। पुलिस उनसे यहाँ आने का कारण और उनकी गतिविधियों के बारे में पूछताछ कर रही है। यह बात सामने आ रही है कि ये सभी जनवरी से ही यहाँ पर टिके हुए थे। इसके अलावा यूपी में मेरठ जिले की दो मस्जिदों में 19 विदेशी नागरिकों के मिलने के बाद हड़कंप मच गया। ये विदेशी तब्लिगी जमात के संग 17 और 21 मार्च को मेरठ पहुंचे थे। ये सभी इंडोनेशिया, केन्या, सूडान और जिबूती देशों के हैं। दोनों जगह मस्जिदों के बाहर ताला लगा दिया गया था और अंदर इन सभी को छिपाकर रखा गया था। कुछ दिन पहले ही बिहार, झारखंड और तमिलनाडु के मस्जिदों में छिपे विदेशी मौलवियों की सूचना से हड़कंप मच गया था। इनमें से दो को कोरोना टेस्ट में पॉजिटिव पाया गया है। उनमें भी कई चाइनीज़ मौलवी शामिल थे।

दक्षिण भारत में भी हैं विदेशी मौलवी

तमिलनाडु के अंबुर, इरोड और सलेम से 38 मौलवियों को हिरासत में लिया गया है। इनमें 23 इंडोनेशिया, 8 म्यांमार और 7 थाईलैंड से हैं। इनमें से दो को कोरोना वायरस की जांच में पॉजिटिव पाया गया है। ये दोनों मामले इरोड ज़िले के हैं। यहाँ उन सड़कों को भी बंद कर दिया गया है, जहां से ये सभी गुजरे थे। पड़ोसी सलेम जिले में 11 इंडोनेशियाई नागरिकों को पकड़ा गया है। कहा जा रहा है कि हैदराबाद और बेंगलुरु की मस्जिदों में भी बड़ी संख्या में विदेशी मौलवी छिपे हो सकते हैं उन्हें भी पकड़ने की कोशिशें होनी चाहिए।

(न्यूज़लूज़ टीम)

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