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क्या चाइनीज़ वायरस फैलाने की ‘साज़िश’ का हिस्सा बन गए केजरीवाल

बायीं तस्वीर दिल्ली के आनंद विहार की है, जबकि दायीं तस्वीर वो है जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। इसमें केजरीवाल और चीन के राष्ट्रपति शी चिनपिंग के चेहरे को फोटोशॉप से जोड़ा गया है।

कोरोना वायरस को लेकर जिस तरह से दिल्ली से लाखों लोगों का पलायन हुआ है उसने दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल को पहले से भी ज़्यादा संदिग्ध बना दिया है। लगातार ऐसी जानकारियाँ सामने आ रही हैं जो इशारा करती हैं कि इस पलायन में राजनीतिक तंत्र का भी बड़ी सफाई से इस्तेमाल किया गया। पहले यह जानकारी सामने आई थी कि दिल्ली में झुग्गी-झोपड़ी के इलाक़ों और मज़दूरों की बस्तियों में दो दिन तक सरकार की तरफ़ से खाने-पीने की कोई ख़ास मदद नहीं की गई, जबकि केजरीवाल लगातार ट्वीट करके कह रहे थे कि दिल्ली सरकार 4 लाख लोगों को खाना खिला रही है। इसके बाद संगठित तरीक़े से एक अफ़वाह उड़ाई गई कि लॉकडाउन क़रीब 3 महीने तक रहेगा। इससे पहले से ही भूखे-प्यासे मज़दूरों में घबराहट पैदा हो गई। गुरुवार और शुक्रवार की रात दिल्ली के कई इलाक़ों में बाक़ायदा लाउडस्पीकर पर एलान कराया गया कि अगर लोग जाना चाहते हैं तो डीटीसी की बसें उन्हें आनंद विहार पर छोड़ देंगी, वहाँ से यूपी बिहार के शहरों में जाने के लिए बसें मिल जाएंगी। इसके कुछ वीडियो भी सामने आ रहे हैं। इसी के बाद दिल्ली के तमाम इलाक़ों से लोगों का हुजूम आनंद विहार की तरफ़ चल पड़ा। इन हालात के लिए कई लोग चीन की साजिश और केजरीवाल सरकार के संदिग्ध व्यवहार को दोषी मान रहे हैं। सोशल मीडिया के जरिए कई लोगों ने #ArrestKejriwal ट्रेंड कराकर गंभीर आरोप लगाए हैं। यह भी पढ़ें: “दिल्ली में घरों में बिजली काटी, हमें बसों में भरकर यूपी बॉर्डर पर छोड़ दिया गया”

पलायन के पीछे साज़िश के संकेत

अगर अफ़वाह किसी एक बस्ती में फैलती तो माना जा सकता था, लेकिन दिल्ली की लगभग सभी प्रवासी बस्तियों और झुग्गी-झोपड़ी वाले इलाक़ों में एक समय में एक साथ लाउडस्पीकरों के ज़रिए एलान कराया गया कि वो चाहें तो जा सकते हैं। ज़ाहिर है दिल्ली सरकार कहेगी कि उसने यह काम नहीं कराया, लेकिन जिस पैमाने पर बसें मुहैया कराई गईं, उससे समझना मुश्किल नहीं है कि यह काम दरअसल किसका है। एक तरफ़ दिल्ली से लाखों मज़दूरों को ले जाकर बॉर्डर पर छोड़ा जा रहा था, तो दूसरी तरफ़ केजरीवाल के ही एक करीबी विधायक राघव चड्ढा ने ट्वीट करके अफ़वाह उड़ाई कि आनंद विहार बॉर्डर पर यूपी पुलिस लोगों को दौड़ा-दौड़ाकर मार रही है। जबकि ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था। उल्टा वहाँ पर लोगों के खाने-पीने का इंतज़ाम किया जा रहा था, क्योंकि ज़्यादातर लोग 2-2 दिन से भूखे थे। सवाल उठ रहा है कि इस पूरी साज़िश के पीछे का मक़सद आख़िर क्या है?

दबाव बनाने के लिए रचा खेल

सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इस बात की आशंका जताई है कि एक बड़ी साज़िश के तहत भारत में भी इटली जैसे हालात पैदा करने की कोशिश चल रही है। इस खेल का मास्टरमाइंड कोई और नहीं बल्कि चीन ही है। यह बात हमेशा से सामने आती रही है कि चीन ने भारत के अंदर अपना एक बड़ा ख़ुफ़िया नेटवर्क खड़ा कर रखा है। ढेरों राजेनता, ब्यूरोक्रेट और पत्रकार इसका हिस्सा माने जाते हैं। इन सबका एक ही काम होता है चीन के हितों की रक्षा। ये वो लोग हैं जो बड़ी सफ़ाई से चीन के पक्ष में माहौल बनाते हैं। उदाहरण के तौर पर जब डोकलाम विवाद चल रहा था तो मीडिया के एक वर्ग ने फैलाना शुरू कर दिया था कि भारतीय सेना चीन के आगे टिक नहीं पाएगी। ऐसी ख़बरें अक्सर दबाव बनाने की रणनीति के तहत फैलाई जाती हैं ताकि सरकार पर जनता की तरफ़ से दबाव बने। अब कोरोना वायरस के मामले में भी चीन भारत के साथ ब्लैकमेल कर रहा है ताकि भारत मजबूरी में ही सही उसके ख़ेमे में रहे।

चीन की रणनीति को समझिए

दरअसल 24 मार्च को दिल्ली में चीन के राजदूत सुन वीडॉन्ग ने एक ट्वीट करके कहा कि “कोरोना वायरस के लिए चीन को ज़िम्मेदार ठहराने की अंतरराष्ट्रीय कोशिशों को स्वीकार नहीं किया जा सकता है। उम्मीद है भारत भी इन कोशिशों का विरोध करेगा।” यह ट्वीट अपने आप में भारत के लिए एक धमकी की तरह था, क्योंकि पिछले कुछ समय से भारत में ट्विटर और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर #ChineseVirus ट्रेंड कर रहा था और लोगों तक ये जानकारी पहुंचाई जा रही थी कि कैसे चीन सरकार ने झूठ बोलकर दुनिया भर में इस बीमारी को फैलने में मदद की। भारत सरकार से जुड़े कई अहम लोगों ने भी चाइनीज वायरस हैशटैग के साथ ट्वीट किए। चीनी राजदूत के ट्वीट के साथ ही देश में पत्रकारों की एक जमात चीन के बचाव में सामने आ गई। आउटलुक पत्रिका ने तो एक कदम आगे जाते हुए रिपोर्ट छापी, जिसमें धमकी की भाषा में कहा गया है कि “अगर ऐसा किया गया तो लंबी अवधि में भारत के हितों को नुकसान पहुंच सकता है।” समझना बहुत मुश्किल नहीं है कि यह भाषा दरअसल पत्रिका या उसके पत्रकार की नहीं, बल्कि चीन की थी। आउटलुक के अलावा एनडीटीवी, द क्विंट, द प्रिंट जैसे कुछ और मीडिया संस्थानों ने चीन के बचाव में अभियान छेड़ दिया। लेकिन जब इसका भी कोई खास असर नहीं पड़ा तो चीन ने वो चाल चल दी, जिसका नतीजा दिल्ली से लाखों लोगों के पलायन की शक्ल में दिखाई दिया। जाहिर है अब महामारी का खतरा ज्यादा बड़ा है क्योंकि दिल्ली से बड़ी संख्या में लोग यूपी और बिहार के गांव-गांव तक पहुंच चुके हैं। दिल्ली बीजेपी के नेता कपिल मिश्रा ने वो वीडियो जारी किया है, जिसमें देखा जा सकता है कि कैसे लाउडस्पीकर पर एलान करके लोगों को दिल्ली छोड़ने को कहा गया।

चीन की नज़र बड़े कारोबारी फ़ायदे पर

एक तरफ़ जब बाक़ी दुनिया कोरोना वायरस के बढ़ते ख़तरे से जूझ रही है, चीन अब इस बीमारी से मुक्त हो चुका है। अगर किसी देश को इस बीमारी की टेस्टिंग की किट ख़रीदनी हो तो वो सिर्फ़ चीन के पास ही मौजूद है। चीन ने इसका बड़े पैमाने पर उत्पादन करके रखा हुआ है। अब वो इस कोशिश में है कि किसी तरह दुनिया के देशों को इसे ख़रीदने को मजबूर किया जाए। स्पेन और नीदरलैंड्स ने चीन के ये किट ख़रीदे भी लेकिन उनमें से ज़्यादातर ख़राब निकले। चीन की नज़र भारत पर भी है जो टेस्टिंग, दवाओं और मास्क वग़ैरह के लिए उसका बड़ा बाज़ार हो सकता है। अगर कुछ पत्रकार और नेता इस काम में उसकी मदद कर रहे हों तो हैरानी नहीं होनी चाहिए। जहां तक केजरीवाल के चीन के मददगार बनने का सवाल है उस बारे में सबूतों के साथ तो कुछ नहीं कहा जा सकता, लेकिन उनके कामों के आधार पर जनता अपनी राय ज़रूर बना रही है।

 

 

(न्यूज़लूज़ टीम)

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