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चीन में कोरोना ने 2 महीने में कम किए 1 करोड़ मोबाइल फ़ोन यूज़र!

चीन में कोरोना वायरस के क़हर से जुड़ी एक ऐसी ख़बर सामने आ रही है, जिसे सुनकर लोग यक़ीन नहीं कर पा रहे हैं। दरअसल जनवरी और फ़रवरी महीने में चीन में मोबाइल फ़ोन इस्तेमाल करने वालों की संख्या एक करोड़ के क़रीब कम हो गई है। मोबाइल फ़ोन सर्विस देने वाली कंपनियों के डेटा के आधार पर ये दावा किया गया है। यह सवाल पूछा जा रहा है कि इतने सारे लोग कहां गए? क्या इतने सारे लोगों ने अचानक मोबाइल फ़ोन इस्तेमाल करना बंद कर दिया? यह बात चौंकाने वाली है क्योंकि चीन सरकार के मुताबिक़ वहाँ सिर्फ़ 80 हज़ार लोग ही कोरोना वायरस की चपेट में आए और उनमें से क़रीब 3500 लोगों की जान गई। इतना ही नहीं, चीन अब दावा कर रहा है कि उसने बीमारी पर पूरी तरह से क़ाबू पा लिया है। लगातार यह आरोप लग रहे हैं कि चीन ने कोरोना वायरस के ख़तरे से जुड़ी जानकारी छिपाई, जिसके कारण बाक़ी देशों को अलर्ट होने के लिए बहुत कम समय मिला और ये महामारी पूरी दुनिया में फैल गई।

एक करोड़ मोबाइल फ़ोन बंद हुए!

दरअसल हॉन्गकॉन्ग की टेक वेबसाइट ईज़ोन (Ezone) ने चाइना मोबाइल कंपनी का डेटा जारी किया है, जिसके मुताबिक जनवरी और फरवरी में कंपनी के 81 लाख ग्राहक कम हो गए। ये उसके कुल ग्राहकों की संख्या का 1 फीसदी है। 23 साल में यह पहली बार हुआ है जब इस कंपनी के ग्राहकों की संख्या बढ़ने के बजाय घटी हो। चाइना मोबाइल वहां की तीन सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनियों में से एक है। बाकी दोनों कंपनियों चाइना यूनीकॉम और चाइना टेलीकॉम के ग्राहकों का डेटा अभी तक नहीं मिल पाया है। इन दोनों कंपनियों के ग्राहक काफी कम हैं, लेकिन औसत के हिसाब से अगर मान लें कि इन दोनों कंपनियों के भी एक परसेंट ग्राहक कम हुए हैं तो यह संख्या 1 करोड़ से ऊपर चली जाती है। यानी सिर्फ जनवरी और फरवरी में चीन में एक करोड़ लोगों के मोबाइल फोन बंद हो गए। मार्च के आंकड़े आने अभी बाकी हैं। जिसके बाद यह संख्या और भी बढ़ना तय है।

क्या वाक़ई 1 करोड़ लोग मारे गए?

ऊपर जो आँकड़े हैं वो मोबाइल फ़ोन कनेक्शन बंद होने के हैं। इनके आधार पर अनुमान लगाया जा रहा है कि इतने लोग मारे गए होंगे। हालाँकि यह ज़रूरी नहीं कि हर नंबर जो बंद हुआ उसके मालिक की मौत ही हो गई हो। क्योंकि चीन के इन इलाक़ों में ज़बरदस्त आर्थिक संकट भी पैदा हो गए है। कई लोग एक से ज़्यादा मोबाइल नंबर रखते हैं हो सकता है उन्होंने अपने एक या दोनों नंबर बंद करा दिए हों, क्योंकि अब वो बिल नहीं चुका सकते। लेकिन सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया है, जिसे देखकर आप समझ जाएँगे कि सच्चाई क्या है। ये वीडियो चीन में वुहान सिटी के क्रेमेटोरियम का बताया जा रहा है, जहां पर रोज़ बड़ी संख्या में लाशें लाई जा रही थीं और उन्हें जलाया जा रहा था। वीडियो में लाशों से निकाले गए मोबाइल फ़ोन देखे जा सकते हैं। इन फ़ोन में भी संक्रमण का ख़तरा था। वुहान सिटी में बड़ी संख्या में मकानों के अंदर पूरे के पूरे परिवार मरे हुए पाए गए। यहाँ तक कि सड़कों पर भी कई लोगों की लाशें पड़ी हुई थीं। इन सबकी कुछ गिनी-चुनी तस्वीरें ही दुनिया के सामने आ सकीं, क्योंकि चीन ने बुरी तरह से सेंसर कर रखा था। यहाँ तक कि कोरोना वायरस की ख़बरें देने की कोशिश करने वाले कई विदेशी पत्रकारों को निकाल भी दिया। चीन में ट्विटर, फ़ेसबुक और यहाँ तक कि गूगल पर भी पाबंदी है, लिहाज़ा इनके बाहर निकलने की कोई गुंजाइश नहीं थी। हालाँकि सैटेलाइट तस्वीरों से यह जानकारी सामने आ रही है कि वुहान सिटी के सिर्फ़ 20 फ़ीसदी मकानों में ही रात में लाइट जल रही है।

चीन ने कैसे दिया दुनिया को धोखा?

चीन में कोरोना वायरस कोविड 19 (Covid19) का पहला मामला नवंबर 2019 में सामने आया था। दिसंबर के पहले हफ्ते में ही डॉक्टरों ने चीन सरकार को अलर्ट कर दिया कि ये वायरस म्यूटेट कर चुका है और इसे काबू करना बेहद मुश्किल है। इसके बाद भी चीन ने खबर को दबाया। चीन ने जो सबसे खतरनाक काम किया वो ये कि उसने अपने नागरिकों को दूसरे देशों में जाने पर कोई पाबंदी नहीं लगाई। दिसंबर के आखिर तक वुहान में दूसरे देशों के लोगों का आना-जाना लगा रहा। कई लोग दावा कर रहे हैं कि चीन की सरकार समझ चुकी थी कि उसका भारी नुकसान होना तय है इसलिए उसने बड़ी चालाकी से इसे दुनिया भर में फैल जाने दिया ताकि सारे देशों को नुकसान हो। इस दौरान चीन ने अपने ही शंघाई, बीजिंग, ज़ियान, ग्वांगझाऊ जैसे शहरों को सील कर लिया, ताकि उनमें वायरस का संक्रमण न फैलने पाए।

ये तस्वीर चीन के वुहान की है, जहां संक्रमित लोगों को पॉलीथिन में लपेटकर एक जगह से
दूसरी जगह ले जाया जा रहा था।

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