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BBC, द प्रिंट के ‘फेक न्यूज़’ के खिलाफ फूटा गुस्सा, शुरू हुआ बहिष्कार

बायीं तस्वीर कपिल मिश्रा की और दायीं तस्वीर प्रसार भारती के सीईओ शशि शेखर की है।

दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों में जिस तरह से मीडिया के एक वर्ग ने ग़लत रिपोर्टिंग की, उसके ख़िलाफ़ जनता के बीच फैला ग़ुस्सा अब असर दिखाने लगा है। पिछले दिनों में फेक न्यूज़ छापने वाले मीडिया संस्थानों के बहिष्कार का अभियान शुरू हुआ है। इसकी शुरुआत की है बीजेपी नेता कपिल मिश्रा ने। जिन्होंने ‘द प्रिंट’ नाम के एक पोर्टल से ये कहते हुए बात करने से इनकार कर दिया कि उनकी वेबसाइट पर झूठी ख़बरें प्रकाशित की जाती हैं। इसी तरह प्रसार भारती के सीईओ शशि शेखर ने भी BBC के एक कार्यक्रम में जाने से ये कहते हुए इनकार कर दिया कि BBC पर दिल्ली हिंसा को लेकर पक्षपाती रिपोर्टिंग की गईं। दरअसल यह काफी समय से देखा जाता रहा है कि जो मीडिया संस्थान बीजेपी और हिंदुओं के खिलाफ झूठी खबरें उड़ाते हैं उन्हीं के कार्यक्रमों में बीजेपी के नेता और सरकार के मंत्री हिस्सा भी लेते हैं। दिल्ली हिंसा के बाद से यह मांग उठ रही है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को भी फेक न्यूज फैलाने वाले सभी मीडिया संस्थानों का बायकॉट करना चाहिए। यह भी पढ़ें: जानिए दंगे से पहले किससे फोन पर बात कर रहा था ताहिर हुसैन

कपिल मिश्रा ने दिखाया आईना

फ़र्ज़ी ख़बरें फैलाने के लिए कुख्यात माने जाने वाले तथाकथित पत्रकार शेखर गुप्ता की न्यूज़ वेबसाइट ‘द प्रिंट’ ने दिल्ली हिंसा को लेकर कपिल मिश्रा से बातचीत के लिए संपर्क किया। कपिल मिश्रा ने उन्हें ये कहते हुए मना कर दिया कि आपका संस्थान फेक न्यूज़ की फ़ैक्ट्री है, इसलिए मैं आपसे बात करना उचित नहीं समझता। कपिल मिश्रा ने अपने फ़ैसले का कारण भी बताया कि “आप शाहरुख़ बचपन में कितना क्यूट दिखता था और ताहिर हुसैन कैसे बुरे हिंदुओं के कारण आतंकी बन गया… जैसी रिपोर्टिंग ही जारी रखिए।” यह अपने आप में पहला मामला है जब बीजेपी के किसी नेता ने किसी मीडिया संस्थान को इस तरह से आईना दिखाया है। मीडिया ने जिस तरह से कपिल मिश्रा को दंगों के लिए ज़िम्मेदार ठहराने की कोशिश की थी, उसे देखते हुए भी उनकी प्रतिक्रिया बिल्कुल जायज़ लगती है। यह भी पढ़ें: दिल्ली में ABP चैनल की गुंडागर्दी, लड़के का फोन तोड़ने की दी धमकी

बीबीसी को मिला करारा जवाब

दूसरा बड़ा मामला प्रसार भारती के CEO शशि शेखर से जुड़ा है, जिन्होंने BBC के प्रोग्राम में ये कहते हुए जाने से मना कर दिया कि वो अपनी पक्षपाती रिपोर्टिंग से भारत की संप्रभुता को नुकसान पहुंचा रहा है। बीबीसी ने उन्हें महिला दिवस के एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए बुलाया था। शशिशेखर ने आधिकारिक तौर पर चिट्ठी लिखकर लंदन में बीबीसी के डायरेक्टर जनरल को अपने फैसले की जानकारी दी है। बीबीसी ने रिपोर्ट दिखाई थी जिसमें दावा किया गया था कि हिंसा के दौरान दिल्ली पुलिस के जवान और हिंदू भीड़ मुसलमानों पर हमला कर रही थी। पुलिस वाले उन्हें बचा भी नहीं रहे थे। बीबीसी ने अपनी रिपोर्ट में पुलिस पर हमलों और एक जवान की मौत का जिक्र तक नहीं किया था। शशि शेखर ने पत्र में लिखा कि “बीबीसी को दूसरे देशों की संप्रभुता का सम्मान करना सीखना चाहिए।” बीबीसी ब्रिटिश सरकार का संस्थान है, लेकिन वो जिस तरह से भारत के अंदरूनी मामलों में दखलंदाजी देता रहा है उसे लेकर अक्सर यह सवाल उठता है कि आखिर उसकी नीयत क्या है।

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