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कांग्रेस का सबसे बड़ा ‘कलेक्शन सेंटर’ बन चुका है छत्तीसगढ़!

छत्तीसगढ़ में सत्ता में आने के क़रीब एक साल के अंदर ही कांग्रेस ने भ्रष्टाचार और घोटालों के सारे कीर्तिमान तोड़ दिए हैं। राज्य में पिछले दिनों से चल रहे घटनाक्रम पर नज़र डालें तो यही बात साबित होती है। पिछले दिनों मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की उप सचिव सौम्या चौरसिया के घर इनकम टैक्स विभाग के छापों में राज्य की सरकारी मशीनरी में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का भंडाफोड़ हुआ है। आयकर विभाग ने सौम्या चौरसिया के ठिकानों से 100 करोड़ रुपये कैश, 25 किलो से अधिक ज्वैलरी और करोड़ों रुपये की प्रॉपर्टी के कागजात जब्त किए हैं। सौम्या छत्तीसगढ़ प्रशासनिक सेवा की 2008 बैच की अधिकारी हैं। यानी मात्र 12 साल की सर्विस में उन्होंने इतनी अकूत दौलत इकट्ठा कर ली। उनके यहां से भारी मात्रा में लेन-देन की पर्चियां भी बरामद की गईं। मुख्यमंत्री बघेल के करीबी बताए जा रहे कई लोग सौम्या चौरसिया के साथ संपर्क में थे। इनमें कई कारोबारी और अफसर शामिल हैं। इनकम टैक्स विभाग ने 40 से अधिक लोगों पर छापेमारी की है। माना जा रहा है कि राज्य में सरकारी ठेकों से लेकर दूसरे तमाम कामों में वसूली का जो नेटवर्क खड़ा किया गया है ये सभी उसी की कड़ियां हैं। सौम्या चौरसिया को ट्रांसफर-पोस्टिंग के कारोबार की रिंग मास्टर बताया जा रहा है।

कांग्रेस हाईकमान क्या है कनेक्शन?

जिस बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के सुराग मिले हैं उससे इतना तय है कि बिना राजनीतिक संरक्षण के कोई सरकारी अधिकारी अकेले दम पर ये नहीं कर सकता। सौम्या चौरसिया मुख्यमंत्री की उप सचिव के तौर पर सीधे तौर पर यह काम देख रही थीं। बाक़ी लोग जिन पर छापे मारे गए हैं वो भी सीएम के करीबी बताए जा रहे हैं। लेकिन जिस बात से भूपेश बघेल ख़ुद शक के दायरे में आ गए हैं वो है छापेमारी को लेकर उनकी बौखलाहट। इस मामले को लेकर जिस तरह से वो कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मिलने पहुँच गए उससे यह शक मज़बूत हो रहा है कि मामले के तार निश्चित रूप से कांग्रेस हाईकमान से भी जुड़े हुए हैं। सोनिया से मुलाक़ात का कार्यक्रम भी इतनी हड़बड़ी में बना कि पहले से तय कैबिनेट की बैठक को रद्द कर दिया गया। सोनिया से मुलाक़ात में क्या नतीजा निकला यह तो पता नहीं, लेकिन ज़ाहिर सी बात है जिस तरह से लीपापोती हो रही है भूपेश बघेल का सारा फ़ोकस अब इस मामले से पल्ला झाड़ने पर होगा। हालाँकि सौम्या चौरसिया के सरकारी ड्राइवर का एक बयान उनके लिए गले की हड्डी बन गया है, जिसमें उसने बताया है कि छापों से ठीक पहले सौम्या चौरसिया के मकान से पाँच बड़े-बड़े बैग सीएम भूपेश बघेल के आवास पहुँचाए गए थे। इसका मतलब यह निकाला जा रहा है कि जो 100 करोड़ कैश ज़ब्त हुआ है वो वास्तव में एक छोटा हिस्सा भर है।

एमपी से ज़्यादा वसूली छत्तीसगढ़ से!

रायपुर में हमारे एक सूत्र ने बताया कि “छत्तीसगढ़ सरकार इन दिनों कांग्रेस हाईकमान के लिए सबसे बड़ा कलेक्शन सेंटर बन चुकी है। कांग्रेस शासित दूसरे राज्यों जैसे एमपी और राजस्थान से ज़्यादा उगाही छत्तीसगढ़ से हो रही है।” माइनिंग से लेकर ट्रांसफ़र पोस्टिंग तक के कारोबार में राज्य सरकार पर करप्शन के आरोप विपक्षी बीजेपी लगा रही है। बीजेपी ने कहा है कि सीएम के क़रीबियों पर जो छापेमारी हुई है वो पुख़्ता जानकारी के आधार पर हुई है, तभी इतने बड़े पैमाने पर कैश और प्रॉपर्टी ज़ब्त हुई है। अगर ये सिर्फ़ अधिकारियों के स्तर का भ्रष्टाचार है तो कांग्रेस सरकार को इसमें रुकावट डालने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। बताया जाता है कि भ्रष्टाचार की रक़म का बड़ा हिस्सा मीडिया तक भी पहुँचाया जा रहा है, यही कारण है कि मीडिया भ्रष्टाचार की सच्चाई सामने लाने के बजाय मामले पर पर्दा डालने में जुटा है।

सीएम की उपसचिव सौम्या चौरसिया के बारे में कहा जा रहा है कि वो मुख्यमंत्री और अफ़सरशाही के बीच लेनदेन की सबसे मुख्य कड़ी हैं।
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