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जानिए मध्य प्रदेश सरकार में ‘बग़ावत’ के पीछे है कौन कांग्रेसी नेता!

Courtesy: PTI

मध्य प्रदेश में कांग्रेस नेताओं की गुटबाज़ी आख़िरकार चरम पर आ ही गई। बीती रात ख़बर आई कि गुरुग्राम के मानेसर के फाइवस्टार रिजॉर्ट में कई विधायक ठहरे हुए हैं, जिनमें कुछ निर्दलीय और समाजवादी पार्टी और बीएसपी के हैं। ये वो विधायक हैं जिनके समर्थन से कमलनाथ सरकार चल रही है। यह जानकारी किसी और ने नहीं, बल्कि कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने ट्वीट करके दी। इसके बाद कांग्रेस के अंदर हड़कंप मच गया। कमलनाथ ने अपने दो मंत्रियों को विधायकों को समझाने बुझाने की ज़िम्मेदारी देकर दिल्ली रवाना कर दिया। मीडिया की ख़बरों के मुताबिक़ बीएसपी से निलंबित विधायक रमाबाई समेत कुल आठ विधायक मानेसर के रिसॉर्ट में ठहराए गए हैं। हालाँकि उनकी संख्या को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। कांग्रेस दावा कर रही है कि बीजेपी ने बड़ी रक़म ऑफ़र करके विधायकों को ख़रीद रही है। लेकिन कांग्रेस के ही सूत्रों के मुताबिक़ सच्चाई इससे बिल्कुल अलग है।

बग़ावत के पीछे दिग्विजय का दिमाग़?

दिग्विजय सिंह पिछले कुछ समय से अचानक काफ़ी सक्रिय दिखाई दे रहे हैं। जिस तरह से उन्होंने इस मामले में दिलचस्पी दिखाई उसे देखते हुए कई लोगों को उनकी भूमिका पर शक हो रहा है। दो दिन पहले ही दिग्विजय सिंह ने दावा किया था कि बीजेपी विधायकों को पैसे ऑफ़र कर रही है। इसके बाद गुरुग्राम के रिसॉर्ट का ये सारा ड्रामा कहीं न कहीं दिग्विजय की उस अधूरी इच्छा से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसे पूरी करने की कोशिश में वो काफ़ी समय से हैं। दरअसल दिग्विजय सिंह चाहते थे कि उन्हें मुख्यमंत्री बनाया जाए, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। फ़िलहाल वो राज्यसभा के सदस्य हैं, जहां उनका कार्यकाल पूरा हो रहा है। कांग्रेस पार्टी के एक सूत्र ने हमें बताया कि दिग्विजय को दोबारा राज्यसभा में भेजने को लेकर अभी तक सस्पेंस बना हुआ है। माना जा रहा था कि सोनिया गांधी उनकी जगह किसी नए नेता को भेजने के समर्थन में हैं। लिहाज़ा हाईकमान पर दबाव बनाने के लिए दिग्विजय ने ही बग़ावत का सारा खेल रचा। कमलनाथ को भी इसकी पूरी जानकारी है।

कमलनाथ को दिग्विजय ने कैसे साधा?

दरअसल ज्योतिरादित्य सिंधिया पिछले कुछ समय से कमलनाथ के लिए मुसीबत का कारण बने हुए हैं। ये एक ऐसा कांटा है जिसे कमलनाथ जल्द से जल्द काटना चाहते हैं। दिग्विजय की राजनीति भी सिंधिया के ख़िलाफ़ है लिहाज़ा दोनों ने एक साथ मिलकर सिंधिया को भी ठिकाने लगाने का खेल रचा। जिन विधायकों से बग़ावत कराई गई है उनमें से कुछ सिंधिया के समर्थक बताए जा रहे हैं। मैसेज देने की कोशिश है कि कमलनाथ की सरकार को अस्थिर करने के लिए ज्योतिरादित्य ने बीजेपी के साथ मिलकर साज़िश रची थी। ये वो दांव है जिससे ज्योतिरादित्य को भी रास्ते से हटाया जा सकता है और दिग्विजय का राज्यसभा टिकट भी पक्का हो सकता है। इसीलिए मीडिया की मदद से उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम में ख़ुद को संकटमोचन की भूमिका में पेश करवाया। जैसे ही दिग्विजय का अपना मक़सद पूरा हो जाएगा बग़ावत का ये पूरा ड्रामा भी ख़त्म हो जाएगा और मीडिया के ज़रिए दावा किया जाएगा कि लोकतंत्र की हत्या हो रही थी लेकिन उसे बचा लिया गया है।

नीचे आप इस पूरे सियासी खेल से जुड़े कुछ ट्वीट्स देख सकते हैं।

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