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जानिए दंगे से पहले बार-बार किससे फ़ोन पर बात कर रहा था ताहिर हुसैन

दिल्ली में हिंदू विरोधी दंगों के आरोपी आम आदमी पार्टी नेता ताहिर हुसैन की तलाश जारी है। उसके मोबाइल फ़ोन रिकॉर्ड्स जो बड़ी बात पता चली है वो ये कि दंगों के तीन दिन पहले से ताहिर हुसैन लगातार मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया और विधायक अमानतुल्लाह खान के संपर्क में था। अंग्रेज़ी न्यूज़ वेबसाइट SirfNews ने सूत्रों के हवाले से यह खुलासा किया है। इसके मुताबिक दंगों वाले दिन के पहले तीन दिन के अंदर ताहिर हुसैन की अमानतुल्लाह खान से 56 बार, मनीष सिसोदिया से 18 बार और अरविंद केजरीवाल से 9 बार बात हुई। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं ऐसी क्या जरूरी बात थी जो खुद मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री एक मामूली निगम पार्षद से इतनी बार फोन पर बात कर रहे थे। अमानतुल्लाह खान से तो जितनी बार बात हुई है उससे लगता है कि वो पूरे 2-3 दिन आपस में संपर्क में बना रहा। जाहिर बात है कि ऐसा आम तौर पर तभी होता है जब कुछ बड़ा मामला हो। ताहिर हुसैन के घर में जिस बड़ी मात्रा में दंगे के सामान, पत्थर, तेजाब औ पेट्रोल बम मिले हैं उससे यही लगता है कि दंगे की तैयारी करीब महीने भर से चल रही थी। फिलहाल पुलिस यह पता करने में जुटी है कि दंगों के दौरान और बाद में ताहिर हुसैन की बाकी गतिविधियां क्या थीं। बीजेपी नेता कपिल मिश्रा ने आरोप लगाया था कि दंगों के समय भी ताहिर हुसैन केजरीवाल के साथ फोन पर बात कर रहा था। यह खबर लिखे जाने तक ताहिर फरार है और पुलिस उसे पकड़ने के लिए जगह-जगह छापेमारी कर रही है। यह भी पढ़ें: दिल्ली के जिहादियों को किसने दिया गुलेल का आइडिया?

ट्रंप के दौरे में दंगे का प्लान तय था

दिल्ली पुलिस की शुरुआती जाँच में यह बात लगातार सामने आ रही है कि पहले से तय था कि जिस दिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप दिल्ली में होंगे उसी दिन दंगे कराए जाएँगे। क्योंकि इससे हिंसा और नागरिकता क़ानून के विरोध के मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय कवरेज मिलेगी। साथ ही दुनिया भर में भारत का नाम ख़राब किया जा सकेगा। यह दिन चुनने का दूसरा बड़ा कारण यह था कि पूरी दिल्ली पुलिस का फ़ोकस ट्रंप की सुरक्षा पर था। साज़िश रचने वालों को पता था कि दिल्ली के सारे थानों से पुलिसवालों को ट्रंप की सुरक्षा ड्यूटी में लगाया जाएगा। ऐसे में अगर दंगे होंगे तो पुलिस के लिए हालात क़ाबू करना आसान नहीं होगा। लिहाज़ा इस दिन की तैयारी पिछले 3-4 हफ़्तों से चल रही थी। उत्तर-पूर्वी दिल्ली के इलाक़ों को ख़ास तौर पर चुना गया था क्योंकि यही वो इलाक़े थे, जहां पर चुनाव में बीजेपी को काफ़ी अच्छे वोट मिले थे। ऐसा माना जा रहा था कि इन इलाक़ों में रहने वाले हिंदुओं ने बीजेपी को वोट दिए हैं। ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या केजरीवाल की पार्टी यहाँ के हिंदुओं से बदला लेना चाहती थी? यह भी पढ़ें: कन्हैया और ताहिर हुसैन पर केजरीवाल से 15 सीधे सवाल

ताहिर के बचाव की कहानी थी तैयार

यह बात भी सामने आ रही है कि ताहिर हुसैन ने पहले से ही पूरी कहानी तैयार कर रखी थी कि कैसे दंगों के आरोप से बचा जाए। इसके लिए उसने एक दिन पहले अपने घर पर तथाकथित दंगाइयों का हमला कराया। पुलिस को बुलाकर उनके साथ ताहिर हुसैन वहाँ से निकल गया। इस तरह उसने यह सबूत तैयार कर लिया कि वो वास्तव में दंगे के समय घर में था ही नहीं। लेकिन 25 फ़रवरी को दोपहर बाद जब दंगे शुरू हुए तो ताहिर हुसैन दोबारा उसी घर में पहुँच गया जिसके बारे में वो दावा कर रहा था कि वहाँ पर दंगाइयों ने क़ब्ज़ा कर लिया है। ताहिर हुसैन ने अपनी इस कहानी पर सबको भरोसा दिला भी दिया होता अगर किसी ने घर में लाठी लिए दंगाइयों को निर्देश देते उसका वीडियो न बना लिया होता। ताहिर हुसैन की इस तेज़ाबी साज़िश की पूरी कहानी आना अभी बाक़ी है। क्योंकि उस दिन ताहिर के घर में आईबी अधिकारी अंकित शर्मा के अलावा 3 लोगों को घसीटकर मारने की जानकारी सामने आ रही है। इनमें से 2 के शव बरामद हो चुके हैं। इसके अलावा यह जानकारी भी सामने आई थी कि ताहिर के गुंडों ने स्कूल से लौट रही लड़कियों को भी खींच लिया था और बाद में उनके कपड़े उतारकर घर भेज दिया गया। लड़कियों की कॉपी-किताब भी फाड़ या जला दी गई। यह शक भी जताया जा रहा है कि इन लड़कियों के साथ कुछ अनहोनी भी हुई होगी।

(न्यूज़लूज़ टीम)

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