Home » Loose Top » जानिए दिल्ली के जिहादियों को कहां से मिला गुलेल का आइडिया
Loose Top

जानिए दिल्ली के जिहादियों को कहां से मिला गुलेल का आइडिया

सबसे बायीं तस्वीर दिल्ली के चांदबाग इलाक़े की है, बाक़ी चारों तस्वीरें कश्मीर या फलस्तीन की हैं।

दिल्ली के हुए हिंदू विरोधी दंगों में बड़े पैमाने पर गुलेल (Slingshot) के इस्तेमाल ने खुफिया एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं। दंगे-फसाद में आम तौर पर छोटे गुलेलों का इस्तेमाल देखा जाता है, लेकिन जिस तरह से घरों की छतों पर और साइकिल रिक्शा पर मोबाइल गुलेलें बनाई गई थीं वो इस पूरे हिंसाकांड के इंटरनेशनल लिंक की तरफ इशारा करती हैं। दुनिया भर में आतंकवाद के ट्रेंड पर काम करने वाले जानकारों ने माना है कि गुलेल इस्लामी आतंकवाद का नया हथियार है। खास तौर पर उन देशों में जहां पर वो सुरक्षाबलों के मुकाबले कमजोर स्थिति में होते हैं और गिरफ्तार होने और कोर्ट में मुकदमा चलने का डर बना रहता है। गुलेल के इस्तेमाल पर ज्यादा कड़ी कानूनी धाराएं लागू नहीं होतीं। इसलिए पिछले कुछ साल में फलस्तीन, जॉर्डन, सीरिया जैसे इस्लामी देशों ही नहीं ब्रिटेन और जर्मनी में भी गुलेलों का इस्तेमाल देखा गया है। इसी तरह म्यांमार में रोहिंग्या आतंकवादी भी वहां की सेना के खिलाफ लंबे समय तक गुलेलों का इस्तेमाल करते रहे थे। यह भी पढ़ें: पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI के इशारे पर हुई अंकित शर्मा की हत्या

जिहादियों को गुलेल क्यों पसंद है?

यूँ तो ज़्यादातर इस्लामी आतंकवाद हथियारबंद रूप में ही दिखाई देता है। दुनिया भर में जहां भी इस्लाम से जुड़े मज़हबी संघर्ष चल रहे हैं, उन सभी में आधुनिक राइफ़लें और बंदूक़ें इस्तेमाल होती हैं। इसके अलावा रॉकेट लॉन्चर और मशीनगनों का इस्तेमाल भी आम है। पेशेवर आतंकवादी इन्हीं का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन जब नागरिकों को ढाल बनाना होता है तो उनके हाथों में गुलेल थमाई जाती है। फलस्तीन से लेकर कश्मीर और दिल्ली तक यह पैटर्न देखा जाता है। गुलेल के साथ आसानी यह होती है कि यह लगभग उतनी दूर वार करती है जितनी बंदूक़। इससे तेज़ी से चोट पहुँचाई जा सकती है। गुलेल के साथ पकड़े जाने पर आर्म्स एक्ट जैसी कड़ी धाराएँ भी नहीं लगतीं और बहुत जल्दी कोर्ट से ज़मानत मिल जाती है। इसी कारण फलस्तीनी आतंकी संगठन हमास ने इसका इस्तेमाल सबसे पहले शुरू कराया था। यह आशंका जताई जा रही है दिल्ली और देश के दूसरे इलाक़ों में जिहादियों ने संभवत: गुलेल वाली ऐसी ही तैयारियाँ कर रखी हों। यह भी पढ़ें: CAA पर हिंसा करा के पाकिस्तान ने PoK को बचा लिया

दिल्ली में बड़े पैमाने पर धरपकड़

फ़िलहाल हिंसा थमने के बाद से दिल्ली में दंगाइयों की धरपकड़ का काम तेज़ कर दिया गया है। पुलिस ने यह समाचार लिखे जाने तक 167 एफआईआर दर्ज की हैं। इनमें से 36 मामले आर्म्स एक्ट के तहत हैं। यहाँ भी समस्या यही है कि जिन मकानों से कोई पिस्तौल नहीं, बल्कि गुलेल मिली है उन पर यह क़ानून नहीं लगाया जा सकता। समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ अब तक की शुरुआती जाँच में 885 लोगों को अलग-अलग इलाक़ों से या तो गिरफ्तार किया गया है या उन्हें हिरासत में लिया गया है। ये सारी कार्रवाई मोबाइल फ़ोन लोकेशन और सीसीटीवी सबूतों के आधार पर की जा रही हैं। पुलिस ने शनिवार को पूरा दिन हिंसा वाले इलाक़ों के सीसीटीवी कैमरे ज़ब्त करने में लगाया। इसके अलावा आम लोगों से अपील की गई है कि वो अपने मोबाइल फ़ोन या दूसरे कैमरों की तस्वीरों को पुलिस के साथ शेयर करें, ताकि दंगाइयों की पहचान की जा सके। यह भी पढ़ें: दिल्ली में एबीपी न्यूज़ की गुंडागर्दी, लड़के का फ़ोन तोड़ने की दी धमकी

चांदबाग इलाक़े में एक जिहादी दंगाई की छत पर ये पोर्टेबल गुलेल पाई गई। इसके ज़रिए आसपास के हिंदू मकानों पर पेट्रोल बम और एसिड फेंके जा रहे थे। देखें वीडियो:

एक अपील: न्यूज़लूज़ के जरिए हम राष्ट्रवादी पत्रकारिता को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं। इस वेबसाइट पर होने वाला खर्च बहुत ज्यादा है और हमारी आमदनी काफी कम। हम अपने काम को जारी रख सकें इसके लिए हमें आर्थिक मदद की जरूरत है। ये हमारे लिए ऑक्सीजन का काम करेगी। डोनेट करने के लिए क्लिक करें:

या स्कैन करें


कृपया लेख कॉपी-पेस्ट न करें। कई लोग पोस्ट कॉपी करके फेसबुक और व्हाट्सएप पर शेयर कर देते हैं, जिससे वेबसाइट की आमदनी काफी कम हो गई है। राष्ट्रवाद की विचारधारा पर आधारित यह वेबसाइट बंद हो जाएगी तो क्या आपको खुशी होगी? कृपया खबरों का लिंक शेयर करें।

comments

अपनी लिखी पोस्ट या जानकारी साझा करें 

Polls

क्या नरेंद्र मोदी सरकार इसी कार्यकाल में जनसंख्या कानून लाएगी?

View Results

Loading ... Loading ...

Donate to Newsloose.com

एक अपील: न्यूज़लूज़ के जरिए हम राष्ट्रवादी पत्रकारिता को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं। इस वेबसाइट पर होने वाला खर्च बहुत ज्यादा है और हमारी आमदनी काफी कम। हम अपने काम को जारी रख सकें इसके लिए हमें आर्थिक मदद की जरूरत है। डोनेट करने के लिए क्लिक करें:

या स्कैन करें

Popular This Week

Don`t copy text!