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केजरीवाल का कारनामा, 7 साल में बना अधूरा अस्पताल, पीठ अपनी थपथपाई

दिल्ली में अरविंद केजरीवाल सरकार ने तीसरी बार सत्ता सँभालने के बाद फिर से उसी अंदाज में काम शुरू कर दिया है, जिसके लिए वो पिछले कार्यकाल में विवादों में घिर चुकी है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ट्विटर पर जानकारी दी है कि बुराड़ी इलाक़े में बने अस्पताल के बेड की संख्या चार गुना बढ़ाकर नया अस्पताल बनाया गया है। केजरीवाल ने दावा किया था कि 2013 में शीला दीक्षित सरकार ने 182 करोड़ रुपये के बजट में 200 बेड के अस्पताल का काम शुरू करवाया था, लेकिन उनकी सरकार ने इस प्रोजेक्ट को दोबारा डिज़ाइन किया और मात्र 250 करोड़ रुपये के खर्च में ही 800 बेडों का अस्पताल बनाकर तैयार कर दिया। उनके मुताबिक़ अस्पताल का काम इन दिनों आख़िरी चरण में है। दिल्ली बीजेपी के प्रवक्ता हरीश खुराना ने आरटीआई की मदद से मुख्यमंत्री केजरीवाल के इस दावे की पोल खोल दी। सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी के मुताबिक़ यह अस्पताल क़रीब 800 बेड का ही बनना था। ऊपर से इसका खर्चा काफ़ी बढ़ गया।

अस्पताल पर मुख्यमंत्री का झूठ

केजरीवाल ने अपने ट्वीट में बुराड़ी के अस्पताल की तस्वीर शेयर की है और दावा किया है कि यह सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल अपने आख़िरी चरण में है और जल्द ही इसे जनता को समर्पित किया जाएगा। इसमें 800 मरीज़ों को भर्ती करने की क्षमता होगी। पहले ये 182 करोड़ में 200 बेड का अस्पताल बनना था। जबकि नई डिज़ाइन में ये चार गुना अधिक क्षमता वाला होगा। बीजेपी प्रवक्ता हरीश खुराना ने ट्विटर पर अरविंद केजरीवाल के ट्वीट के जवाब में आरटीआई के उस जवाब को पोस्ट किया है, जिसमें 2013 में शीला दीक्षित सरकार के समय के दस्तावेज दिए गए हैं। इनके मुताबिक़ अस्पताल शुरू से ही 768 बेड के लिए अप्रूव किया गया था। इस लिहाज़ से प्रोजेक्ट पर केजरीवाल सरकार ने 68 करोड़ रुपये ज़्यादा खर्च किए। केजरीवाल जिस काम के लिए श्रेय ले रहे हैं, उसे पूरा होने में पूरा होने में 7 साल लग गए। अभी भी यह काम ख़त्म नहीं हुआ है।

खुलासे पर केजरीवाल की चुप्पी

अपने दावे की सच्चाई सामने आने के बाद सीएम केजरीवाल ने चुप्पी साध ली। हालाँकि उनकी तरफ़ से आम आदमी पार्टी के कुछ लोगों ने भ्रम फैलाने की कोशिश शुरू कर दी। इसी के तहत शीला दीक्षित के 2013 के बजट भाषण की एक क्लिप दिखाई जा रही है जिसमें वो बुराड़ी के अस्पताल को 200 बेड वाला बता रही हैं। क्योंकि मुख्यमंत्री के भाषण में गलती हो सकती है, लेकिन प्रोजेक्ट के काग़ज़ात में ऐसी कोई गलती नहीं हो सकती। अस्पताल की शुरुआती डिज़ाइन और प्लानिंग में ही 768 बेड की बात थी। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि केजरीवाल सरकार ने अस्पताल में बेडों की क्षमता कैसे बढ़ा दी? हो सकता है कि कुछ दिनों बाद केजरीवाल सरकार अपनी इस तथाकथित उपलब्धि का जोरशोर से ढोल पीटे, लेकिन वास्तव में उसे जनता को बताना चाहिए कि 182 करोड़ के प्रोजेक्ट का बजट 250 करोड़ कैसे हो गया? ख़ास बात यह है कि अभी अस्पताल की बिल्डिंग बनी है, इसे शुरू होने में अब भी कई महीने लगने का अनुमान है।

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