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छत्तीसगढ़ में किसानों पर बर्बरता, अमेरिका में नाटक देख रहे हैं सीएम भूपेश बघेल

बायीं तस्वीर कोंडागांव में पुलिस अत्याचार में घायल किसान की है। बीच में सीएम भूपेश बघेल की अमेरिका में सैर-सपाटे की तस्वीर। दायीं तरफ़ पुलिस अत्याचार के बारे में मीडिया रिपोर्ट।

छत्तीसगढ़ में इन दिनों किसानों का आंदोलन चरम पर है। धान के किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए पुलिस की लाठियाँ खानी पड़ रही हैं, जबकि इसी वादे पर राज्य में कांग्रेस चुनाव जीतकर आई थी। धान ख़रीद के मामले में बड़े पैमाने पर धांधली और घोटाले के आरोप भी लग रहे हैं। इन सारे हालात के बीच मुख्यमंत्री भूपेश बघेल इन दिनों अमेरिका की सैर पर हैं। कहने को वो छत्तीसगढ़ में विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए गए हैं। लेकिन जैसी तस्वीरें सामने आ रही हैं उनको देखकर ऐसा लगता है कि असली मुद्दा विदेशी निवेश नहीं, बल्कि सैर-सपाटा और छुट्टी मनाना है। क्योंकि वहां पर भी उनके जो बयान सामने आए हैं वो नागरिकता कानून और एनआरसी जैसे घरेलू मुद्दों पर हैं। इसके अलावा भूपेश बघेल का ज्यादातर समय फोटो खिंचवाने और नई-नई जगहों पर घूमने में बीत रहा है। 11 फरवरी से ही वो अमेरिका के शहरों में घूम रहे हैं और उनके कार्यक्रमों में ऐसा कुछ नहीं है जिससे विदेशी निवेश को बढ़ावा मिले। उदाहरण के लिए बुधवार को उन्होंने न्यूयॉर्क के ब्रॉडवे थियेटर में जाकर नाटक देखा। यह भी पढ़ें: राहुल गांधी के कहने पर छत्तीसगढ़ में अडानी को मिली कोयला खदान

धान किसानों पर पुलिस का अत्याचार

छत्तीसगढ़ में किसानों के लिहाज़ से यह समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। यह वो समय होता है जब धान की सरकारी ख़रीद की जाती है। महीने भर से सरकार किसी न किसी बहाने से धान की ख़रीद में रुकावट पैदा कर रही थी। जिसके ख़िलाफ़ राज्य के तमाम ज़िलों में किसानों ने विरोध-प्रदर्शन किए। सोमवार 17 फ़रवरी को कई जगहों पर निहत्थे प्रदर्शनकारी किसानों पर पुलिस का क़हर टूटा। किसानों को बेरहमी के साथ दौड़ा-दौड़ाकर पीटा गया। जिसमें कई किसान घायल हुए हैं। ज़्यादातर इलाक़ों में सरकारी अधिकारी कभी भी यह कहकर धान की ख़रीद रोक देते हैं कि बोरियां खत्म हो गई हैं। जबकि कांग्रेस का सबसे बड़ा चुनावी वादा ही यही था कि किसानों का पूरा धान ख़रीदा जाएगा। 20 फ़रवरी को इसकी आख़िरी तारीख़ रखी गई थी और अब तक ज़्यादातर किसानों का धान ख़रीदा नहीं गया है। किसानों का आरोप है कि कांग्रेस पार्टी से जुड़े लोगों का धान प्राथमिकता के आधार पर ख़रीदा गया है और उन्हें फटाफट पेमेंट भी कर दी गई। यह अपने आप में किसी घोटाले की तरह मालूम होता है। यह भी पढ़ें: छत्तीसगढ़ में चर्च के कहने पर बंद हुई आयुष्मान योजना

विदेशी निवेश लाने के नाम पर मस्ती

भूपेश बघेल के ट्विटर अकाउंट के हिसाब से देखें तो वो 11 फ़रवरी को अमेरिका यात्रा के लिए रवाना हुए। 12 फ़रवरी को उन्होंने ट्वीट करके जानकारी दी कि आज सेन फ़्रांसिस्को में उन्होंने छत्तीसगढ़ के निवासी भारतीयों से मुलाक़ात की। इस ट्वीट में भूपेश बघेल ने लिखा है कि “छत्तीसगढ़ के व्यापारिक प्रतिनिधि ने छत्तीसगढ़ में निवेश की इच्छा जताई है।” लेकिन यह नहीं बताया कि यह निवेश कितने का है और किन क्षेत्रों के लिए होगा। क्या इसके लिए कोई एमओयू वग़ैरह साइन हुआ है? इस बारे में कोई औपचारिक जानकारी भी नहीं आई। अगले दिन 13 फ़रवरी को भी उन्होंने भारतीय समुदाय के साथ बातचीत की। इसी दिन उन्होंने डेटा सेंटर कंपनी इक्विनिक्स का भ्रमण किया। शाम के वक़्त वो सिलिकॉन वैली में थे, जहां उनके मुताबिक़ निवेश पर बातचीत हुई। बातचीत का नतीजा क्या था यह कोई नहीं जानता। 14 तारीख़ के कार्यक्रम भी निवेश के बारे में थे, लेकिन नतीजा क्या निकला इस बारे में कुछ बताया नहीं गया। 15 तारीख़ को हार्वर्ड इंडिया कॉन्फ़्रेंस में उन्होंने हिस्सा लिया, जहां पर चर्चा का विषय था- “भारतीय लोकतंत्र में जाति की राजनीति”। आगे के कार्यक्रम भी भारतीय दूतावास और ओवरसीज़ कांग्रेस के थे। बाद में न्यूयॉर्क में यूएन दफ़्तर वग़ैरह में सैर-सपाटे की तस्वीरें भी पोस्ट की गईं।

लाठीचार्ज पर पकड़ा गया सफेद झूठ

किसानों पर लाठीचार्ज को लेकर छत्तीसगढ़ सरकार ने सफ़ेद झूठ बोला। जिला कोंडागांव के पुलिस अधीक्षक ने एक बयान जारी करके उन मीडिया रिपोर्ट्स का खंडन किया कि किसानों पर लाठीचार्ज हुआ है। उन्होंने कहा कि बस थोड़ी बहुत धक्कामुक्की हुई थी। जबकि सच यह है कि कई किसानों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया। सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो भी सामने आए जिनसे पुलिस बर्बरता की पोल खुल गई। (नीचे वीडियो देखें) यह भी पढ़ें: अनिल अंबानी को कांग्रेस सरकार का 450 करोड़ का डिस्काउंट

मीडिया के साथ सरकार की साँठगाँठ

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के अमेरिका दौरे के बीच छत्तीसगढ़ में चल रहे किसान आंदोलन की ख़बरों को मीडिया ने दबा दिया। थोड़ा-बहुत स्थानीय अख़बारों में छप भी गया तो दिल्ली की मीडिया ने इस ख़बर की पूरी तरह अनदेखी की। इसका कारण यह था कि अमेरिका यात्रा में भूपेश बघेल का एक कार्यक्रम इंडिया टुडे समूह ने स्पॉन्सर किया था। छत्तीसगढ़ सरकार पर आरोप लगते रहे हैं कि वो मीडिया को उपकृत करती रहती है जिसके कारण ऐसे समय में मीडिया भी ऐसी कोई ख़बर नहीं दिखाता जिससे सरकार की इमेज पर बुरा असर पड़ता हो।

जिस दिन छत्तीसगढ़ में किसानों पर पुलिस का क़हर टूट रहा था, उसी दिन भूपेश बघेल ने ट्विटर के ज़रिए सूचना दी कि मैं नाटक देख रहा हूँ।

इस दौरान मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रियंका वाड्रा को शादी की सालगिरह की बधाई दी, लेकिन किसानों की समस्या पर एक भी शब्द नहीं बोले।

न्यूयॉर्क में सैर-सपाटे के दौरान भूपेश बघेल यूएन के मुख्यालय भी गए। उन्होंने बताया कि मैंने राजनयिकों से मुलाक़ात की, लेकिन तस्वीरें कुछ और ही कहानी बयान कर रही थीं।

किसानों के आंदोलन और उनकी समस्या पर मीडिया में छपी कुछ रिपोर्ट्स।

(अजय सरस्वती श्रीवास्तव के इनपुट्स के साथ न्यूज़लूज़ टीम)

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