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क्या मंदिर के पुजारियों को 18 हज़ार रुपये वेतन देंगे केजरीवाल?

दिल्ली में अरविंद केजरीवाल सरकार की हनुमान भक्ति के साथ यह माँग तेज़ हो गई है कि मंदिरों के पुजारियों को भी मासिक वेतन दिया जाए। विपक्षी बीजेपी ही नहीं, बल्कि आम लोगों ने भी केजरीवाल से यह माँग शुरू कर दी है कि जिस तरह से मस्जिदों के इमामों और उनके एक सहायक को 18 हज़ार रुपये बतौर तनख़्वाह दिए जा रहे हैं उसी तरह दिल्ली के मंदिरों के पुजारियों को भी वेतन दिया जाए। पुजारियों के एक दल ने इस बारे में केजरीवाल सरकार के एक विधायक से बात करके उन्हें ज्ञापन भी सौंपा है। अभी ज़्यादातर मंदिरों के पुजारियों का खर्चा छिट-पुट चढ़ावे के पैसे से चलता है। ये पैसा इतना कम होता है कि घर चलाना मुश्किल होता है। ज़्यादातर मंदिरों के पुजारी बेहद ग़रीबी में ज़िंदगी जी रहे हैं। ऐसे समय में जब केजरीवाल सरकार अपनी मुस्लिम तुष्टीकरण की नीति से हटते हुए हिंदुत्ववादी लाइन लेते दिखाई दे रहे हैं उन पर दबाव बढ़ रहा है कि वो या तो इमामों को दी जा रही सैलरी बंद करें या मंदिर के पुजारियों के लिए भी यह सुविधा शुरू करें। हम आपको बता दें कि दिल्ली में ज़्यादातर मंदिरों के पुजारी ब्राह्मण नहीं हैं। आपको बड़ी संख्या में ऐसे मंदिर मिलेंगे, जिनमें पंजाबी, जाट जैसी अन्य जातियों के लोग भी पुजारी का काम करते हैं। यह भी पढ़ें: मुसलमानों को क्यों लग रहा है कि आरएसएस के आदमी हैं केजरीवाल

इमाम की तर्ज़ पर पुजारियों पर भी मेहरबानी?

दिल्ली देश के कुछ उन राज्यों में से है जहां पर मस्जिदों के इमामों को सरकार सैलरी देती है। अब तक इमाम को 10 हज़ार रुपये और उनके सहायक यानी मुअज्जिन को 9 हज़ार रुपये वेतन मिला करता था। यह रक़म दिल्ली वक़्फ़ बोर्ड की तरफ़ से दी जाती थी। लेकिन विधानसभा चुनाव से ठीक पहले केजरीवाल ने इसमें भारी बढ़ोतरी करते हुए इमाम का वेतन 18 हज़ार रुपये और मुअज्जिन का वेतन 16 हज़ार रुपये कर दिया। केजरीवाल के इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ चुनाव प्रचार में बीजेपी नेताओं ने ज़ोरदार हमले भी किए। लेकिन इसका कोई ख़ास असल नहीं हुआ। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इस बात पर नाराज़गी भी जताई कि मुस्लिम समुदाय के लिए केजरीवाल ने ख़ज़ाना खोल दिया, लेकिन हिंदुओं ने मुफ़्त बिजली पानी के ही बदले आम आदमी पार्टी को वोट दे दिया। कई लोग मानते हैं कि एक समुदाय के तौर पर केजरीवाल सरकार से हिंदुओं को बेहतर डील नहीं मिली, जबकि वोट उन्होंने भी दिया। लिहाज़ा वो शिकायत अब दूर करने की माँग तेज़ हो रही है। लोग चाहते हैं कि पुजारियों को वेतन इमामों के बराबर मिलना चाहिए और इसका ऐलान जल्द से जल्द होना चाहिए। यह भी पढ़ें: दिल्ली में अब मुफ़्त की ख़ैरात कैसे बंटेगी केजरीवाल जी?

‘हिंदुत्ववादी’ दिखने की कोशिश में केजरीवाल

दिल्ली में मतदान से ठीक पहले अरविंद केजरीवाल ने हनुमान मंदिर में जाकर जब मत्था टेका था उसी के साथ यह अटकलें लगनी शुरू हो गई थीं कि ये चुनाव प्रचार तक ही है या आगे भी यही पॉलिसी चलेगी। क्योंकि अब तक केजरीवाल सार्वजनिक तौर पर यह ध्यान रखते रहे हैं कि उनकी इमेज सेकुलर के तौर पर बनी रहे। इसी मक़सद से वो अक्सर मुस्लिम त्यौहारों वग़ैरह में भी शिरकत करते रहे। पिछले पाँच साल के कार्यकाल में केजरीवाल के ढेरों फ़ैसले ऐसे रहे हैं जो मुसलमानों को खुश करने की नीयत से उठाए गए थे। हालांकि नागरिकता क़ानून को लेकर केजरीवाल की उलझन साफ़ दिखाई दे रही है। उन्हें अंदाज़ा है कि ज़्यादातर हिंदू इस क़ानून के समर्थन में हैं, लेकिन मुसलमान इसका विरोध कर रहे हैं। इसलिए उन्होंने बीच का रास्ता पकड़ा है। इसी तरह इमामों को वेतन देने का मामला भी केजरीवाल के गले की हड्डी बना हुआ है। देखना है वो पुजारियों को वेतन की तेज़ होती माँग के आगे झुकते हैं या दिखावे का ही हिंदुत्व जारी रखते हैं। यह भी पढ़ें: केजरीवाल नहीं, दिल्ली में मुस्लिम तुष्टीकरण की जीत हुई है

नीचे कुछ सोशल मीडिया पोस्ट में आप देख सकते हैं कि किस तरह से पुजारियों को वेतन के लिए केजरीवाल सरकार से माँग तेज़ होती जा रही है।

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