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मुसलमानों को क्यों लग रहा है ‘RSS के आदमी’ हैं केजरीवाल

दिल्ली में क़रीब 90 फ़ीसदी मुस्लिम आबादी के वोट पाकर मुख्यमंत्री बने अरविंद केजरीवाल जब से तीसरी बार सत्ता में आए हैं बदले-बदले से नज़र आ रहे हैं। उनके ज़्यादातर शुरुआती एलान हिंदुत्ववादी एजेंडे के इर्द-गिर्द हैं। केजरीवाल ने जिस तरह से चुनाव के फ़ौरन बाद हनुमान और राष्ट्रवाद जैसी बातें शुरू कर दी है उनसे लोगों का यह शक मज़बूत हुआ है कि कहीं वो अपनी राजनीति में फिर से कोई बड़ा यू-टर्न लेने की तैयारी में तो नहीं हैं। केजरीवाल का ये बदलाव ख़ास तौर पर मुस्लिम समुदाय में बेचैनी पैदा कर रहा है। यह चिंता सोशल मीडिया पर साफ़ नज़र आ रही है। कई जाने-माने मुस्लिम विद्वान काफ़ी समय से यह बोलते रहे हैं कि केजरीवाल वास्तव में बीजेपी और आरएसएस के ही प्लान का हिस्सा हैं और उन्हें कांग्रेस की काट के लिए खड़ा किया गया है। हम आपको बताते हैं कि इस थ्योरी के पीछे क्या कारण छिपे हुए हैं।

मुस्लिम मुद्दों पर केजरीवाल चुप

चुनाव प्रचार के दौरान आम आदमी पार्टी ने मीडिया के ज़रिए यह ख़बर उड़ाई थी कि केजरीवाल शाहीन बाग़ में ही शपथ लेंगे, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। वो अब तक एक बार भी वहाँ नहीं गए। इसी तरह अमानतुल्ला खान को डिप्टी सीएम बनाने की ख़बरें भी उड़ी थीं। अमानतुल्ला बड़े बहुमत के साथ जीते, लेकिन मात्र 3000 वोट से जीतने वाले मनीष सिसोदिया फिर से डिप्टी सीएम बना दिए गए। अमानतुल्ला को मंत्री पद तक नहीं मिला। जामिया मामले में पुलिस एक्शन का वीडियो आने के बाद भी केजरीवाल ने एक ट्वीट तक नहीं किया, जबकि गार्गी कॉलेज और जेएनयू मामले पर उनके बयान आते देरी नहीं लगी थी। इसी तरह नागरिकता क़ानून पर भी अभी तक केजरीवाल या उनके किसी मंत्री ने एक शब्द नहीं बोला है। ऊपर से अब साप्ताहिक हनुमान चालीसा पाठ जैसे कार्यक्रमों ने मुस्लिम समुदाय में शक के बीज बो दिए हैं। उन्हें लग रहा है कि उनके वोट लेकर केजरीवाल वास्तव में आरएसएस का एजेंडा लागू करने में जुटे हैं।

आरएसएस के साथ रहे हैं पुराने रिश्ते

केजरीवाल के आरएसएस के साथ पुराने रिश्ते रहे हैं। यह बात वो ख़ुद पुराने इंटरव्यू में स्वीकार कर चुके हैं। इतना ही नहीं वो 2008 तक स्वदेशी जागरण मंच जैसे आरएसएस के संगठनों के कार्यक्रमों में शिरकत करते रहे हैं। उनकी ऐसी कई तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होती रही हैं। लेकिन केजरीवाल पर शक का एक बड़ा कारण उनका विवेकानंद इंटरनेशनल फ़ाउंडेशन से जुड़ा होना माना जाता है। 2011 में शुरू हुए अन्ना आंदोलन में किरण बेदी, बाबा रामदेव, जनरल वीके सिंह जैसे कई नाम थे जो आरएसएस या विवेकानंद फ़ाउंडेशन से जुड़े हुए थे। उस आंदोलन में आरएसएस की मदद किसी से छिपी नहीं है। कई लोग दावा कर रहे हैं कि कांग्रेस के वोटों को काटने के लिए केजरीवाल को अजीत डोभाल ने खड़ा किया है। अगर हम गौर करें तो पाएँगे कि आज वो जिस सियासी स्थिति में हैं वो बीजेपी से ज़्यादा कांग्रेस के वोट काटते हैं। अब तक सिर्फ़ दिल्ली इसका अपवाद है, जहां बड़ी संख्या में बीजेपी के वोटर भी आम आदमी पार्टी को वोट देते हैं।

बिहार में वोट काटेंगे केजरीवाल!

दिल्ली चुनाव जीतने के अगले ही दिन जिस तरह से केजरीवाल ने प्रशांत किशोर के साथ मिलकर मिशन बिहार की तैयारी शुरू कर दी उससे भी कई लोगों का शक मज़बूत हो गया है। ट्विटर और फ़ेसबुक पर पिछले दो दिन से कुछ लोग लिख रहे थे कि अब बीजेपी केजरीवाल को नीतीश कुमार की मदद के लिए बिहार भेजेगी। ये तथाकथित मोर्चा उन लोगों के वोट काटेगा जो बीजेपी और जेडीयू के गठबंधन से नाराज़गी में एकजुट हो रहे हैं। ये बिल्कुल वैसे ही है जैसे पिछले बिहार विधानसभा चुनाव में असदुद्दीन ओवैसी ने अपने उम्मीदवार उतार दिए थे। कई लोग केजरीवाल को 2024 के लिए आरएसएस का प्लान-बी भी बता रहे हैं। कई लोग यह बोलते रहे हैं कि आम आदमी पार्टी उन्हीं राज्यों में चुनाव लड़ने क्यों जाती है जहां पर वो कांग्रेस के वोट काट सके। छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल काफ़ी समय से यह कहते रहे हैं कि अरविंद केजरीवाल के आरएसएस से रिश्ते हैं।

चुनाव जीतने के बाद गृह मंत्री अमित शाह से मिलने पहुँचे अरविंद केजरीवाल। इस मुलाक़ात के भी काफ़ी मायने निकाले जा रहे हैं।

नीचे इस ट्वीट में पत्रकार सुरजीत दासगुप्ता ने बताया है कि कैसे शुरुआती दौर में केजरीवाल की स्टाइल आरएसएस के स्वदेशी जागरण मंच से मिलती-जुलती थीं। इसके बाद 2006 में आरएसएस की संस्था स्वदेशी जागरण मंच के कार्यक्रम में हिस्सा लेते अरविंद केजरीवाल की तस्वीर भी इसके नीचे आप देख सकते हैं।

ट्विटर पर केजरीवाल से जुड़ी वो पुरानी ख़बरें और उनकी गतिविधियाँ उपलब्ध हैं, जिन्हें देखकर समझा जा सकता है कि उनकी जड़ें कहां पर हैं?

(न्यूज़लूज़ टीम)

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