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बिहार चुनाव से पहले इन दो राज्यों में सरकार बना सकती है बीजेपी!

राजनीतिक गलियारों में इन दिनों एक ख़बर बहुत तेज़ी से सुर्खियों में है। घटनाओं के क्रम और नेताओं की बयानबाज़ी पर नज़र डालें तो इसके पीछे कुछ सच्चाई भी नज़र आती है। ख़बर यह है कि बीजेपी बहुत जल्द दो राज्यों में सरकार बना सकती है। ये दोनों राज्य वो हैं जहां वो सत्ता में आते-आते चूक गई थी। ये दोनों राज्य हैं- महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश। पिछले कुछ दिनों में इन दोनों राज्यों के घटनाक्रम पर गौर करें तो पता चल जाएगा कि बीजेपी इन राज्यों में एक-एक कदम सत्ता की तरफ़ बढ़ा रही है। बिहार में इस साल अक्टूबर-नवंबर में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। इससे पहले बीजेपी हर हाल में महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश की सत्ता पर क़ाबिज़ हो जाना चाहती है। दोनों राज्यों में हालात उसके मनमुताबिक है। वहाँ की सरकारें आपसी विवादों में फँसी हुई हैं और अगर वो गिरती हैं तो बीजेपी को इसका दोषी ठहराना मुश्किल होगा। अगर ऐसा होता है तो बिहार चुनाव से पहले पार्टी कैडर का मनोबल ऊँचा करने के लिए यह बड़ा दांव साबित हो सकता है। बीजेपी सूत्रों के अनुसार पार्टी ने इन दोनों राज्यों के मिशन पर अपने रणनीतिकारों को लगा रखा है।

महाराष्ट्र में अंदर-अंदर बिछी है बिसात

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में बीजेपी के गठबंधन को बहुमत मिला था, लेकिन ऐन मौक़े पर सत्ता उससे छिन गई। लेकिन वापस वो स्थितियाँ बन गई हैं जिनसे सत्ता उसके पास लौटती दिख रही है। मुख्यमंत्री बनने के चक्कर में शिवसेना ने एनसीपी और कांग्रेस से गठजोड़ तो कर लिया लेकिन अब उसे लगने लगा है कि ये सत्ता उसे बहुत महँगी पड़ रही है। भीमा कोरेगाँव मामले को लेकर शिवसेना और एनसीपी में मतभेद काफ़ी गहरा चुके हैं। कांग्रेस की मुस्लिम तुष्टीकरण वाली नीतियों से शिवसेना बचाव की मुद्रा में है। उसे लग रहा है कि उसका कोर हिंदुत्ववादी वोटर कहीं बीजेपी और राज ठाकरे की तरफ़ न खिसक जाए। उद्धव ठाकरे ने पिछले दिनों कहा था कि भविष्य में बीजेपी के साथ जाने के विकल्प बंद नहीं हैं। हालाँकि इसके बाद उन्होंने बीजेपी के ख़िलाफ़ बयानबाज़ी भी की है। लेकिन ये अटकलें लगातार बनी हुई हैं कि शिवसेना टूट सकती है। शायद यही कारण है कि उद्धव ने सार्वजनिक तौर पर कहा है कि उनकी सरकार को बीजेपी अप्रैल तक गिरा सकती है। इसके पीछे बड़ा कारण यह है कि शिवसेना के कई विधायकों को लग रहा है कि पार्टी की सेकुलर राजनीति में वो दोबारा चुनाव नहीं जीत पाएँगे। ऊपर से राज ठाकरे के उभार ने अलग बेचैनी पैदा कर दी है। एक और बड़ा कारण यह है कि सत्ता के बँटवारे में सारे मलाईदार मंत्रालय एनसीपी और कांग्रेस के हिस्से में गए हैं। इस कारण प्रशासन पर उन्हीं की पकड़ है। ऐसे में आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति में कोई बड़ा उलटफेर हो जाए तो हैरानी नहीं होगी। यह भी पढ़ें: राज ठाकरे के हिंदुत्ववादी अवतार के पीछे क्या है रहस्य?

मध्य प्रदेश में बग़ावत का बारूद बिछा

महाराष्ट्र में तो बीजेपी को फिर भी बहुमत के लिए क़रीब 40 विधायकों की ज़रूरत है, मध्य प्रदेश में तो बाज़ी क़रीब-करीब उसके हाथ में ही है। सत्ताधारी कांग्रेस ने दूसरी पार्टी के कुछ विधायकों को तोड़कर अपनी सरकार को बहुमत में ला तो दिया है, लेकिन पार्टी के अंदर ही गुटबाज़ी चरम पर है। माधवराव सिंधिया नाराज़ हैं और वो मुख्यमंत्री कमलनाथ के ख़िलाफ़ आंदोलन करने की धमकी देते रहे हैं। माना जाता है कि सिंधिया के गुट के विधायकों की संख्या अच्छी-खासी है। अब तक माना जाता रहा था कि मध्य प्रदेश में बीजेपी के ही नेता कमलनाथ की सरकार गिराने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। अब जब प्रदेश अध्यक्ष के पद पर वीडी शर्मा को लाया गया है माना जा रहा है कि जल्द ही कोई बड़ा उलटफेर दिख सकता है। बीजेपी चाहती है कि राज्य कांग्रेस का झगड़ा और बढ़े ताकि कमलनाथ सरकार का पतन स्वाभाविक दिखे। साथ ही किसानों की कर्जमाफी का मुद्दा भी बहुत बड़ा है। राहुल गांधी चुनाव के दौरान वादा करते थे कि “सरकार बनने के 10 दिन में किसानों का क़र्ज़ माफ़ हो जाएगा। अगर क़र्ज़ माफ़ नहीं हुआ तो मुख्यमंत्री बदल दूँगा।” लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। सरकार के कामकाज को लेकर हर तबके में भारी नाराज़गी है। कमलनाथ सरकार पर मुस्लिम तुष्टीकरण और ईसाई धर्मांतरण को बढ़ावा देने के भी आरोप बढ़ते जा रहे हैं। ज़ाहिर है ये लक्षण बीजेपी के लिए अच्छे हैं। उसे बस मौक़ा देखकर सही समय पर दांव चलना है।

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