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क्या वाक़ई मोदी सरकार LIC को बेच रही है? जानिए क्या है सच

पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया और मीडिया के ज़रिए एक ख़बर फैलाई जा रही है कि केंद्र सरकार सरकारी बीमा कंपनी लाइफ़ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन (भारतीय जीवन बीमा निगम) यानी LIC को बेचने जा रही है। इन खबरों में दावा किया जा रहा है कि कंपनी अंदर ही अंदर कंगाल हो चुकी है और अब सरकार उसे बेचकर पल्ला झाड़ने की कोशिश में है। बीबीसी हिंदी और कई चैनलों-अखबारों ने ऐसी खबरें दीं जिनमें दावा किया गया था कि सरकार एलआईसी को बेचने वाली है। लेकिन वास्तव में यह दावा सरासर झूठ है। एलआईसी सरकार की कुछ उन कंपनियों में से है जो अच्छा मुनाफा कमा रही हैं। बीमा क्षेत्र अब विदेशी निवेश के लिए खुल चुका है ऐसे में उसे विदेशी बीमा कंपनियों से मुकाबला भी करना पड़ रहा है। नई चुनौतियों के लिए कंपनी में कुछ बदलाव के फैसले किए गए हैं। लेकिन इन्हें लेकर जिस तरह से अफवाहों का बाजार गर्म है उसे देखते ही शंका जताई जा रही है कि हो सकता है कि ताकतवर विदेशी बीमा कंपनियां ही ऐसी अफवाहें उड़ा रही हों ताकि LIC को नुकसान पहुंचाया जा सके। यह भी पढ़ें: जानिए एअर इंडिया को बेचना देश के लिए अच्छा है या बुरा

LIC को बेचने की क्या है सच्चाई?

मोदी सरकार ने अपने बजट में एलान किया है कि LIC का इनीशियल पब्लिक ऑफर यानी IPO लाया जाएगा। इसका मतलब यह हुआ कि सरकार कंपनी में अपनी कुछ हिस्सेदारी बाजार में उतारेगी, जिसे आम लोग खरीद सकेंगे। ऐसा तब होता है जब किसी कंपनी को लेकर जनता में विश्वास बहुत हो। इससे कंपनी को नई पूंजी मिलती है जिससे उसका विस्तार किया जाता है। अभी LIC की कुल संपत्तियां (net assets) 31 लाख करोड़ से भी अधिक हैं। यानी कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन TCS और RIL जैसी बड़ी प्राइवेट कंपनियों से भी बहुत अधिक है। LIC ने शेयर बाजार में बहुत सारी कंपनियों में हिस्सेदारी खरीद रखी है। इसके बीमा कारोबार की कमाई 5.61 लाख करोड़ रुपये के आसपास है। इसमें से 60 फीसदी निजी और समूह बीमा योजनाओं से आता है। कंपनी का नेट प्रॉफिट (शुद्ध मुनाफा) सालाना 2.6 लाख करोड़ रुपये है। अगर ऐसी कंपनी का IPO आएगा तो बाजार में बड़ी मात्रा में पूंजी आएगी। इसकी जरूरत लंबे समय से समझी जा रही थी। चूंकि बीमा सेक्टर अब पूरी तरह से खुल चुका है ऐसे में इस कदम के लिए सबसे सही समय यही माना जा रहा है। यह भी पढ़ें: 2000 के नोट पर मोदी सरकार का बड़ा कदम

सरकार ही रहेगी LIC की मालिक

इसे उदाहरण से समझें कि अगर अंबानी की कंपनी रिलायंस अपनी किसी कंपनी का IPO लाकर शेयर बाजार में उतरती है तो इसका मतलब यह नहीं हुआ कि कंपनी बिक गई। उसकी कुछ हिस्सेदारी आम लोगों को मिल जाती है लेकिन कंपनी की सर्वेसर्वा मालिक रिलायंस ही रहती है। उसी तरह LIC की मालिक भी केंद्र सरकार ही रहेगी। IPO से उसके पास अतिरिक्त पूंजी आ जाएगी जो जनहित के दूसरे कामों में खर्चे किए जा सकेंगे। इससे न तो LIC के कामकाज पर कोई असर पड़ेगा, न ही इससे बीमा पॉलिसी खरीदने वाले करोड़ों लोगों पर रत्तीभर कोई नुकसान होगा। उलटा कंपनी में पेशेवर तौर-तरीकों की शुरुआत होगी, जिससे ग्राहकों को ही फायदा होगा। उदाहरण के लिए बीमा के प्रीमियम पर छूट या ऐसी दूसरी स्कीमें शुरू करना आसान होगा। अगर यह नहीं हुआ तो विदेशी बीमा कंपनियां LIC को बाजार से बाहर कर देंगी। यह भी पढ़ें: बिक रही BSNL के लिए आज क्यों नहीं है कोई रोने वाला

कई बड़े बैंकों में है LIC का हिस्सा

LIC कोई मामूली कंपनी नहीं है। ये वो महाकंपनी है, जिसके पास कई सरकारी और देसी प्राइवेट बैंकों की बड़ी हिस्सेदारी पहले से है। स्टेट बैंक, ICICI बैंक और एक्सिस बैंक में इसकी करीब 10-10 फीसदी हिस्सेदारी है। इसके अलावा IDBI बैंक की तो ये 51 फीसदी हिस्सेदारी रखती है। ऐसी कंपनी पर कोई भी सरकार किसी हालत में अपना नियंत्रण खत्म करना नहीं चाहेगी। जहां तक इसे बाजार में उतारने की बात है यही वो तरीका है जिससे वो न सिर्फ दुनिया भर की चुनौतियों का खुलकर मुकाबला कर पाएगी, बल्कि दुनिया भर में अपने पैर भी पसार सकेगी।

अफ़वाहों के पीछे का आधार क्या है?

जब भी आप निवेश करते हैं तो कुछ में आपको फ़ायदा होता है और कुछ में नुक़सान। पिछले दिनों में LIC ने भी कुछ ऐसी प्राइवेट कंपनियों पर दांव लगाया जो अब डूबने की कगार पर हैं। इनमें आलोक इंडस्ट्रीज, एबीजी शिपयार्ड, अम्टेक ऑटो, मंधाना इंडस्ट्रीज, जेपी इंफ्राटेक, ज्योति स्ट्रक्चर्स, रेनबो पेपर्स, ऑर्किड फार्मा, रिलांयस कॉम्युनिकेशंस, जीटीएल इंफ्रा, इलेक्ट्रोस्टील कास्टिंग्स, ऑप्टो सर्किट्स इंडिया, जायलॉग सिस्टम्स, रोल्टा इंडिया, अबॉन ऑफशोर, श्रीरेणुका शुगर्स और मॉनेट इंडस्ट्रीज शामिल हैं। 2017 के अंत तक एलआईसी के पास कुल 378 कंपनियों में 1 फीसदी या उससे ज्यादा की हिस्सेदारी थी। जिनमें से कुछ अच्छा बिजनेस नहीं कर पाईं, जबकि कुछ ने बहुत अच्छा मुनाफा कमाया। एलआईसी के मैनेजमेंट ने माना था कि उन्होंने BSE 200 कंपनियों में भी निवेश किए थे, जो सही फैसला साबित नहीं हुआ। इसके कारण घाटा कुछ बढ़ा, लेकिन कंपनी की सेहत को लेकर फैलाई जा रही अफवाहें सरासर गलत हैं। यह बात लोग भूल जाते हैं कि LIC के निवेशकों को भारत सरकार ‘सॉवरेन गारंटी’ देती है। इसका मतलब यह हुआ कि अगर किसी कारण से कंपनी डूब गई तो भी निवेशकों को पूरे पैसे की भरपाई सरकार करेगी।

नीचे यह ट्वीट एक चैनल के संपादक ने किया है, जिस पर एक सोशल मीडिया यूज़र ने अपना कमेंट किया है। इसे पढ़कर आप समझ सकते हैं कि LIC को लेकर फैलाई जा रही अफवाहों की गहराई और सच्चाई क्या है।

देश भर के क्षेत्रीय अख़बारों में ऐसी कई ख़बरें छपवाई गईं। शक है कि इनके बदले में पैसा दिया गया। ताकि कंपनी को नुक़सान पहुँचाया जा सके।
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