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ये दिल्ली में बसे लाखों बांग्लादेशियों और रोहिंग्या की भी जीत है!

दिल्ली में आम आदमी पार्टी चुनाव जीत गई, लगभग पिछली बार जितने ही बहुमत के साथ। अरविंद केजरीवाल मुख्यमंत्री बनेंगे, लेकिन असली चिंता यह है कि 62 में बड़ी संख्या में विधायक एक खास मज़हब के हैं। इस समुदाय के लोग चुनाव से पहले ही शाहीन बाग के असली मास्टरमाइंड विधायक माने जाने वाले अमानतुल्ला खान को उपमुख्यमंत्री बनाने के लिए लामबंदी शुरू कर चुके थे। अमानतुल्ला खान को दिल्ली वक्फ बोर्ड और दिल्ली सरकार के खाते से एक खास मज़हबी समुदाय के लोगों को नौकरियां, नकदी और अन्य सुविधाएं देने के लिए जाना जाता है। बस व्यक्ति उस खास समुदाय से हो, वो मदद लेकर पहुँच जाते हैं। बेशक भारत के किसी भी प्रदेश का हो। मदद घर तक पहुंचाई जाती है। झारखंड में चोरी करते हुए पकड़े गए तबरेज़ अंसारी के घर तक भी दिल्ली के टैक्स पेयर्स के पैसों से मदद पहुंचाई गई थी। ज़ाहिर है इस जीत के बाद अब पूरे देश में कहीं भी कोई मुस्लिम तथाकथित तौर पर पीड़ित होगा तो दिल्ली सरकार उसे 5 लाख से लेकर 1 करोड़ रुपये तक की मदद पहुँचाएगी। ऐसी कोई मदद हिंदू पीड़ितों के लिए नहीं होगी, दिल्ली वालों के लिए भी नहीं… बाहर वालों के लिए तो सवाल ही नहीं उठता।

बांग्लादेशियों का क़ब्ज़ा और भी बढ़ेगा

दिल्ली में वो सभी लोग चिंता में हैं जो जानते-समझते हैं कि बांग्लादेशियों की आबादी कितनी तेज़ी से उनकी तरफ़ बढ़ रही है। उन्हें सिर्फ़ पुलिस के दम पर नहीं हटाया जा सकता, क्योंकि दिल्ली सरकार उनके काग़ज़ात से लेकर रहने और बसने तक के बंदोबस्त कर रही है। वैसे भी पिछले पाँच साल में बांग्लादेशी, रोहिंग्या और देशविरोधी तत्व बेहद ताकतवर हो गए हैं। तुलसीनगर इलाक़े का एक वीडियो कुछ समय पहले वायरल हुआ था, जहां हिंदुओं को मकान छोड़-छोड़कर जाना पड़ रहा है, क्योंकि मुस्लिम आबादी अधिक हो गई है और वो हिंदुओं को रहने देने को तैयार नहीं हैं। इस इलाक़े में मंदिरों के दरवाजों पर ताले पड़ चुके हैं। श्रीनिवासपुरी में सिर्फ एक तबके के लोग कथित बहुसंख्यक लोगों के मकानों पर काबिज हो रहे हैं। सीलमपुर, जाफराबाद, झिलमिल, वेलकम जैसे इलाकों में अब पुलिसवाले भी घुसने से डरने लगे हैं। ओखला, शाहीन बाग का यह हाल तो काफ़ी पहले से ही हो चुका है। दिल्ली के अनेक इलाक़ों से बची-खुची हिंदू आबादी का पलायन लगातार जारी है। यह भी पढ़ें: केजरीवाल नहीं, दिल्ली में मुस्लिम तुष्टिकरण की जीत हुई है

शाहीन बाग़ का प्रयोग कामयाब रहा है

बीजेपी समझ रही थी कि शाहीन बाग के कारण हिंदुओं की आँख खुलेगी और उसे ज़्यादा सीटें मिल जाएगी, लेकिन हुआ उल्टा। वास्तव में शाहीन बाग़ के प्रदर्शन का फ़ायदा आम आदमी पार्टी को हुआ है। हिंदू तो सेकुलर बने रहे लेकिन केजरीवाल हिंदुओं के टैक्स के पैसे से मस्जिदों के इमामों को ख़ैरात बाँटते रहे। टैक्स का जो पैसा बाक़ी बचा उससे उन्होंने बिजली-पानी फ़्री कर दिया। हिंदुओं को इससे ज़्यादा कुछ चाहिए भी नहीं था। पिछले पाँच साल में गली और सड़क की मरम्मत नहीं हुई, लेकिन उसकी चिंता भी किसे है, बिजली, पानी तो मुफ़्त है। ऐसा करके केजरीवाल ने तो रॉबिनहुड की इमेज बना ली और बीजेपी इन तमाम मुद्दों को जनता तक पहुँचाने में भी नाकाम रही। इसके बजाय बीजेपी की केंद्र सरकार हिंदुओं से ज़्यादा कहीं न कहीं मुसलमानों को ही खुश करने में लगी रही। तभी तो शाहीन बाग़ में कोर्ट की छूट के बावजूद पुलिस एक्शन नहीं लिया गया। कुल मिलाकर बीजेपी के लिए ये सोचने का मौक़ा है कि वो कहां पर अपनी ऊर्जा खर्च कर रही है और कहां पर उसे करना चाहिए।

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