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“मोदी आरक्षण ख़त्म कर देगा” की अफ़वाह फैलाने में जुटी कांग्रेस

Photo tweeted by @ANI

मोदी सरकार के ख़िलाफ़ मुद्दों की तलाश में जुटी कांग्रेस को नया मसाला मिल गया है। ये मामला है आरक्षण का। दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक आदेश में प्रमोशन में आरक्षण पर ढील दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने माना कि पदोन्नति में आरक्षण बुनियादी अधिकार नहीं है और ये राज्य सरकार की मर्ज़ी है कि वो आरक्षण दे या न दे। दरअसल संविधान में भी यही व्यवस्था है। क्योंकि अनुच्छेद 16 (4-ए) के तहत प्रदेश सरकारें आरक्षण देने या नहीं देने को लेकर स्वतंत्र हैं। कोई भी न्यायालय उन्हें प्रमोशन में आरक्षण को लेकर आदेश नहीं दे सकता। लेकिन कांग्रेस ने अब ये कहना शुरू कर दिया है कि बीजेपी आरक्षण को ख़त्म करने की साज़िश रच रही है। इसे लेकर कांग्रेस ने लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव का नोटिस भी दिया है। जिसमें वो यह दावा कर रही है कि ‘सरकारी सेवाओं में अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए आरक्षण को कम किया जा रहा है। जबकि ऐसा कुछ भी नहीं है। समझना मुश्किल नहीं कि कांग्रेस की मंशा इस मामले में भ्रम फैलाने की है। इससे पहले दलित उत्पीड़न पर सुप्रीम कोर्ट के ही आदेश पर कांग्रेस के तंत्र ने यह अफ़वाह उड़ा दी थी कि मोदी सरकार आरक्षण ख़त्म करने जा रही है। इसके बाद पूरे देश में कई जगह हिंसा हुई थी।

संसद से लेकर सोशल मीडिया तक

संसद में स्थगन प्रस्ताव के अलावा सोशल मीडिया पर भी कांग्रेस के पूरे तंत्र ने अफ़वाह उड़ाने का काम शुरू कर दिया है। राहुल गांधी ने संसद में इस मामले पर बयान देते हुए कहा कि मोदी सरकार आरक्षण ख़त्म कर रही है और कांग्रेस ऐसा नहीं होने देगी। दूसरी तरफ़ कांग्रेस के सांसद उदित राज और कांग्रेस के पैसे पर पत्रकारिता करने वाले कई लोग इस बारे में झूठ फैलाने में जुट गए हैं। इससे पहले कल कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने बैंगलोर में प्रेस कॉन्फ़्रेंस करके ऐसी-ऐसी बातें कहीं थीं जिनका मोदी सरकार से कोई लेना-देना नहीं था। उन्होंने ऐसे जताया मानो सुप्रीम कोर्ट ने ये आदेश मोदी सरकार के दबाव में लिया है। नागरिकता क़ानून पर देशभर में बुरी तरह से घिरने के बाद कांग्रेस को नए मुद्दे की तलाश थी आरक्षण की शक्ल में ये मुद्दा उसे मिल गया है, क्योंकि इससे हिंदुओं को जातीय आधार पर तोड़ना बहुत आसान रहता है।

कांग्रेस सरकार ने ही छीना था आरक्षण

दरअसल ये पूरा मामला उत्तराखंड में कांग्रेस की पिछली हरीश रावत सरकार से जुड़ा हुआ है। 5 सितंबर 2012 को तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने प्रदेश में सरकारी नौकरियों में प्रमोशन में आरक्षण की व्यवस्था को ख़त्म करने का आदेश जारी किया था। देहरादून हाई कोर्ट में इस सरकारी आदेश को चुनौती दी गई, जिस पर 1 अप्रैल 2019 को आदेश आया। हाई कोर्ट ने कांग्रेस सरकार के उस आदेश को रद्द कर दिया। हाई कोर्ट के इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई, जहां पर आदेश आया कि पदोन्नति में आरक्षण बुनियादी अधिकार नहीं है और संविधान के मुताबिक़ यह उस राज्य की मर्ज़ी है कि वो आरक्षण दे या न दे। ज़ाहिर बात है कि ये आदेश वास्तव में कांग्रेस की सरकार का था, लेकिन अब चूँकि वो विपक्ष में है तो इसी बहाने उसे देश में ग़लतफ़हमी फैलाने और अनुसूचित जातियों, जनजातियों और पिछड़ों को भड़काने का सुनहरा मौक़ा मिल गया है।

नीचे आप कुछ सोशल मीडिया पोस्ट पढ़कर समझ सकते हैं कि कांग्रेस का ये अफवाही तंत्र किस तरह से सक्रिय हो गया है।

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