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क्या सत्ता बचा पाएँगे अरविंद केजरीवाल? क्या कहती है कुंडली

rk-sahuदिल्ली में विधानसभा चुनाव पर सबकी नज़रें टिकी हैं। पूरा देश जानना चाहता है कि दिल्ली में अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी अपनी सत्ता बचाने में कामयाब रहेगी या फिर बीजेपी उन्हें शिकस्त देने में कामयाब होगी। यह माना जा सकता है कि इस चुनाव से काफ़ी हद तक देश की राजनीति की दिशा तय होगी। इसी नज़रिए से आज मैं केजरीवाल की कुंडली की विवेचना कर रहा हूं। इनकी कुंडली 16 अगस्त 1968 की रात के 23 बजकर 46 मिनट पर हिसार डिस्ट्रिक्ट की है। वृषभ लग्न में ही चंद्रमा बैठा है ,राशि भी इनकी वृषभ है, जन्म एवं चंद्र लग्न से जिसका योगकारक स्वामी शनि द्वादश स्थान में नीच का बैठा हुआ है जोकि वर्गोत्तम नीच का है, मंगल भी तीसरे भाव में इसका नीच का है, जो की अस्त भी है, चतुर्थ भाव में सूर्य बुद्ध शुक्र का एक राजयोग बना हुआ है, गजकेसरी योग भी है, लेकिन वाणी का कारक बुध भी अस्त है। साथ ही अष्टमेश बृहस्पति भी इसी भाव में है, जो कि राजयोग भंग भी कर रहा है। सारे गृह कालसर्प योग की परिधि में घिरे हुए हैं।

नीच और मौकापरस्त इंसान के योग

केजरीवाल की कुंडली में योग कारक शनि के नीच का होने से वो खुद भी वाक़ई एक नीच इंसान हैं। तृतीय पराक्रम भाव में नीच का व अस्त मंगल होने से ये मौकापरस्त इंसान बन गए हैं। वो बहुत डरपोक इंसान हैं, असुरक्षा की भावना से हमेशा ही घिरे रहते हैं। साथ ही जब इसकी जेब खाली होगी तो ये हरेक की आवभगत, खुशामद और चमचागिरी करेंगे। पर जैसे ही इनकी जेब भरेगी ये उन्ही का तिरस्कार करने लगेंगे। जिनकी वजह से इन्होंने पद पाया है। फिर वाणी का कारक बुध जोकि अस्त है, इसलिए जब भी बोलेंगे दुष्टवाणी बोलेंगे। कुंडली के इसी योग के कारण अरविंद केजरीवाल स्वभाव से बेहद चालाक और धूर्त हैं, इसके बावजूद वो चेहरा ऐसा बनाकर रखने में सफल होते हैं मानो उन्हें वो बेहद भोले-भाले और दुखी हैं। ऐसे लोग दोहरा जीवन जीते हैं बाहर की दुनिया के लिए उनका एक चेहरा होता है और अंदर उनका बिल्कुल अलग ही रूप सामने आता है।

दोबारा सत्ता में दोबारा वापसी नहीं

केजरीवाल के चतुर्थ सुख भाव में जो इनका राजयोग साथ ही गजकेसरी योग है वो फलित हो गया है। इसी वजह से ये दो बार दिल्ली का मुख्यमंत्री भी बन गए। परन्तु अष्टमेश बृहस्पति के साथ होने से राजयोग अब इसका भंग है। ये इंसान किसी का भला नहीं कर सकता, फिर सारे गृह कालसर्प योग की परिधि में घिरे हुए हैं, जो कि बहुत ही अनिष्टकारी दोष है। ये फिर दोबारा किसी राजसत्ता में नहीं आएगा। काठ की हांड़ी बार-बार नहीं चढ़ती। आगे भी उनकी राजनीति का पतन ही होगा। धीरे-धीरे उनकी राजनीतिक पार्टी का भी अंत हो जाएगा। आखिर में यह व्यक्ति बहुत ही स्वार्थी है, समाज और राष्ट्र के लिए घातक ही सिद्ध होगा। ज्योतिषगण अपना सुझाव दे सकते हैं, कुंडली की विवेचना में यदि कुछ गलत लगा हो तो निसंकोच तर्क के साथ बताएं।

(लेखक आरके साहू जाने-माने ज्योतिषाचार्य हैं, यह पोस्ट उनके फेसबुक पेज से साभार ली गई है)

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