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चुनाव हारे तो जेल जाएँगे केजरीवाल!, करप्शन के इन मामलों में हैं आरोप

दिल्ली चुनाव से पहले अरविंद केजरीवाल की बौखलाहट लगातार सामने आ रही है। ख़ास तौर पर शाहीन बाग़ में अपने ही कार्यकर्ता से गोली चलवाने के मामले के खुलासे ने उनके अंदरूनी डर को सामने ला दिया है। केजरीवाल चुनावी नतीजों को लेकर इतना डरे क्यों हुए हैं, इस बारे में हमने कुछ जानकारों से बात की। जो जानकारियाँ सामने आ रही हैं वो इशारा कर रही हैं कि संवैधानिक पद से हटते ही केजरीवाल के लिए क़ानूनी मुश्किलों की शुरुआत होना तय है। दरअसल उनके ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार और सरकारी पद के दुरुपयोग जैसे कई आरोप दर्ज हैं जिनमें उन्हें जेल भी जाना पड़ सकता है। इनमें से ज़्यादातर मामले वो हैं जिनकी जाँच की सिफ़ारिश उपराज्यपाल नजीब जंग ने की थी। चूँकि केजरीवाल सीएम पद पर हैं इन सारे मामलों में जाँच बेहद धीमी गति से चल रही है। हम आपको बताते हैं करप्शन के वो 5 बड़े मामले जिनमें केजरीवाल के सिर पर तलवार लटक रही है। यह भी पढ़ें: केजरीवाल के लिए गले की हड्डी बन गया है शाहीनबाग

1. वक़्फ़ बोर्ड घोटाले की जांच

2016 में उपराज्यपाल नजीब जंग ने दिल्ली वक़्फ़ बोर्ड को भंग कर दिया था और इसमें चल रही धाँधलियों की जाँच के लिए सीबीआई को सिफ़ारिश भेज दी थी। सत्ता में आने के बाद केजरीवाल ने अपने कट्टरपंथी विधायक अमानतुल्ला खान को वक़्फ़ बोर्ड का अध्यक्ष बना दिया था। उन पर बोर्ड में हो रही भर्तियों में गड़बड़ी का आरोप लगा। कुछ लोगों ने यह भी आरोप लगाए कि आम आदमी पार्टी पैसे लेकर लोगों की बहालियां कर रही है। ज़ाहिर है ये आरोप सीधे केजरीवाल पर थे। उस मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो यानी एसीबी छापेमारी भी कर चुकी है। मोहम्मद मुस्तफा नामक व्यक्ति से शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने वक्फ बोर्ड में भर्तियों की जाँच शुरू की थी। 2018 में बोर्ड का गठन दोबारा किया गया। लेकिन धांधली के आरोपों का आना जारी रहा। फ़िलहाल केजरीवाल जब तक सत्ता में हैं इस पूरे मामले की सच्चाई सामने आने की उम्मीद कम ही है। क्योंकि जाँच के लिए ज़रूरी है कि राज्य सरकार उसमें सहयोग करे। यह भी पढ़ें: जासूसी से अय्याशी तक… केजरीवाल का कच्चा चिट्ठा

2. पीडब्लूडी घोटाले में फँसे

ये वो मामला है जिसमें सीधे तौर पर अरविंद केजरीवाल पर आरोप है। दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा इस मामले की जाँच कर रही है और इस मामले में वो अपनी शुरुआती जाँच पूरी कर चुकी है। इस मामले में केजरीवाल के अलावा उनके रिश्तेदार पर आरोप है कि दिल्ली में सड़कों और सीवर लाइन बनाने के ठेकों में उन्होंने बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार किया। केजरीवाल के साढू सुरेन्द्र बंसल के बेटे विनय बंसल को एसीबी गिरफ्तार भी कर चुकी है। मुख्यमंत्री के रिश्तेदार पर जाली दस्तावेजों के आधार पर फर्जी कंपनियों के नाम से ठेके लेने और उसके लिए जाली बिल बनाकर भुगतान लेने का आरोप है। इस मामले में एसीबी ने तीन एफआईआर दर्ज की थी। जिनमें से एक सुरेंद्र बंसल की कंपनी के खिलाफ थी। एसीबी ने पिछले साल 9 मई को कंपनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी।

3. बिजली घोटाले में शिकंजा

केजरीवाल दिल्ली में बिजली मुफ़्त कर देने का श्रेय लेते हैं। लेकिन यही मामला उनके गले की हड्डी भी बना हुआ है। केजरीवाल पर बिजली कंपनियों को ग़लत तरीक़े से 10 हजार करोड़ रुपये का फायदा पहुंचाने का आरोप है। केजरीवाल सरकार ने 200 यूनिट बिजली पूरी तरह मुफ़्त कर दी थी, जिसके लिए सब्सिडी सरकारी ख़ज़ाने से दी जाती रही। कांग्रेस नेता और पूर्व ऊर्जा मंत्री हारून यूसुफ ने आरोप लगाया था कि निजी बिजली कंपनियों को 8532 करोड़ रुपए की सब्सिडी देना आपने आप में एक बड़ा घोटाला है। क्योंकि केजरीवाल सरकार ने दिल्ली से ये वादा किया था कि सब्सिडी सीधे लोगों के खाते में डाली जाएगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। बीजेपी और कांग्रेस इस मामले की जाँच सीबीआई से कराने की माँग करती रही हैं। यह भी पढ़ें: जानिए निर्भया के बलात्कारियों को कैसे बचा रहे हैं केजरीवाल

4. मास्क की ख़रीद में घोटाला

अक्टूबर, नवंबर के दौरान जब दिल्ली में प्रदूषण का स्तर ज़्यादा होता है उस दौरान सरकार ने बड़े पैमाने पर मास्क की ख़रीद की थी। कहा गया कि ये मास्क स्कूली बच्चों को बाँटे जाएँगे। दावा किया जाता है कि ये ख़रीदारी क़रीब 10 करोड़ रुपये में की गई थी। लेकिन बहुत कम बच्चों को ही मास्क बाँटे गए थे। सबसे हैरानी वाली बात यह रही कि मास्क बाँटने के लिए विज्ञापनों पर 40 करोड़ रुपये खर्च किए गए।

5. स्कूल बनाने के नाम पर घपला

केजरीवाल सरकार पर शिक्षा के नाम पर 2000 करोड़ रुपये के स्कूल घोटाले का आरोप है। सरकार कहती है कि स्कूलों के कमरे बनवाने में 25 लाख रुपये का खर्च बैठा। जबकि बाज़ार लागत 5 लाख रुपये के आसपास होनी चाहिए। कई स्कूलों में बिना बनाए ही कमरों का भुगतान कर दिया गया। इस सिलसिले में एसीबी ने विजिलेंस विभाग से शिकायत भी की गई और जांच के लिए इजाजत मांगी। जिसके बाद स्कूलों में कमरों के निर्माण में हुए घोटालों की जांच एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) को सौंपी गई। दरअसल एक आरटीआई में ये खुलासा हुआ कि एक स्कूल का कमरा 24,85,323 रुपए में बनाया है। आरटीआई से पता चला कि 312 कमरे 77,54,21,000 रुपये में और 12748 कमरे 2892.65 करोड़ रुपये में बनाए गए हैं।

इसके अलावा सीएनजी किट, सीसीटीवी ख़रीद के सौदे, स्वास्थ्य विभाग में घोटाले और हवाला जैसे ढेरों मामले हैं जो कभी भी केजरीवाल के लिए मुसीबत का कारण बन सकते हैं। इन्हीं से बचने के लिए वो हर हाल में सत्ता बचाए रखना चाहते हैं।

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