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क्या दीपिका पादुकोण का दाऊद इब्राहिम से कनेक्शन है?

दिल्ली की जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी यानी जेएनयू में एक लेफ्ट विचारधारा के छात्र-छात्राओं से मिलने पहुँची दीपिका पादुकोण को देखकर बहुत सारे लोगों को हैरानी हुई होगी। कुछ लोग कह रहे हैं कि शायद वो अपनी नई फ़िल्म ‘छपाक’ के प्रोमोशन के चक्कर में जेएनयू आई हैं। लेकिन यह बात पूरी तरह सही नहीं है। दीपिका पादुकोण और फिल्म की पीआर एजेंसी को अच्छी तरह पता था कि जेएनयू में जाने से उनकी इमेज ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ का साथ देने वाली हीरोइन के तौर पर हो जाएगी और इसका नुकसान फिल्म को हो सकता है। ऐसी ही हुआ भी और जैसे ही दीपिका के जेएनयू जाने की खबर आई थोड़ी ही देर में ट्विटर पर #boycottchhapaak ट्रेंड होने लगा। फेसबुक पर भी लोगों ने ‘छपाक’ फिल्म न देखने की अपील करनी शुरू कर दी। तो सवाल उठता है कि ऐसी क्या मजबूरी रही होगी कि दीपिका पादुकोण को जेएनयू में जाकर ऐसे छात्र संगठन के साथ खड़ा होना पड़ा, जिस पर कैंपस में हिंसा करने का आरोप है? हमने इसका जवाब पता करने की कोशिश की तो जो जानकारियां हाथ लगीं वो चौंकाने वाली हैं।

दीपिका पादुकोण का ‘दाऊद कनेक्शन’!

बांग्लादेश की मशहूर मैगज़ीन ‘वीकली ब्लिट्ज़’ (Weekly Blitz) ने मई 2014 में एक लेख छापा था, जिसमें दावा किया गया था कि दीपिका पादुकोण ने दुबई में दाऊद इब्राहिम से चोरी-छिपे मुलाकात की है। इसी खबर में बताया गया कि दीपिका पादुकोण हॉलीवुड में टॉम क्रूज़ के साथ अपनी आने वाली फिल्म के लिए इन्वेस्टर की तलाश में हैं और उसी सिलसिले में दाऊद से उनकी मुलाकात हुई। इस मुलाकात में दाऊद का करीबी दोस्त अजीज मोहम्मद भाई भी मौजूद था। मैगजीन ने बताया था कि ये फिल्म भारतीय मूल की एक अमेरिकी लड़की की कहानी है, जो सीआईए की एजेंट होती है। फिल्म की शूटिंग अमेरिका के अलावा भारत और लेबनान में होनी थी। कहानी के मुताबिक दीपिका एक इस्लामी आतंकी संगठन में पैठ बनाने में कामयाब हो जाती हैं और फिर उसके टॉप कमांडर की हत्या कर देती हैं। दाऊद शुरू में इस प्रोजेक्ट में पैसा लगाने से हिचक रहा था, लेकिन अजीज मोहम्मद के कहने पर मान गया। फिल्म के लिए यहां तक भी प्लान बन गया था कि इसे इंग्लिश के अलावा हिंदी में भी डब किया जाएगा और भारत में इसे रिलीज़ किया जाएगा।

ख़ुफ़िया एजेंसियों को लग गई थी ख़बर

कहते हैं कि भारतीय एजेंसियों को दीपिका और दाऊद की मुलाक़ात की ख़बर लग गई थी। जिसके कारण ये पूरी फ़ंडिंग और फ़िल्म खटाई में पड़ गई। हालाँकि बिना सबूत के वो दीपिका के ख़िलाफ़ कोई भी क़ानूनी कार्रवाई नहीं कर सके। ऐसा दावा किया जाता है कि इस मुलाक़ात के बाद से दीपिका दाऊद के दबाव में रहने लगी थीं। क्योंकि वो मुलाक़ात की पोल खोल सकता है। हालाँकि इस मुलाक़ात के बारे में बांग्लादेशी पत्रिका के अलावा कहीं भी कोई चर्चा देखने को नहीं मिलीं। बाद में उस बांग्लादेशी पत्रिका ने भी बिना कोई कारण बताए वो समाचार अपनी वेबसाइट से हटा दिया। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने कभी इस बारे में कुछ भी औपचारिक तौर पर नहीं कहा। लेकिन समय-समय पर कुछ ऐसी घटनाएँ होती रहीं, जिनसे दीपिका को लेकर अटकलों का बाज़ार गर्म रहा। इसमें सबसे अहम यह कि दीपिका पादुकोण को कभी कोई बड़ा सरकारी पुरस्कार जैसे नेशनल फ़िल्म अवॉर्ड नहीं मिला। आम तौर पर बड़े कलाकार किसी न किसी मौक़े पर देश के प्रधानमंत्री के साथ दिख जाते हैं, लेकिन दीपिका पादुकोण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ कभी मुलाक़ात नहीं हुई। माना जाता है कि ये दूरी सोची-समझी थी।

दाऊद से मुलाक़ात का दीपिका पर साया

इसी का असर रहा कि दीपिका पादुकोण को समय-समय पर होने वाले कई सरकारी कार्यक्रमों से दूर रखा गया। 2016 में फ़िल्म बाजीराव मस्तानी या पीकू के लिए दीपिका पादुकोण को नेशनल फ़िल्म अवॉर्ड मिलना लगभग तय माना जा रहा था, लेकिन कंगना रनौत बाज़ी मार ले गईं। उस वक़्त मीडिया में ऐसी ख़बरें भी छपी थीं कि कुछ अज्ञात कारणों से दीपिका का नाम ऐन मौक़े पर कट गया था। वो इसे लेकर बेहद नाराज़ भी थीं। इसी तरह नवंबर 2017 में हैदराबाद में होने वाले Global Entrepreneurship Summit (GES) में दीपिका पादुकोण को जाना था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की बेटी इवांका ट्रंप के स्वागत में आयोजित इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी पहुंच रहे थे। तभी ऐन मौके पर दीपिका पादुकोण का नाम मेहमानों की लिस्ट से हट गया। हालांकि तब कहा गया कि ‘पद्मावती’ को लेकर चल रहे विवाद के कारण शायद ऐसा किया गया होगा। इसके बाद जनवरी 2019 में करन जौहर की अगुवाई में फिल्मी कलाकारों की एक टीम प्रधानमंत्री के दफ्तर में उनसे मिली थी। इस टीम में दीपिका के पति रनवीर सिंह थे, लेकिन दीपिका नज़र नहीं आईं। ऐसा बताते हैं कि उनके नाम को प्रधानमंत्री कार्यालय की तरफ से ही हरी-झंडी नहीं मिली थी। हालांकि इस सूचना के बारे में कोई औपचारिक पुष्टि हमारे पास नहीं है।

पिछले 5 साल में मोदी सरकार ने कुछ बहुत छिटपुट कामों में ही दीपिका पादुकोण को शामिल किया है। जैसे कि चुनाव में वोट देने के लिए दीपिका पादुकोण ने लोगों से अपील की थी। हालाँकि वो चुनाव आयोग की पहल थी। इसके अलावा 2019 की दिवाली के मौक़े पर महिला सशक्तिकरण के लिए “भारत की लक्ष्मी” नाम से अभियान शुरू किया गया था। इसमें दीपिका पादुकोण और बैडमिंटन स्टार पीवी सिंधु को लिया गया था। अभियान की जानकारी देने के लिए एक वीडियो जारी किया गया था। पीवी सिंधु ने इस बारे में ट्वीट किया तो उसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को टैग किया, लेकिन दीपिका पादुकोण ने पीएम का नाम तक नहीं लिखा, जबकि वो उन्हीं का अभियान था। बदले में प्रधानमंत्री ने सिर्फ़ पीवी सिंधु को रीट्वीट किया और उसी में दीपिका पादुकोण का नाम लिख दिया, वो भी पीवी सिंधु के बाद। इन बातों से यही संकेत मिलता है कि मोदी सरकार को दीपिका पादुकोण के बारे में जानकारी थी और उन्होंने उस हिसाब से इतनी दूरी बनाकर रखी कि किसी विवाद की स्थिति में उसकी तरफ़ अंगुली न उठे।

नीचे बांग्लादेश की न्यूज़ पत्रिका की ख़बर का स्क्रीनशॉट आप देख सकते हैं। यह ख़बर अब वेबसाइट के पन्ने से ग़ायब है।

संदर्भ:
1. https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/bollywood/photo-features/bollywood-actors-who-will-never-be-friends/Deepika-Padukone-upset-over-losing-National-Award-to-Kangana-Ranaut/photostory/51615411.cms

2. https://economictimes.indiatimes.com/magazines/panache/ladies-first-this-time-bwood-meet-with-pm-modi-inclues-alia-bhatt-bhumi-pednekar/articleshow/67472143.cms

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