Home » Loose Top » मनोहर पर्रीकर… आईआईटी छात्र जो स्वयंसेवक भी रहा
Loose Top

मनोहर पर्रीकर… आईआईटी छात्र जो स्वयंसेवक भी रहा

मनोहर पर्रीकर को हर कोई अपने-अपने तरीके से याद कर रहा है। किसी के लिए वो बेहद सुलझे हुए राजनेता थे तो किसी के लिए एक बेहतरीन इंसान। लेकिन पर्रीकर की इन सारी खूबियों के पीछे जो कारण था वो है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस के साथ उनका जुड़ाव। खुद मनोहर पर्रीकर ने कई मौकों पर यह बात कही है कि उनके अंदर देशप्रेम और जनता की सेवा के संस्कार संघ से मिले। इतना ही नहीं 2016 में पाकिस्तानी कब्जे वाले इलाकों में जब सर्जिकल स्ट्राइक हुई थी तो किसी ने पर्रीकर से पूछा कि ऐसे फैसलों पर अमल के लिए मनोबल कैसे पैदा होता है तो जवाब था कि इसके पीछे संघ की शिक्षा है। आरएसएस की शिक्षा की बदौलत ही यह फैसला संभव हो पाया। उन्होंने यह बयान रक्षा मंत्रालय और निरमा यूनिवर्सिटी के एक कार्यक्रम Know your Army यानी अपनी सेना को जानिए में दिया था। इस जवाब के बाद वो देश की पाकिस्तान परस्त सेकुलर मीडिया के निशाने पर आ गए थे और उनके तमाम बयानों पर विवाद पैदा करने की कोशिश शुरू हो गई थी।

हमेशा मीडिया के निशाने पर रहे

मनोहर पर्रीकर जब तक गोवा के मुख्यमंत्री रहे उन्हें दिल्ली की कांग्रेस परस्त मीडिया ने ज्यादा भाव नहीं दिया। यहां तक कि दिल्ली के अरविंद केजरीवाल की सादगी के कसीदे पढ़ने वाले पत्रकारों ने कभी मनोहर पर्रीकर को लेकर दो शब्द भी नहीं कहे जो आईआईटी ग्रेजुएट थे मुख्यमंत्री बनने के बाद भी स्कूटर से दफ्तर आते-जाते थे। 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी शुरू से ही मनोहर पर्रीकर को अपने साथ रक्षामंत्री के तौर पर लाना चाहते थे। लेकिन शुरू में पर्रीकर इसके लिए तैयार नहीं हुए। आखिरकार मोदी को उन्हें मनाने में सफलता मिली। नवंबर 2014 को मनोहर पर्रीकर दिल्ली आ गए और रक्षा मंत्री के तौर पर शपथ ले ली। मोदी और पर्रीकर संघ में एक साथ काम कर चुके थे। मोदी जानते थे कि रक्षा मंत्रालय जैसी जगह के लिए पर्रीकर सबसे उपयुक्त व्यक्ति थे, जिनकी ईमानदारी पर वो आंख मूंद कर भरोसा कर सकते थे। पर्रीकर ने रक्षा मंत्रालय में कांग्रेस के समय के दलालों की एंट्री बंद करवाई और उनके खिलाफ पुराने केस खुलवाए। अगस्ता वेस्टलैंड घोटाले में पर्रीकर की ही सक्रियता का नतीजा है कि आज यह बात सामने आ चुकी है कि इस सौदे में सोनिया गांधी ने दलाली खाई है। इसी का नतीजा था कि दिल्ली का मीडिया मनोहर पर्रीकर के खून का प्यासा हो गया था।

संघ के मुख्य शिक्षक से रक्षामंत्री तक

गोवा के एक मध्यमवर्गीय परिवार में 13 दिसंबर 1955 को जन्मे पर्रीकर ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक के रूप में अपना सामाजिक जीवन शुरू किया था। उन्होंने बहुत छोटी उम्र से आरएसएस से रिश्ता जोड़ लिया था। वो स्कूल के अंतिम दिनों में आरएसएस के ‘मुख्य शिक्षक’ भी बन गए थे। पर्रीकर ने संघ के साथ अपने जुड़ाव को हमेशा गर्व के साथ बताया। आईआईटी से पढ़ाई पूरी करने के बाद वो 26 साल की उम्र में गोवा के मापुसा में संघचालक बन गए। आईआईटी बांबे में पढ़ाई के दौरान भी वहां पर शाखा लगाया करते थे। गोवा में कई मौकों पर वो संघ के गणवेश में लाठी लिए पथ संचालन किया करते थे। चुनावी राजनीति में उन्होंने 1994 में प्रवेश किया, जब उन्होंने पणजी विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से बीजेपी के टिकट पर चुनाव जीता। वह जून से नवंबर 1999 तक गोवा विधानसभा में विपक्ष के नेता रहे। पहली बार 24 अक्टूबर 2000 को वो गोवा के मुख्यमंत्री बने लेकिन कार्यकाल केवल 27 फरवरी 2002 तक ही चला। इसके बाद 5 जून 2002 को उन्हें फिर से मुख्यमंत्री चुना गया। 2012 के चुनाव में पर्रीकर की लोकप्रियता का ही नतीजा था कि बीजेपी को विधानसभा में 40 में से 21 सीटों पर जीत मिली।

राम मंदिर आंदोलन से भी जुड़े रहे

कम लोग जानते हैं कि मनोहर पर्रीकर ने अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर के लिए आंदोलन में भी बहुत सक्रिय भूमिका निभाई थी। 90 के दशक में वो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की उत्तरी गोवा यूनिट में सक्रिय थे। वहां पर वो राम जन्मभूमि आंदोलन के मुख्य आयोजक की भूमिका में रहे। उन्होंने गोवा में लोगों के बीच राम मंदिर आंदोलन को लेकर जागरुकता फैलाने का काम किया और बड़ी संख्या में कारसेवकों को तैयार करके अयोध्या भी भिजवाया।

एक अपील: न्यूज़लूज़ के जरिए हम राष्ट्रवादी पत्रकारिता को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं। इस वेबसाइट पर होने वाला खर्च बहुत ज्यादा है और हमारी आमदनी काफी कम। हम अपने काम को जारी रख सकें इसके लिए हमें आर्थिक मदद की जरूरत है। ये हमारे लिए ऑक्सीजन का काम करेगी। डोनेट करने के लिए क्लिक करें:

या स्कैन करें


कृपया लेख कॉपी-पेस्ट न करें। कई लोग पोस्ट कॉपी करके फेसबुक और व्हाट्सएप पर शेयर कर देते हैं, जिससे वेबसाइट की आमदनी काफी कम हो गई है। राष्ट्रवाद की विचारधारा पर आधारित यह वेबसाइट बंद हो जाएगी तो क्या आपको खुशी होगी? कृपया खबरों का लिंक शेयर करें।

comments

Polls

क्या नरेंद्र मोदी सरकार इसी कार्यकाल में जनसंख्या कानून लाएगी?

View Results

Loading ... Loading ...

Donate to Newsloose.com

एक अपील: न्यूज़लूज़ के जरिए हम राष्ट्रवादी पत्रकारिता को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं। इस वेबसाइट पर होने वाला खर्च बहुत ज्यादा है और हमारी आमदनी काफी कम। हम अपने काम को जारी रख सकें इसके लिए हमें आर्थिक मदद की जरूरत है। डोनेट करने के लिए क्लिक करें:

या स्कैन करें

Popular This Week

Don`t copy text!